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केदारनाथ के पास छिपे हैं ये 2 दिव्य कुंड, जिनके जल को माना जाता है मोक्षदायक; जानिए इसकी मान्यता

Char Dham Yatra: केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही श्रद्धालुओं का रुख पवित्र कुंडों की ओर भी बढ़ जाता है। यहां स्थित उदक कुंड और अमृत कुंड को अत्यंत दिव्य माना जाता है, जिनके जल को मोक्ष और रोग मुक्ति से जोड़ा जाता...

केदारनाथ के पास छिपे हैं ये 2 दिव्य कुंड, जिनके जल को माना जाता है मोक्षदायक; जानिए इसकी मान्यता
Ramakant kumar
4 मिनट

Char Dham Yatra: चार धाम यात्रा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बेहद खास माना जाता है। हर साल हजारों श्रद्धालु केदारनाथ धाम, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन के लिए निकलते हैं। 22 अप्रैल से केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही इस पवित्र यात्रा की शुरुआत हो चुकी है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल केदारनाथ के दर्शन मात्र से मोक्ष की प्राप्ति होने की मान्यता है।


लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि केदारनाथ मंदिर के आसपास कुछ ऐसे दिव्य कुंड भी हैं, जिनका धार्मिक महत्व बेहद अद्भुत माना जाता है। खासतौर पर दो कुंड—उदक कुंड और अमृत कुंड—श्रद्धालुओं के बीच आस्था का केंद्र बने हुए हैं।


उदक कुंड

केदारनाथ मंदिर से लगभग 100 मीटर की दूरी पर स्थित उदक कुंड को बेहद पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इस कुंड में वही जल आता है, जो भगवान शिव के शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है। यहां एक शिवलिंग भी स्थापित है, जहां भक्त पूजा-अर्चना करते हैं।


श्रद्धालु इस कुंड का जल अपने साथ घर ले जाना शुभ मानते हैं। धार्मिक विश्वास के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के अंतिम समय में इस जल की कुछ बूंदें उसके मुख में डाली जाएं, तो उसे जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है। यही कारण है कि केदारनाथ यात्रा पर आने वाले भक्त इस जल को जरूर साथ लेकर जाते हैं।


अमृत कुंड

केदारनाथ के पास स्थित अमृत कुंड को चमत्कारी माना जाता है। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, इसे अमृत के समान पवित्र जल का स्रोत माना जाता है। मान्यता है कि इस कुंड के जल का छिड़काव करने से व्यक्ति के रोग और शारीरिक कष्ट दूर होते हैं।


श्रद्धालु यहां आकर न सिर्फ पूजा करते हैं, बल्कि अपने जीवन की परेशानियों से मुक्ति की कामना भी करते हैं। यह कुंड सकारात्मक ऊर्जा और आस्था का प्रतीक माना जाता है।


ये पवित्र कुंड अब हो चुके हैं लुप्त

केदारनाथ क्षेत्र में पहले कुछ अन्य कुंड भी थे, जिनका अब अस्तित्व काफी हद तक खत्म हो चुका है या वे दिखाई नहीं देते।

  •  हवन कुंड: पहले मंदिर के सामने स्थित था, लेकिन प्राकृतिक आपदा के बाद लुप्त हो गया।
  •  रेतस कुंड: मान्यता है कि यहां देवी रति ने कामदेव के भस्म होने पर विलाप किया था। “ॐ नमः शिवाय” बोलने पर जल में बुलबुले उठने की बात कही जाती है।
  •  हंस कुंड: कहा जाता है कि यहां ब्रह्मा जी ने हंस का रूप धारण किया था और पितरों का तर्पण किया जाता था।


आस्था और विज्ञान के बीच संतुलन जरूरी

इन कुंडों से जुड़ी मान्यताएं सदियों पुरानी हैं और श्रद्धालुओं की गहरी आस्था से जुड़ी हैं। हालांकि, इन मान्यताओं की वैज्ञानिक पुष्टि अलग विषय है, इसलिए श्रद्धालुओं को आस्था के साथ-साथ सावधानी भी बरतनी चाहिए। चार धाम यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, प्रकृति और आध्यात्मिक अनुभव का अद्भुत संगम है। केदारनाथ के ये दिव्य कुंड इस यात्रा को और भी खास बना देते हैं।

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रिपोर्टर / लेखक

Ramakant kumar

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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