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10-Dec-2025 10:49 AM
By First Bihar
बिहार पुलिस दूसरे राज्यों से अवैध तरीके से आकर रह रहे लोगों और संदिग्ध प्रवासियों पर नकेल कसने की तैयारी में है। राज्य के सभी थाना क्षेत्रों को अपने-अपने इलाके में बाहर से आए लोगों, संदिग्ध व्यक्तियों और आपराधिक प्रवृत्ति वाले लोगों की पहचान कर विस्तृत सूची तैयार करने का आदेश दिया गया है। पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी निर्देशों में साफ कहा गया है कि प्रत्येक थाना क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर ऐसे लोगों का सत्यापन सुनिश्चित किया जाए और आवश्यक होने पर कार्रवाई भी की जाए।
सूत्रों के अनुसार, जिले-दर-जिले यह रिपोर्ट तैयार की जा रही है कि किन इलाकों में कितने लोग बिना सत्यापन के रह रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में चौकीदारों को सक्रिय किया गया है ताकि वे घर-घर जाकर बाहरी लोगों की जानकारी एकत्रित कर सकें। अनुमान है कि राज्य भर में ऐसे लोगों की संख्या हजारों में है, जो अलग-अलग कामों, मजदूरी, फेरीगिरी या अस्थायी निवास के कारण यहां रह रहे हैं।
किरायेदारों और बाहरी प्रवासियों की विस्तृत सूची तैयार होगी
पुलिस मुख्यालय ने आदेश में कहा है कि प्रत्येक थाना क्षेत्र में यह पता लगाया जाए कि कितने लोग दूसरे राज्यों से आकर किराये पर या किसी अन्य कारण से रह रहे हैं। इस सूची में व्यक्ति का पूरा नाम, रहने का कारण—नौकरी, व्यापार, पढ़ाई या अन्य कोई कारण—और उसके स्थायी व वर्तमान पते का विवरण शामिल होगा। साथ ही आधार कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड जैसे पहचान प्रमाण पत्रों का सत्यापन भी अनिवार्य बताया गया है।
पुलिस मुख्यालय ने इस जानकारी को नियमित रूप से अपडेट करने को भी कहा है ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि सूची तैयार होने के बाद उसका क्रॉस चेक किया जाए और यदि कोई व्यक्ति अवैध प्रवासी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनन कार्रवाई की जाए।
मकान मालिकों को सख्त निर्देश – किरायेदार सत्यापन अनिवार्य
अक्सर देखा गया है कि अपराधी, अवैध प्रवासी या फर्जी पहचान रखने वाले लोग किराये के मकानों में शरण ले लेते हैं और लंबे समय तक पुलिस की नजरों से दूर रहते हैं। इस पर रोक लगाने के लिए मकान मालिकों को सख्त निर्देश जारी किये गए हैं। अब किसी भी नए किरायेदार की जानकारी थाने में जमा कराना अनिवार्य होगा। यदि कोई मकान मालिक ऐसा नहीं करता है, तो उस पर भी कार्रवाई की जा सकती है।पुलिस की रणनीति में यह भी शामिल है कि किरायेदारों का समय-समय पर पुनः सत्यापन किया जाए। इसमें उन घरों को विशेष रूप से शामिल किया गया है जहाँ किरायेदार बार-बार बदलते रहते हैं।
संदिग्ध व्यक्तियों की अलग सूची बनेगी, मॉनीटरिंग सीधे मुख्यालय से
पुलिस कप्तान अवधेश दीक्षित ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक थाना उन व्यक्तियों की अलग सूची तैयार करे जिनका पूर्व में कोई आपराधिक रिकॉर्ड रहा है या जिनकी गतिविधियाँ संदिग्ध पाई जाती हैं। यह सूची गोपनीय रहेगी और इसकी मॉनीटरिंग सीधे पुलिस मुख्यालय से की जाएगी।
थाना स्तर पर पुलिस की विशेष टीमें बनाई जा रही हैं, जो क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी करेंगी। इसके तहत बाजारों, फेरीवालों, किरायेदारों और अस्थायी तौर पर रहने वाले मजदूरों की भी विशेष जांच की जा रही है। शहर में घूम-घूमकर पुलिस युवतियों और महिलाओं से भी पूछताछ कर रही है ताकि किसी तरह की गलत गतिविधि पर तत्काल रोक लगाई जा सके।
ग्रामीण इलाकों में चौकीदार सक्रिय, फेरीवालों की भी होगी जांच
ग्रामीण क्षेत्रों में चौकीदारों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें अपने-अपने क्षेत्र में बाहरी लोगों की पहचान कर रिपोर्ट थाने को सौंपने के लिए कहा गया है। फेरीवालों, अस्थायी दुकानदारों और घुमंतू समुदाय के लोगों का भी ब्योरा जुटाया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि शहरों के साथ-साथ गांवों में भी कई लोग बिना किसी वैध दस्तावेज के रह रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा कारणों से उनकी पहचान करना आवश्यक है।
सुरक्षा कारणों से अभियान बेहद अहम
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राज्य में बढ़ते आपराधिक मामलों और बाहरी राज्यों के अपराधियों की भागीदारी को देखते हुए यह अभियान बेहद अहम है। सत्यापन के इस अभियान से न सिर्फ अवैध प्रवासियों की पहचान होगी, बल्कि किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई भी की जा सकेगी।
पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों से कहा है कि वे हर सप्ताह इस अभियान की प्रगति रिपोर्ट भेजें। आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज किया जाएगा, ताकि राज्य में शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।