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26-Jan-2026 09:43 PM
By First Bihar
DARBHANGA: महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंह दरभंगा के अंतिम महाराज की छोटी महारानी अधिरानी कामसुंदरी देवी का 12 जनवरी को निधन के बाद ऐतिहासिक कामेश्वर सिंह धार्मिक न्यास ट्रस्ट की जिम्मेदारी अब कुमार शुभेश्वर सिंह के दोनों पुत्रों बड़े कुमार राजेश्वर सिंह और छोटे कुमार कपिलेश्वर सिंह ने विधिवत संभाल ली है। इससे पूर्व सितंबर माह में दरभंगा ही सिविल कोर्ट ने 47 वर्ष पुराने संपत्ति विवाद में फैसला सुनाते हुए दोनों भाइयों को महारानी अधिरानी कामसुंदरी के निधन के बाद ट्रस्टी घोषित किया था।
ट्रस्ट की जिम्मेदारी ग्रहण करने के बाद कुमार कपिलेश्वर सिंह ने कहा कि आज से उन्होंने और उनके बड़े भाई ने आधिकारिक रूप से ट्रस्ट का कार्यभार संभाल लिया है। सबसे पहले श्यामा, तारा और कंकाली माता का आशीर्वाद लिया गया और इसके बाद गोस्वामी घर पहुंचकर परंपरागत प्रक्रिया पूरी की गई। उन्होंने कहा कि दादी के जाने के बाद यह बहुत बड़ी जिम्मेदारी हम दोनों पर आई है।
उन्होंने बताया कि कामेश्वर सिंह धार्मिक न्यास के पास देश-विदेश में कुल लगभग 108 मंदिर हैं। बनारस में चार मंदिर हैं, वहीं पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी ट्रस्ट की संपत्तियां और मंदिर हैं। हाल ही में मटेश्वरनाथ परिसर स्थित तारा मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है और मधेश्वरी परिसर के अन्य जर्जर मंदिरों को भी पुनर्जीवित किया जाएगा। रामबाग स्थित गोस्वामी घर और पूरे मधेश्वरा परिसर को धार्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां पार्किंग, साफ-सफाई और श्रद्धालुओं की सुविधा की पूरी व्यवस्था होगी।
युवराज कपिलेश्वर सिंह ने कहा कि उनके दादा महाराजाधिराज डॉ. कामेश्वर सिंह सनातन धर्म के बड़े संरक्षक थे। वे न केवल स्वयं मंदिरों का निर्माण कराते थे, बल्कि जिन राजाओं से मंदिरों का रखरखाव नहीं हो पाता था, वे भी अपनी मंदिर संपत्ति इस ट्रस्ट को सौंप देते थे। इसी कारण आज ट्रस्ट के पास देशभर में मंदिर, ठाकुरबाड़ी, तालाब और भूमि सहित विशाल संपत्ति है।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में कई स्थानों पर कुप्रबंधन की स्थिति है, जिसे सुधारना प्राथमिकता होगी। मंदिरों के पुजारियों का वेतन बहुत कम है, उसे व्यवस्थित और सम्मानजनक बनाया जाएगा। “मेरे और मेरे बड़े भाई के ऊपर बहुत बड़ी जिम्मेदारी आई है, जिसे हम पूरी निष्ठा और सही व्यवस्था के साथ निभाएंगे,” उन्होंने कहा।
DARBHANGA: महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंह दरभंगा के अंतिम महाराज की छोटी महारानी अधिरानी कामसुंदरी देवी का 12 जनवरी को निधन के बाद ऐतिहासिक कामेश्वर सिंह धार्मिक न्यास ट्रस्ट की जिम्मेदारी अब कुमार शुभेश्वर सिंह के दोनों पुत्रों बड़े कुमार राजेश्वर सिंह और छोटे कुमार कपिलेश्वर सिंह ने विधिवत संभाल ली है। इससे पूर्व सितंबर माह में दरभंगा ही सिविल कोर्ट ने 47 वर्ष पुराने संपत्ति विवाद में फैसला सुनाते हुए दोनों भाइयों को महारानी अधिरानी कामसुंदरी के निधन के बाद ट्रस्टी घोषित किया था।
ट्रस्ट की जिम्मेदारी ग्रहण करने के बाद कुमार कपिलेश्वर सिंह ने कहा कि आज से उन्होंने और उनके बड़े भाई ने आधिकारिक रूप से ट्रस्ट का कार्यभार संभाल लिया है। सबसे पहले श्यामा, तारा और कंकाली माता का आशीर्वाद लिया गया और इसके बाद गोस्वामी घर पहुंचकर परंपरागत प्रक्रिया पूरी की गई। उन्होंने कहा कि दादी के जाने के बाद यह बहुत बड़ी जिम्मेदारी हम दोनों पर आई है।
उन्होंने बताया कि कामेश्वर सिंह धार्मिक न्यास के पास देश-विदेश में कुल लगभग 108 मंदिर हैं। बनारस में चार मंदिर हैं, वहीं पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी ट्रस्ट की संपत्तियां और मंदिर हैं। हाल ही में मटेश्वरनाथ परिसर स्थित तारा मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है और मधेश्वरी परिसर के अन्य जर्जर मंदिरों को भी पुनर्जीवित किया जाएगा। रामबाग स्थित गोस्वामी घर और पूरे मधेश्वरा परिसर को धार्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां पार्किंग, साफ-सफाई और श्रद्धालुओं की सुविधा की पूरी व्यवस्था होगी।
युवराज कपिलेश्वर सिंह ने कहा कि उनके दादा महाराजाधिराज डॉ. कामेश्वर सिंह सनातन धर्म के बड़े संरक्षक थे। वे न केवल स्वयं मंदिरों का निर्माण कराते थे, बल्कि जिन राजाओं से मंदिरों का रखरखाव नहीं हो पाता था, वे भी अपनी मंदिर संपत्ति इस ट्रस्ट को सौंप देते थे। इसी कारण आज ट्रस्ट के पास देशभर में मंदिर, ठाकुरबाड़ी, तालाब और भूमि सहित विशाल संपत्ति है।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में कई स्थानों पर कुप्रबंधन की स्थिति है, जिसे सुधारना प्राथमिकता होगी। मंदिरों के पुजारियों का वेतन बहुत कम है, उसे व्यवस्थित और सम्मानजनक बनाया जाएगा। “मेरे और मेरे बड़े भाई के ऊपर बहुत बड़ी जिम्मेदारी आई है, जिसे हम पूरी निष्ठा और सही व्यवस्था के साथ निभाएंगे,” उन्होंने कहा।