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23-Nov-2025 01:11 PM
By First Bihar
SVU Raid Bihar: बिहार विधानसभा चुनाव खत्म होते ही राज्य की जांच एजेंसियां एक बार फिर सक्रिय मोड में आ गई हैं। चुनाव अवधि के दौरान स्थगित कई कार्रवाई अब तेज की जा रही है। इसी के तहत विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने रविवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए औरंगाबाद के उत्पाद अधीक्षक अनिल कुमार आजाद के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
अनिल कुमार आजाद पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए 1 करोड़ 58 लाख 45 हजार 888 रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की है। यह राशि उनकी ज्ञात आय के स्रोतों के अनुपात में काफी अधिक पाई गई, जिसके बाद जांच एजेंसी ने विस्तृत सत्यापन के बाद उनके खिलाफ केस दर्ज किया।
विशेष निगरानी इकाई ने सभी आरोपों की पुष्टि के बाद आजाद के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जन (DA केस) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की कई धाराओं में एफआईआर दर्ज की। इसके बाद कोर्ट से उनके परिसरों की तलाशी का वारंट प्राप्त होने पर रविवार सुबह एक साथ औरंगाबाद, जहानाबाद और पटना में छापेमारी शुरू की गई। एसवीयू की अलग-अलग टीमों ने तड़के ही रेलवे स्टेशन रोड, सरकारी आवास, निजी घरों और इससे जुड़े कई स्थानों पर दस्तावेजों की जांच शुरू की।
पटना स्थित शिवपुरी के “राम निकुंज” नामक आवासन पर छापेमारी के दौरान एसवीयू को जमीन निवेश से जुड़े कई अहम दस्तावेज मिले हैं। सूत्रों के अनुसार अब तक की जांच में जमीन की खरीद-बिक्री के कई रजिस्ट्री पेपर, कई बैंक पासबुक और लेनदेन विवरण, निवेश संबंधी कागजात, कई संदिग्ध खातों की जानकारी और लॉकर्स से जुड़े दस्तावेज भी शामिल है। इन दस्तावेजों से यह भी संकेत मिल रहे हैं कि अवैध अर्जित धनराशि को कई जिलों में जमीन खरीदने और निर्माण कार्यों में लगाया गया है।
औरंगाबाद, जहानाबाद और पटना में एसवीयू की छापेमारी जारी है। अधिकारियों के अनुसार, यह सिर्फ पहली चरण की कार्रवाई है। जांच के आगे बढ़ने पर कई और राज सामने आ सकते हैं क्योंकि आजाद के नाम पर और उनके रिश्तेदारों के नाम पर भी विभिन्न जिलों में संपत्ति होने की जानकारी एजेंसी पहले ही जुटा चुकी है।
सूत्रों के अनुसार, अब तक मिले दस्तावेज आगे की जांच को और मजबूत करेंगे तथा बैंक लेनदेन, प्रॉपर्टी वैल्यूएशन और संदिग्ध निवेश के तारों को खंगाला जाएगा। पिछले तीन महीनों में एसवीयू ने कई अधिकारियों पर कार्रवाई की है, जिनमें अभियंता, ब्लॉक अधिकारी, स्वास्थ्यकर्मी और पुलिस पदाधिकारी शामिल हैं। चुनाव समाप्त होने के बाद विशेष निगरानी इकाई ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भ्रष्टाचार के किसी भी मामले पर अब तेज कार्रवाई होगी और “फास्ट-ट्रैक” मोड अपनाया जाएगा।