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24-Dec-2025 02:04 PM
By First Bihar
Bihar News: बिहार में रेल यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेनों में बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए रेलवे पुलिस ने एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया है। अक्सर रेल थाना क्षेत्रों का दायरा बहुत बड़ा होने के कारण पुलिस को घटनास्थल पर पहुंचने में देर हो जाती है, जिसका फायदा अपराधी उठा लेते हैं। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए पटना रेल एसपी डॉ. इनामुल हक ने पुलिस मुख्यालय को एक अहम प्रस्ताव भेजा है।
इस योजना के तहत न केवल एक नया रेल थाना स्थापित किया जाएगा, बल्कि पांच रणनीतिक स्थानों पर रेल अपराध नियंत्रण केंद्र भी बनाए जाएंगे। इसका उद्देश्य घटनास्थल तक पुलिस की त्वरित पहुँच सुनिश्चित करना और रेल यात्रियों की सुरक्षा को बढ़ाना है।
रेल थानों का बड़ा इलाका
पटना रेल जिले के अंतर्गत बिहारशरीफ, गया, दानापुर, आरा, बक्सर और पाटलिपुत्र जैसे थानों का क्षेत्रफल बेहद विशाल है। कई थानों का दायरा 45 से 59 किलोमीटर तक फैला हुआ है। ऐसे में अगर किसी दूरस्थ स्टेशन, हॉल्ट या पुल के पास कोई घटना होती है तो पुलिस को वहां पहुंचने में काफी समय लग जाता है। इसी देरी का फायदा अपराधी उठाते रहे हैं।
पहाड़पुर में नया रेल थाना क्यों जरूरी
गया रेल थाना लगभग 59 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में फैला है। गया जंक्शन और दिलवा के बीच स्थित पहाड़पुर इस इलाके का संवेदनशील हिस्सा है, जहां तक पहुंचने में पुलिस को समय लगता है। गया से पहाड़पुर की दूरी लगभग 27 से 32 किलोमीटर है और बीच में कई हॉल्ट पड़ते हैं। इसी वजह से पहाड़पुर में नया रेल थाना खोलने का प्रस्ताव भेजा गया है, ताकि घटनाओं पर तुरंत नियंत्रण हो सके और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
हरनौत से दीघा तक पांच नए अपराध नियंत्रण केंद्र
रेल एसपी के प्रस्ताव में हरनौत, सदीसोपुर, बिहिया, डुमरांव और दीघा ब्रिज पर रेल अपराध नियंत्रण केंद्र बनाने की सिफारिश की गई है।
हरनौत: बिहारशरीफ रेल थाना क्षेत्र में आता है, जहां आसपास की घटनाओं में पुलिस को पहुंचने में देरी होती है।
सदीसोपुर: दानापुर रेल थाना क्षेत्र में कोइलवर तक फैले लंबे इलाके को देखते हुए चुना गया।
बिहिया: आरा रेल थाना का क्षेत्र करीब 50 किलोमीटर लंबा है, इसलिए इसे रणनीतिक स्थान माना गया।
डुमरांव: बक्सर रेल थाना के 45 किलोमीटर लंबे दायरे में यह अहम पड़ाव है।
दीघा ब्रिज: पाटलिपुत्र रेल थाना से दूरी कम होने के बावजूद पुल और आसपास की संवेदनशीलता को देखते हुए अपराध नियंत्रण केंद्र आवश्यक है।
सुरक्षा मजबूत होगी, अपराध पर लगेगी लगाम
रेल पुलिस का मानना है कि इन नए केंद्रों और थाना के बनने से घटनास्थल तक पहुंचने का समय घटेगा और रेल यात्रियों की सुरक्षा मजबूत होगी। इसके साथ ही, यह कदम अपराधियों के लिए चेतावनी का संदेश भी होगा। प्रस्ताव पर अभी अंतिम निर्णय पुलिस मुख्यालय को लेना है, लेकिन इससे साफ संकेत मिलते हैं कि बिहार में रेल सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से सुदृढ़ करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। इस योजना के अमल में आने के बाद न केवल यात्रियों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि ट्रेन स्टेशनों और ट्रेनों में अपराध दर में भी कमी आएगी। यह पहल रेल सुरक्षा में एक नया मापदंड स्थापित कर सकती है।