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06-Feb-2026 10:15 AM
By Viveka Nand
Bihar Bhumi: एक तरफ बिहार सरकार सरकारी भूमि से कब्जा हटाने को लेकर लगातार प्रयास कर रही है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सरकारी भूमि से कब्जा हटाने को लेकर अभियान चला रखा है. इधर, उनके ही अधिकारी करोड़ों की सरकारी भूमि के नेचर से खिलवाड़ कर जमीन को निजी साबित करने में जुटे हैं. खुलासे के बाद भी अभी तक जांच शुरू नहीं की गई है. लिहाजा विवादित भूमि का प्रकार बदलकर अतिक्रमणवाद खत्म करने वाले दो अंचल अधिकारी और एक डीसीएलआर पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.
मोतिहारी के अरेराज में करोड़ों की जमीन पर हुआ खेल
पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) में अधिकारियों और भूमाफियाओं का गजब सांठ गांठ उजागर हुआ है।अधिकारियों ने सरकार की आंख में धूल झोककर करोड़ो की बेशकीमती सरकारी जमीन में खेल कर दिया। अरेराज के तत्कालीन डीसीएलआर के नेतृत्व में बनी टीम ने बेशकीमती सरकारी जमीन 'बकास्त वृतदार बाजार' की 1.98 एकड़ जमीन की रिपोर्ट में सिर्फ 'बाजार' शब्द हटाकर सरकार व वरीय पदाधिकारी को गुमराह कर दिया. बाजार शब्द हटते ही जमीन का प्रकार बदल जाने से एसडीओ द्वारा पूर्व से चलाए जा रहे 'बकास्त वृतदार बाजार' की जमीन से अतिक्रमण वाद बंद हो गया. यानि जिस जमीन से अतिक्रमण को खत्म किया जाना था, उससे प्रशासन वापस हो गया, अतिक्रमणवाद को ही खत्म कर दिया गया. इतना ही नही डीसीएलआर के नेतृत्व में बनी कमिटी ने सरकार की आंख में धूल झोंकने के लिए नियम को ताक पर रखकर तथ्यों का गला घोंट दिया. जांच रिपोर्ट में जमीन को *बकास्त*बताया गया।जबकि वास्तविक प्रविष्टि *बकास्त वृतदार बाजार*है। जांच अधिकारियों द्वारा बिहार भूमि सुधार अधिनियम 1950 की धारा 7 A की पूरी तरह नजरअंदाज कर बड़ा खेल किया गया। उक्त जमीन मोतीहारी जिला के हरसिद्धि बाजार की बतायी जा रही है।
अतिक्रमणवाद खत्म कर दिया गया...
पदाधिकारियो ने भूमाफियाओं से मिलकर ने करोड़ो की सरकारी जमीन में गलत रिपोर्ट देकर बड़ा खेल किया. अरेराज अनुमंडल के हरसिद्धि बाजार में बेशकीमती करोड़ो की सरकारी जमीन का प्रकार बदलकर अधिकारियों ने सरकार व वरीय पदाधिकारियो के आंख में धूल झोंक मालामाल हो गए ।अरेराज अनुमंडल अतिक्रमण वाद सं० 42/2019-20 में प्रतिवादी सं० 1 को क्रम सं० 74 पर अतिक्रमणकारी के रूप में चिह्नित किया गया था।, जिसने लगभग 1.98 एकड़ भूमि पर व्यवसायिक व आवासीय संरचनाएँ बनाकर अवैध कब्जा कर रखा है।अतिक्रमण वाद की सुनवाई के दौरान तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्ता, अरेराज द्वारा पत्रांक 507 दिनांक 05.11.2022 (जाँच प्रतिवेदन दिनांक 26.10.2022) समर्पित किया गया, जिसमें विभागीय पत्रांक 925 दिनांक 11.11.2014 पर आधारित होकर यह राय दी गई कि जमाबंदी रद्द किए बिना अतिक्रमण वाद जारी नहीं रखा जाना चाहिए।
बकास्त वृतदार बाजार से बाजार शब्द हटाकर जमीन का प्रकार बदल दिया
भूमि को जानबूझकर केवल “बकास्त” बताया गया, जबकि वास्तविक प्रविष्टि “बकास्त वृत्तदार बाजार” है, जिससे बिहार भूमि सुधार अधिनियम, 1950 की धारा 7A को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। बिहार भूमि सुधार अधिनियम, 1950 की धारा 7A स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करती है कि हाट अथवा बाजार किस्म की भूमि पर अधिनियम की धारा 5, 6 अथवा 7 के अंतर्गत किसी भी प्रकार का अधिकार मध्यवर्ती (इंटरमीडियरी) को प्राप्त नहीं होगा तथा ऐसी भूमि पूर्णतः राज्य में निहित होगी। इसके बावजूद, अवैध जमाबंदी रद्द करने की कार्यवाही आरंभ करने के स्थान पर अंचलाधिकारी, हरसिद्धि अंचल ने अधिकार क्षेत्र से परे जाकर अतिक्रमण वाद सं० 42/2019-20 को ही समाप्त कर दिया,जो कि बिहार सार्वजनिक भूमि अतिक्रमण अधिनियम एवं माननीय न्यायालय के निर्देशों के प्रतिकूल है।
एसडीओ ने ही डीसीएलआर-सीओ की खोली पोल
अरेराज के तत्कालीन डीसीएलआर और दो अंचल अधिकारियों के खेल को अरेराज के एसडीओ ने पकड़ लिया. इसके बाद इस खेल से जिलाधिकारी मोतिहारी को अवगत कराया गया है. एसडीओ ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि हरसिद्धी की उक्त जमीन 'बकास्त वृतदार बाजार' किस्म की है.