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23-Jun-2025 07:43 AM
By First Bihar
Bihar News: बिहार के भोजपुर जिले में बिना निबंधन के चल रहे 160 कोचिंग सेंटरों पर प्रशासन की तलवार लटक रही है। शिक्षा विभाग ने इन अवैध कोचिंग सेंटरों को बंद करने का आदेश जारी किया है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाने की तैयारी है। जिले के मुख्यालय सहित 14 प्रखंडों में कुल 297 कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं, जिनमें से केवल 137 ने निबंधन के लिए आवेदन जमा किया है। शेष 160 कोचिंग सेंटर बिना किसी वैध अनुमति के धड़ल्ले से चल रहे हैं, जिसके खिलाफ जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी अहसन ने बताया कि इन अवैध सेंटरों को चिन्हित करने का काम शुरू हो चुका है और जल्द ही इन पर कठोर कार्रवाई होगी। जिला शिक्षा कार्यालय ने कोचिंग सेंटरों के निबंधन के लिए एक विशेष फॉर्मेट जारी किया है, जिसमें ट्रस्ट की कॉपी, भूमि का विवरण, स्थायी-अस्थायी पता, छात्र-छात्राओं की संख्या, शौचालय और वर्ग कक्षों की संख्या, पार्किंग और पेयजल जैसी सुविधाओं की जानकारी देना अनिवार्य है।
बिहार कोचिंग संस्थान अधिनियम 2010 के तहत, पहली बार नियम तोड़ने पर 25,000 रुपये और दूसरी बार 1,00,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। जुलाई 2025 के बाद इन नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। डीएम ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि बिना निबंधन के चल रहे सेंटरों को बंद किया जाए और जो सेंटर नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनकी मान्यता रद्द की जा सकती है।
भोजपुर में कई कोचिंग सेंटर गली-मोहल्लों में छोटे-छोटे कमरों में संचालित हो रहे हैं, जहां न तो छात्रों के लिए समुचित बैठने की व्यवस्था है और न ही बुनियादी सुविधाएं। ये सेंटर मोटी फीस वसूलते हैं, लेकिन सिलेबस समय पर पूरा नहीं करते, ताकि छात्रों को पाठ्यक्रम की प्रगति का पता न चले।
बिहार कोचिंग संस्थान अधिनियम के अनुसार, इन सेंटरों को अग्निशमन, शौचालय, पेयजल, और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करनी होती है, लेकिन ज्यादातर सेंटर इन नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की गाड़ियां इन सेंटरों के पास से रोज गुजरती हैं, फिर भी अब तक इन पर नकेल कसने में नाकामी रही है।
इससे पहले भी कई डीएम ने कोचिंग सेंटरों के निबंधन और नियमों के पालन के लिए आदेश जारी किए थे, लेकिन गली-मोहल्लों में अवैध कोचिंग सेंटरों का संचालन बदस्तूर जारी है। बिहार कोचिंग संस्थान अधिनियम के तहत, निबंधन तीन साल के लिए होता है, जिसके लिए शुरुआत में 5,000 रुपये और नवीकरण के लिए 3,000 रुपये शुल्क देना होता है। वर्तमान डीएम के सख्त आदेश के बाद यह देखना होगा कि यह कार्रवाई धरातल पर कितनी प्रभावी होती है। प्रशासन का दावा है कि टेक्निकल सेल और स्थानीय सहयोग से जल्द ही इन अवैध सेंटरों पर ताला लगेगा और नियम तोड़ने वालों को कड़ा सबक सिखाया जाएगा।