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Bihar Road : बिहार में सड़कों की ऊंचाई बढ़ाने पर सख्ती, पथ निर्माण विभाग ने जारी किया नया आदेश; इंजीनियरों को पहले करना होगा यह काम

बिहार में शहरी सड़कों की ऊंचाई बढ़ाने पर अब सख्ती की गई है। पथ निर्माण विभाग ने जलजमाव रोकने के लिए बिना अनुमति सड़क का लेवल बढ़ाने पर रोक लगा दी है और निर्माण से पहले सर्वे अनिवार्य कर दिया है।

12-Feb-2026 08:19 AM

By First Bihar

Bihar Road : बिहार में शहरी क्षेत्रों में सड़कों की ऊंचाई मनमाने तरीके से बढ़ाने पर अब सख्ती बरती जाएगी। राज्य के पथ निर्माण विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि बिना विभागीय अनुमति और उचित दस्तावेज के किसी भी स्थिति में सड़कों का लेवल (ऊंचाई) नहीं बढ़ाया जाएगा। शहरों में लगातार बढ़ रही जलजमाव की समस्या को देखते हुए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। विभाग के अभियंता प्रमुख सह अपर आयुक्त की ओर से जारी पत्र में सभी संबंधित इंजीनियरों को निर्देश दिया गया है कि वे नए नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।


विभाग ने अपने आदेश में कहा है कि पटना उच्च न्यायालय में शहरी क्षेत्रों में जलजमाव को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने भी सड़कों का लेवल अनियंत्रित रूप से बढ़ाने पर रोक लगाने और ड्रेनेज व्यवस्था को बेहतर बनाने का निर्देश दिया था। इसी निर्देश के अनुपालन में विभाग ने सड़क निर्माण और मरम्मत से जुड़े कई नए मानक तय किए हैं।


नए दिशा-निर्देशों के अनुसार अब किसी भी सड़क के निर्माण या मरम्मत से पहले टोपोग्राफिक सर्वे कराना अनिवार्य होगा। इस सर्वे के जरिए इलाके की भौगोलिक स्थिति, ढाल, जल निकासी की दिशा और आसपास की संरचनाओं का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता और कनीय अभियंता को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि सड़क निर्माण या मरम्मत का कार्य केवल सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही किया जाए।


विभाग ने गुणवत्ता नियंत्रण को मजबूत बनाने के लिए क्वालिटी कंट्रोल टीम को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। यह टीम टोपोग्राफिक सर्वे रिपोर्ट की जांच करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार ही हो रहा है या नहीं। साथ ही निर्माण के दौरान रोड प्रोफाइल का पालन अनिवार्य कर दिया गया है। फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण देने के भी निर्देश जारी किए गए हैं ताकि तकनीकी त्रुटियों को रोका जा सके।


नए मानकों के तहत सड़क मरम्मत की प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब मरम्मत के दौरान केवल ऊपर नई परत चढ़ाने की अनुमति नहीं होगी। बल्कि पहले सड़क की ऊपरी और पुरानी परतों को पूरी तरह हटाया जाएगा। इसके बाद नीचे की मूल परत से सड़क का निर्माण या मरम्मत की जाएगी। इससे सड़क की ऊंचाई अनावश्यक रूप से बढ़ने से रोकी जा सकेगी और जल निकासी की व्यवस्था भी प्रभावित नहीं होगी।


इसके अलावा विभाग ने आबादी वाले इलाकों और बाजार क्षेत्रों में सड़क किनारे ड्रेनेज सिस्टम बनाना अनिवार्य कर दिया है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि सड़क निर्माण के दौरान जल निकासी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि बारिश के समय पानी जमा होने की समस्या उत्पन्न न हो। बाजार क्षेत्रों में फुटपाथ या रैम्प का निर्माण भी अनिवार्य किया गया है, जिससे पैदल चलने वाले लोगों और और दुकानदारों को सुविधा मिल सके।


शहरी सड़कों की ऊंचाई बढ़ने से जलजमाव की समस्या का मुद्दा हाल ही में बिहार विधान परिषद में भी उठा था। परिषद में इस विषय को लेकर सदस्य अब्दुल बारी सिद्दिकी ने सवाल उठाते हुए कहा था कि कई जगह सड़कों को ऊंचा करने से ड्रेनेज बाधित हो रहा है, जिसके कारण बारिश के दौरान पानी घरों और बाजारों में जमा हो जाता है। इस पर जवाब देते हुए पथ निर्माण मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि सरकार इस समस्या को गंभीरता से ले रही है।


मंत्री ने बताया कि ओपीआरएमसी-तीन (Output and Performance Based Road Maintenance Contract) के तहत सड़कों की मरम्मत और निर्माण में विशेष प्रावधान किए जा रहे हैं। इसके तहत मरम्मत के दौरान पुरानी परतों को हटाकर सबसे निचली परत से सड़क निर्माण किया जाएगा, जिससे सड़क की गुणवत्ता बेहतर होगी और जलजमाव की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।


राज्य सरकार का मानना है कि अनियोजित तरीके से सड़क की ऊंचाई बढ़ाने के कारण कई शहरी क्षेत्रों में जल निकासी प्रणाली प्रभावित हुई है, जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नए नियमों के लागू होने से सड़क निर्माण की प्रक्रिया अधिक वैज्ञानिक और व्यवस्थित होगी। साथ ही शहरों में जलजमाव की समस्या को कम करने में भी मदद मिलेगी।


पथ निर्माण विभाग ने सभी इंजीनियरों और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग की कोशिश है कि भविष्य में सड़क निर्माण कार्य तकनीकी मानकों और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखकर ही किया जाए, ताकि शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास टिकाऊ और सुरक्षित तरीके से हो सके।