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30-Dec-2025 08:14 AM
By First Bihar
Building Construction Department : बिहार के किशनगंज में न्यायालय ने भवन निर्माण विभाग (बीसीडी) के दफ्तर और उससे जुड़ी संपत्तियों को नीलाम करने का आदेश जारी किया है। यह आदेश व्यवहार न्यायालय, किशनगंज के सब जज प्रथम की अदालत ने पुराने भुगतान विवाद को लेकर दिया है। निष्पादन मामला संख्या 22/2024 (सिस-25/2024) में अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि सरकारी विभाग भी न्यायालय के आदेशों की अवहेलना नहीं कर सकते और समय पर भुगतान न होने की स्थिति में संवेदक को कानूनी कार्रवाई का पूरा अधिकार है।
अदालत ने निर्देश दिया है कि नीलामी से पूर्व कुर्क की गई संपत्तियों का इश्तेहार सार्वजनिक स्थानों पर चिपकाया गया है। नीलामी की तिथि 28 जनवरी 2026 निर्धारित की गई है। इस नीलामी में भवन निर्माण विभाग, किशनगंज का कार्यालय और उससे जुड़ी अन्य संपत्तियां शामिल होंगी। यह आदेश विभाग के लिए एक सख्त संदेश माना जा रहा है कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना का परिणाम गंभीर हो सकता है।
मामले का विवरण बताते हुए यह स्पष्ट हुआ कि संवेदक मुकेश कुमार सिंह ने लगभग आठ वर्ष पूर्व भवन निर्माण विभाग के लिए निर्माण कार्य किया था। कार्य पूर्ण होने के बावजूद विभाग ने अब तक भुगतान नहीं किया। बार-बार अनुरोध करने के बावजूद राशि का भुगतान नहीं होने पर संवेदक को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। संवेदक के अधिवक्ता अजय मंडल ने बताया कि संवेदक की अपील पर विभागीय ट्रिब्यूनल ने लगभग छह वर्ष पहले ही भुगतान का आदेश दिया था, लेकिन विभाग अब तक बकाया राशि का भुगतान नहीं कर पाया।
अधिवक्ता के अनुसार, परिवादी को विभाग से सूद सहित करीब 23 लाख रुपये का भुगतान लंबित है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अगर आदेश का पालन नहीं किया गया तो संवेदक अपनी कानूनी हक़ के तहत संपत्तियों की नीलामी करवा सकते हैं। इस कार्रवाई के माध्यम से यह संदेश भी गया है कि सरकारी विभाग भी संवेदनशील मामलों में कानूनी नियमों के पालन से अछूते नहीं हैं।
इस मामले में अदालत की सख्ती और संवेदक की कानूनी जंग को देखकर यह स्पष्ट है कि समय पर भुगतान न करने वाले विभागों के खिलाफ संवेदक पूरी कानूनी सुरक्षा के साथ अपनी मांग पूरी कर सकते हैं। कुर्क की गई संपत्तियों के सार्वजनिक इश्तेहार और नीलामी की तिथि का ऐलान इस प्रक्रिया को और गंभीर बनाता है।
कुल मिलाकर किशनगंज का यह मामला सरकारी विभागों के लिए उदाहरण है कि न्यायालय के आदेशों की अनदेखी करने पर न सिर्फ वित्तीय दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, बल्कि विभागीय संपत्तियों की नीलामी जैसी कार्रवाई का सामना करना भी पड़ सकता है।