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Bihar job update : बिहार में नौकरी पर सरकार सख्त, अब सभी विभाग को हर महीने देना होगा पूरा हिसाब-किताब; जारी हुआ आदेश

बिहार सरकार ने 5 साल में 1 करोड़ रोजगार के लक्ष्य को लेकर निगरानी सख्त की। अब हर विभाग को हर महीने रोजगार डेटा देना होगा।

19-Mar-2026 07:53 AM

By First Bihar

Bihar job update : राज्य सरकार ने पांच वर्षों में एक करोड़ नौकरी और रोजगार उपलब्ध कराने के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए अब निगरानी तंत्र को और अधिक सख्त कर दिया है। Nitish Kumar के नेतृत्व में ‘सात निश्चय-3’ के तहत दोगुना रोजगार और दोगुनी आय के लक्ष्य को लेकर सभी विभागों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। सरकार का मानना है कि मजबूत मॉनिटरिंग और डेटा आधारित रणनीति से रोजगार सृजन की गति तेज होगी और लक्ष्य समय पर हासिल किया जा सकेगा।


नियोजन एवं प्रशिक्षण, युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग ने इस दिशा में एक अहम पहल करते हुए सभी विभागों के रोजगार सृजन से जुड़े नोडल पदाधिकारियों को पत्र जारी किया है। विभागीय निदेशक स्तर से भेजे गए इस पत्र में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि योजना स्वीकृति के बाद से अब तक सृजित नौकरियों और रोजगार के अवसरों का विस्तृत विवरण उपलब्ध कराया जाए। इससे सरकार को वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन करने में मदद मिलेगी।


सूत्रों के अनुसार, विभाग ने एक निर्धारित प्रपत्र (फॉर्मेट) भी जारी किया है, जिसमें विभिन्न प्रकार की नियुक्तियों का ब्योरा मांगा गया है। इसमें नियमित नियुक्ति, संविदा आधारित रोजगार, आउटसोर्सिंग, मानदेय आधारित कार्य और अन्य सभी रोजगार के अवसरों को शामिल किया गया है। इस व्यापक डेटा संग्रह का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रोजगार सृजन के हर पहलू का समेकित विश्लेषण किया जा सके।


सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि अब सभी विभागों को हर महीने रोजगार सृजन की अद्यतन जानकारी अनिवार्य रूप से उपलब्ध करानी होगी। यह जानकारी एक केंद्रीकृत पोर्टल पर अपलोड की जाएगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और आम लोगों, विशेषकर नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को नए अवसरों की जानकारी आसानी से मिल सकेगी। विभागों को यह भी बताना होगा कि समूह ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ के पदों पर कितनी नियुक्तियां हुई हैं, साथ ही संविदा और आउटसोर्सिंग के जरिए कितने लोगों को रोजगार मिला है।


इसके अलावा, सामाजिक न्याय को ध्यान में रखते हुए एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस और सामान्य वर्ग के अनुसार अलग-अलग आंकड़े भी देने होंगे। हर महीने यह बताना अनिवार्य होगा कि किस वर्ग के कितने युवाओं को रोजगार मिला है। इससे सरकार को न केवल कुल रोजगार सृजन की जानकारी मिलेगी, बल्कि यह भी स्पष्ट होगा कि विभिन्न वर्गों को कितनी भागीदारी मिल रही है।


इस पूरी पहल के पीछे सरकार के दो प्रमुख उद्देश्य हैं। पहला, राज्य स्तर पर रोजगार सृजन से जुड़ी हर गतिविधि की सटीक और अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराना। दूसरा, पारदर्शिता बढ़ाते हुए इन आंकड़ों को सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना, ताकि युवाओं को सही समय पर सही जानकारी मिल सके।


सरकार का मानना है कि सख्त निगरानी और नियमित रिपोर्टिंग से विभागों की जवाबदेही तय होगी और वे अपने लक्ष्यों को लेकर अधिक गंभीर होंगे। इससे न केवल रोजगार सृजन की प्रक्रिया में तेजी आएगी, बल्कि बिहार के युवाओं को अपने ही राज्य में बेहतर अवसर भी मिल सकेंगे।