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हां हम बिहारी हैं जी: रिक्शा चालक से सैनिक बने अजय यादव ने मचाया धमाल, रूस में रचा इतिहास

रिक्शा चलाने से लेकर भारतीय सेना में जगह बनाने और अब पावरलिफ्टिंग में वर्ल्ड चैंपियन बनने तक—बिहार के गया जिले के अजय यादव ने रूस में 83 किलो वर्ग में 265 किलो भार उठाकर स्वर्ण पदक जीत इतिहास रच दिया।

11-Dec-2025 05:26 PM

By First Bihar

GAYA JEE:- बिहार के गया जिले के फतेहपुर प्रखंड स्थित बथान गांव के अजय यादव ने अपने संघर्ष, मेहनत और लगन से वह मुकाम हासिल किया है, जिसकी चर्चा आज पूरे देश में हो रही है। कभी सड़कों पर रिक्शा चलाने वाले अजय ने न सिर्फ भारतीय सेना में भर्ती होकर देश सेवा की, बल्कि अब पावरलिफ्टिंग में वर्ल्ड चैंपियन बनकर भारत का नाम दुनिया भर में रोशन कर दिया है। गुरुवार को जब वे फतेहपुर लौटे, तो गांववासियों ने उनका भव्य स्वागत किया।


रूस में रचा इतिहास

अजय यादव ने रूस में आयोजित पावरलिफ्टिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप में 83 किलोग्राम भार वर्ग में 265 किलो वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता। फाइनल मुकाबले में उनका सामना ईरान से था, जहां उन्होंने दमदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इतनी बड़ी सफलता हासिल करने वाले अजय यादव का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना मेरे लिए गर्व की बात है। पिछली बार वियतनाम में गोल्ड जीता था और अब रूस में भी जीत हासिल की। मेरा सपना है कि मैं देश के लिए लगातार जीत दर्ज करता रहूं।


छह महीने में दूसरा गोल्ड मेडल

अजय ने पिछले 6 महीनों में लगातार दूसरा स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। इससे पहले वियतनाम में हुई चैंपियनशिप में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन कर गोल्ड मेडल जीता था। रूस में 4 से 7 दिसंबर तक चली इस प्रतियोगिता में कई देशों ने हिस्सा लिया था।


रिक्शा चालक से वर्ल्ड चैंपियन तक सफर

अजय यादव की सफलता की कहानी संघर्षों से भरी है। एक साधारण परिवार में जन्मे अजय के पिता रामबालक प्रसाद बैलगाड़ी चलाते थे। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण अजय को छात्र जीवन में झारखंड के झुमरी तिलैया शहर में रिक्शा तक चलाना पड़ा। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने मजदूरी भी की ताकि परिवार की आर्थिक स्थिति को सहारा मिल सके।


2010 में भारतीय सेना में चयन

कठिन परिस्थितियों के बीच अजय ने सेना में भर्ती होने का निर्णय लिया और कड़ी मेहनत के बाद 2010 में भारतीय सेना में चयनित हुए। पहली पोस्टिंग असम में हुई, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया।


यहीं से शुरू हुआ पावरलिफ्टिंग का सफर

फिटनेस के प्रति जुनूनी अजय को उनके ट्रेनर ने पावरलिफ्टिंग में करियर बनाने की सलाह दी। 2016 से उन्होंने अभ्यास शुरू किया और देखते ही देखते राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल करनी शुरू कर दी।


आज जम्मू-कश्मीर में तैनात

अजय यादव इस समय भारतीय सेना में कार्यरत हैं और जम्मू-कश्मीर में उनकी पोस्टिंग है। जुलाई 2025 में उन्होंने वियतनाम में आयोजित चैंपियनशिप में 260 किलो वजन उठाकर गोल्ड मेडल जीता था, जहां 40 से अधिक देशों के खिलाड़ियों ने भाग लिया था। अजय यादव की उपलब्धियाँ साबित करती हैं कि दृढ़ संकल्प और मेहनत से कोई भी इंसान अपनी जिंदगी बदल सकता है। बिहार के इस लाल ने संघर्ष से सफलता की कहानी लिखकर पूरे देश का मान बढ़ाया है।