Breakingधर्मShattila Ekadashi 2025: षटतिला एकादशी का जानें महत्व, तिथि और शुभ मुहूर्त
षटतिला एकादशी, सनातन धर्म में माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाने वाला एक पवित्र पर्व है। यह व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित होता है।

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Breakingधर्मषटतिला एकादशी, सनातन धर्म में माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाने वाला एक पवित्र पर्व है। यह व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित होता है।
धर्ममहाकुंभ, जो विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है, जल्द ही उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित होने जा रहा है। यह मेला लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था, पुण्य और मोक्ष प्राप्ति का माध्यम है।
धर्मशनि देव को न्याय का देवता माना जाता है, और उनका प्रभाव व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण होता है। शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित होता है, और इस दिन उनकी पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
धर्ममेवाड़ के प्रसिद्ध श्री सांवलिया सेठ मंदिर में दानपात्र की गिनती का दूसरा राउंड सोमवार को संपन्न हुआ, जिसमें एक शानदार राशि सामने आई। इस राउंड में 4 करोड़ 76 लाख 69 हजार रुपये की गिनती पूरी हुई।
धर्मनए साल के दूसरे सप्ताह की शुरुआत हो चुकी है, और इस दौरान कई महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार मनाए जाएंगे। इस सप्ताह में गुरु गोविंद सिंह जयंती, पौष पुत्रदा एकादशी, शनि त्रयोदशी, और लोहड़ी जैसे प्रमुख पर्व शामिल हैं।
धर्मसोमवार का दिन भगवान शिव को विशेष रूप से प्रिय है, और यह दिन उनके भक्तों के लिए अत्यधिक महत्व रखता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा, व्रत और मंत्र जाप से व्यक्ति को जीवन की सारी कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है।
Breakingधर्मअयोध्या में लगातार बढ़ रही शीतलहर और घने कोहरे के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है। प्रभु श्रीराम के मंदिर में विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि प्रभु राम के बालक स्वरूप को सर्दी से बचाया जा सके।
धर्मसंत प्रेमानंद महाराज के अनुसार, कुछ विशेष अवसरों पर मौन रखना अत्यंत लाभकारी होता है। उनका कहना है कि बोलने और चुप रहने की कला इंसान के व्यक्तित्व का आईना होती है।
Breakingधर्मपटना के एक सौ से अधिक मंदिरों में सामूहिक हनुमान चालीसा का आयोजन आगामी 11 जनवरी को होने वाला है. इस कार्यक्रम को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं.
धर्मरामायण में भगवान श्री राम और उनके परम भक्त हनुमान जी की पहली मुलाकात एक महत्वपूर्ण और अद्भुत घटना है। यह मुलाकात उस समय हुई जब भगवान राम अपनी पत्नी सीता की खोज में वन में भटक रहे थे।
धर्महर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा बड़े ही धूमधाम से निकाली जाती है। इस वर्ष यह यात्रा 27 जून 2025 को शुरू होगी।
धर्ममकर संक्रांति हर साल 14 जनवरी को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। यह पर्व न केवल धार्मिक बल्कि वैज्ञानिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी बेहद खास है।