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12-Dec-2025 08:33 AM
By First Bihar
Anna Hazare : अहमदनगर के रालेगणसिद्धी में देश के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने एक बार फिर महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ वर्षों से आवाज उठाते रहे अन्ना हजारे ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार सच में जनता की भलाई चाहती है, तो उसे तुरंत लोकायुक्त कानून लागू करना होगा। इसी मांग को लेकर वे आगामी 30 जनवरी से आमरण अनशन पर बैठने जा रहे हैं, जिसे उन्होंने “अपना अंतिम आंदोलन” बताया है।
लोकायुक्त कानून लागू न होने पर नाराजगी
हजारे ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार लोगों के हित के लिए नहीं, बल्कि केवल दिखावे के लिए काम कर रही है। उन्होंने बताया कि 2022 में भी उन्होंने इसी मांग को लेकर रालेगणसिद्धी में अनशन किया था। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय कृषि मंत्री ने दखल देकर उनका अनशन तुड़वाया था।
हजारे की मांग पर फडणवीस सरकार ने एक समिति गठित की थी, जिसने लोकायुक्त कानून का ड्राफ्ट तैयार किया। इसके बाद विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों में कानून पास हुआ और फाइल राष्ट्रपति के पास भी भेज दी गई। इसके बावजूद लगभग तीन साल बीत जाने के बाद भी यह कानून लागू नहीं किया गया है। अन्ना हजारे ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा—“जब कानून जनता की भलाई के लिए है, तो सरकार इसे लागू करने में इतनी देर क्यों कर रही है? अगर सरकार ईमानदार है, तो उसे इस कानून से डरना क्यों चाहिए?”
फडणवीस को भेजी गईं 7 चिट्ठियां, फिर भी कोई जवाब नहीं
हजारे ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सात बार पत्र लिखे। हर बार उन्होंने कानून लागू करने की प्रगति के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन किसी भी पत्र का कोई जवाब नहीं मिला।उन्होंने कहा कि जब सरकार जनता की आवाज सुनना ही नहीं चाहती, तब आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।“मैंने हमेशा शांतिपूर्ण तरीके से व्यवस्था में सुधार की कोशिश की है, लेकिन मौजूदा सरकार को जनता के मुद्दों की परवाह नहीं। इसलिए 30 जनवरी से आमरण अनशन के अलावा कोई विकल्प नहीं,” हजारे ने कहा।
“सरकार जनता के लिए होती है, दिखावे के लिए नहीं”
रालेगणसिद्धी में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अन्ना हजारे ने सरकार के रवैये पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार का कर्तव्य होता है कि वह जनता के हित में काम करे। “लोकायुक्त कानून भ्रष्टाचार रोकने का मजबूत हथियार है। यह सरकार और सरकारी तंत्र को जवाबदेह बनाता है। अगर सरकार इस कानून को लागू करने से पीछे हट रही है, तो इसका मतलब है कि वह पारदर्शिता नहीं चाहती,” उन्होंने कहा।
अंतिम आंदोलन होने का इशारा
अन्ना हजारे ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आंदोलन उनका अंतिम आंदोलन होगा। “मैं 87 वर्ष का हूं। स्वास्थ्य अब अनशन झेलने की क्षमता नहीं रखता, लेकिन अगर जनता के हित के लिए मेरी जान भी चली जाए तो मुझे कोई दुख नहीं होगा। जब तक सरकार लोकायुक्त कानून लागू नहीं करती, मैं आमरण अनशन जारी रखूंगा,” उन्होंने संकल्प लिया।
क्या है लोकायुक्त कानून और क्यों है जरूरी?
लोकायुक्त कानून सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार रोकने और अधिकारियों को जवाबदेह बनाने का एक महत्वपूर्ण कानून है। इसमें उच्च पदस्थ अधिकारियों, मंत्रियों और सरकारी कर्मचारियों की जांच लोकायुक्त कर सकता है। अगर यह कानून लागू हो जाता है, तो जनता की अनेक शिकायतों का त्वरित समाधान हो सकेगा और सरकारी सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ेगी।
महाराष्ट्र में फिर बढ़ेगी सियासी हलचल
अन्ना हजारे की घोषणा के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल बढ़ना तय है। सरकार पर पहले ही विपक्ष भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठा रहा है। अब अन्ना हजारे के आमरण अनशन की घोषणा से सरकार पर दबाव और बढ़ जाएगा।अब सभी की निगाहें 30 जनवरी पर टिकी हैं, जब हजारे रालेगणसिद्धी में अनशन पर बैठेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार अंतिम समय में उनकी मांग मानकर कानून लागू करती है या फिर एक बार फिर महाराष्ट्र एक बड़े सामाजिक आंदोलन का गवाह बनेगा।