BIHAR NEWS : बिहार में डिजिटल क्रांति! “बिहार वन” से घर बैठे मिलेंगी सभी सरकारी सेवाएं; इस महीने से होगी शुरुआत Bihar Teacher News: बिहार में शिक्षकों के लिए बड़ी खुशखबरी ! इनलोगों का 1 से 10 अप्रैल के बीच होगी जॉइनिंग; जानिए पूरा अपडेट IAS ranking Bihar : बिहार की नई IAS सीनियरिटी लिस्ट ने सबको चौंका दिया, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत चौथे नंबर पर, जानिए टॉप पर है किसका नाम... medicine price hike : 1 अप्रैल से दवाएं महंगी! पेरासिटामोल-एंटीबायोटिक के बढ़ेंगे दाम, जानिए कितना पड़ेगा असर BIHAR NEWS : पटना से बड़ा ऐलान! अब देश के किसी भी कोने से मदद मांग सकेंगे बिहार के प्रवासी मजदूर LPG supply rule : यदि आपके भी घर के पास पहुंच गई है PNG तो अब हर हाल में लेना होगा कनेक्शन, सरकार का सख्त आदेश, कहा —सिलेंडर होगा बंद PNG online apply : बिहार में PNG कनेक्शन लेना हुआ आसान, इस तरह ऑनलाइन करें अप्लाई; LPG पर नए नियम से उपभोक्ताओं में हलचल IRCTC fine : पटना- टाटा वंदे भारत में यात्रियों को परोसा गया खराब खाना, अब रेलवे ने लिया एक्शन; IRCTC और वेंडर पर लगाया लाखों का जुर्माना Bihar school : बिहार के स्कूलों में अब हर सुबह राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ से होगी शुरुआत – जानें नए निर्देश और नियम बाढ़ में ‘एक शाम शहीदों के नाम’ कार्यक्रम में खाली रह गई कुर्सियां, प्रचार-प्रसार को लेकर प्रशासन पर उठ रहे सवाल
07-Mar-2026 11:31 AM
By FIRST BIHAR
Bihar News: बिहार के मछली प्रेमियों के लिए चिंता की खबर है। गंगा नदी के पटना के आसपास लगभग 30 किमी क्षेत्र में स्थानीय प्रजाति की मछलियों की संख्या लगातार घट रही है। पिछले 15 वर्षों में यहां स्थानीय प्रजाति की मछलियों में करीब 31 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जबकि कुल संख्या में 40 से 50 प्रतिशत तक गिरावट आई है। यह जानकारी पटना विश्वविद्यालय द्वारा किए गए सर्वे में सामने आई है।
मछुआरा समितियों ने भी सर्वे के निष्कर्षों की पुष्टि करते हुए कहा है कि गंगा में स्थानीय मछलियों की संख्या तेजी से घट रही है। पटना विश्वविद्यालय के पूर्व शिक्षक और ‘डॉल्फिन मैन’ के नाम से प्रसिद्ध डॉ. रवीन्द्र कुमार सिन्हा के अनुसार इसके पीछे कई कारण हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण कारण गंगा में विदेशी थाई मांगुर (अफ्रीकी प्रजाति) का प्रवेश है।
केन्द्रीय अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सिफरी) ने वर्ष 2010-11 में गंगा नदी में मछलियों की प्रजातियों को लेकर सर्वे किया था। इस रिपोर्ट में पटना के आसपास गंगा में केवल 40 प्रजाति की मछलियों का उल्लेख किया गया। हालांकि कई विशेषज्ञों ने इस सर्वे पर सवाल उठाते हुए नए सर्वे की मांग की, लेकिन अब तक पटना या बिहार में सिफरी की ओर से दोबारा सर्वे नहीं कराया गया है।
मछलियों की प्रजातियों के साथ-साथ उनकी संख्या में भी गिरावट दर्ज की गई है। बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ (कॉफ्फेड) के प्रबंध निदेशक ऋषिकेश कश्यप के अनुसार पिछले एक दशक में गंगा नदी में मछलियों की शिकारमाही में 40 से 50 प्रतिशत तक कमी आई है। उनका कहना है कि पटना और आसपास के क्षेत्रों में मछुआरों को गंगा में केवल बाढ़ के दिनों में ही मछलियां मिल पाती हैं, जबकि बाकी समय उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
मछलियों की संख्या घटने के प्रमुख कारण
थाई मांगुर जैसी प्रतिबंधित विदेशी प्रजातियों का बड़े पैमाने पर पालन
आर्द्रभूमि, तालाब और झीलों का सूखना व अतिक्रमण
गंगा नदी में पानी का स्तर लगातार कम होना
नदी के पानी में पेस्टिसाइड और प्रदूषण की बढ़ती मात्रा
छोटी मछलियों का अत्यधिक शिकार
पटना विश्वविद्यालय द्वारा गंगा में मछलियों को लेकर पहले भी कई सर्वे किए गए हैं। डॉ. आर.के. सिन्हा के अनुसार 1993 से 1995 के बीच 30 किमी क्षेत्र में किए गए सर्वे में 106 प्रकार की स्थानीय मछलियां पाई गई थीं। वर्ष 2007-09 में एक शोधार्थी की रिपोर्ट में भी 106 प्रजातियों का उल्लेख किया गया, जिनमें 96 स्थानीय और 10 नई प्रजातियां शामिल थीं। वहीं 2023-24 में किए गए हालिया सर्वे में केवल 78 प्रजातियों की मछलियां दर्ज की गई हैं, जिनमें थाई मांगुर सहित कई विदेशी प्रजातियां शामिल हैं।