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केदारनाथ धाम के कपाट खुले, चारधाम यात्रा का हुआ भव्य आगाज़; भक्ति और आस्था का महासंगम

Kedarnath Dham: केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ चारधाम यात्रा का शुभारंभ हो गया है. हजारों श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन को पहुंचे हैं.

Kedarnath Dham
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Kedarnath Dham: उत्तराखंड की पावन धरती पर एक बार फिर भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर पहले गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। इसके बाद अब पवित्र केदारनाथ धाम के कपाट भी पूरे विधि-विधान के साथ खोल दिए गए हैं। चारधाम यात्रा के क्रम में अगला और अंतिम पड़ाव बद्रीनाथ धाम है, जिसके कपाट 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। इन चारों धामों के कपाट खुलते ही चारधाम यात्रा अपने पूर्ण स्वरूप में आ जाती है और देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु देवभूमि की ओर रुख करते हैं।


बाबा केदार के स्वागत के लिए मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया गया था। ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों से लाए गए 51 क्विंटल ताजे गेंदे के फूलों से मंदिर का विशेष श्रृंगार किया गया। कपाट खुलने के ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए हजारों श्रद्धालु केदारनाथ धाम पहुंचे। जैसे ही मंदिर के मुख्य द्वार खुले, पूरा केदारघाटी क्षेत्र “बम-बम भोले” और “जय केदार” के जयकारों से गूंज उठा।


भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में केदारनाथ धाम को 11वां ज्योतिर्लिंग माना जाता है। मान्यता है कि यहां ग्रीष्मकाल के छह महीनों में भक्त पूजा-अर्चना करते हैं, जबकि शीतकाल में कपाट बंद रहने पर देवता स्वयं यहां पूजा संपन्न करते हैं। भारी बर्फबारी के कारण शीतकाल में बाबा की डोली ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ ले जाई जाती है, जहां छह माह तक पूजा-अर्चना होती है। यह धाम उत्तराखंड के पंच केदारों में प्रथम केदार के रूप में प्रतिष्ठित है।


पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, केदारनाथ धाम का संबंध महाभारत काल से जुड़ा है। कहा जाता है कि कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद पांडव अपने पापों से मुक्ति के लिए भगवान शिव की खोज में हिमालय पहुंचे थे। भगवान शिव ने बैल का रूप धारण किया था, और जिस स्थान पर उनकी पीठ प्रकट हुई, वहीं केदारनाथ धाम की स्थापना हुई। इसे मोक्ष का द्वार भी माना जाता है। आदि गुरु शंकराचार्य ने इस मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था।

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता