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E20 विवाद पर पहला अहम फैसला, कंज्यूमर फोरम ने वाहन मालिक को दी बड़ी राहत; कार कंपनी को करना होगा यह काम

E20 Fuel Dispute: रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने E20 पेट्रोल विवाद में देश का पहला बड़ा फैसला सुनाते हुए कार कंपनी और डीलर को वाहन मालिक को मुआवजा देने का आदेश दिया। आयोग ने माना कि समस्या का प्रभावी समाधान नहीं किया गया और उपभोक्ता को राहत दी।

E20 Fuel Dispute
प्रतिकात्मक तस्वीर
© Google
Mukesh Srivastava
3 मिनट

E20 Fuel Dispute: भारत में E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच एक बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक वाहन मालिक के पक्ष में ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए कार कंपनी और डीलर को मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसे भारत में E20 पेट्रोल विवाद से जुड़ा पहला महत्वपूर्ण न्यायिक फैसला माना जा रहा है।



शिकायतकर्ता का आरोप था कि पेट्रोल पंप से E20 पेट्रोल भरवाने के बाद उनकी कार में लगातार इंजन संबंधी समस्याएं शुरू हो गईं। इंजन मिसफायर करने लगा, वाहन की परफॉर्मेंस गिर गई और माइलेज भी लगातार कम होती गई। कई बार अधिकृत वर्कशॉप में मरम्मत कराने के बावजूद समस्या दूर नहीं हुई, जिसके बाद उन्हें इंजन की मरम्मत पर भारी खर्च करना पड़ा।



मामले की सुनवाई के दौरान आयोग के सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या वास्तव में E20 पेट्रोल इंजन की खराबी का कारण बना। कार कंपनी और डीलर ने इस दावे का विरोध करते हुए कहा कि संबंधित कार मॉडल E20 ईंधन के लिए पूरी तरह उपयुक्त है और इंजन की समस्या का कारण खराब रखरखाव या कोई अन्य तकनीकी वजह हो सकती है।



हालांकि, उपभोक्ता आयोग ने कंपनी की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि वाहन मालिक बार-बार अधिकृत वर्कशॉप गया, लेकिन हर बार मरम्मत के बाद भी वही समस्या दोबारा सामने आई। इससे स्पष्ट होता है कि कंपनी इंजन की वास्तविक खराबी का प्रभावी समाधान नहीं कर सकी।



अपने फैसले में आयोग ने E20 पेट्रोल की उपलब्धता को लेकर भी अहम टिप्पणी की। आयोग ने कहा कि वर्तमान में देश के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल ही आसानी से उपलब्ध है, ऐसे में आम उपभोक्ताओं के पास दूसरा व्यावहारिक विकल्प नहीं बचता। इसलिए वाहन मालिकों से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे E20 ईंधन का उपयोग पूरी तरह से टाल दें।



आयोग ने कार कंपनी और डीलर को संयुक्त रूप से वाहन मालिक की मरम्मत पर हुए पूरे खर्च की भरपाई करने का आदेश दिया है। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना और मुकदमे के खर्च के लिए भी मुआवजा देने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने भुगतान के लिए समय सीमा भी तय की है और स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर कंपनी को मुआवजा राशि पर अतिरिक्त ब्याज भी देना होगा।

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता