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Dhanteras 2025: धनत्रयोदशी पर क्या करें और क्या खरीदें? कंफ्यूजन कर लें दूर; जानें धन्वंतरि की पूजा का सही समय

Dhanteras 2025: धनतेरस 2025 कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाएगा। यह दिन धन की देवी लक्ष्मी और आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि के उत्सव के रूप में प्रसिद्ध है।

Dhanteras 2025
धनतेरस 2025
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PRIYA DWIVEDI
4 मिनट

Dhanteras 2025: धनतेरस 2025 कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाएगा। यह दिन धन की देवी लक्ष्मी और आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि के उत्सव के रूप में प्रसिद्ध है। इस दिन को धन त्रयोदशी और धन्वंतरि त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। धनतेरस पर गणेश जी, मां लक्ष्मी, ब्रह्मा, विष्णु और महेश की पूजा की जाती है।


पौराणिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय कलश के साथ माता लक्ष्मी का अवतरण हुआ। इसी के प्रतीक के रूप में धन और ऐश्वर्य की वृद्धि के लिए धनतेरस पर बर्तन, सोना, चांदी और अन्य कीमती वस्तुएं खरीदने की परंपरा शुरू हुई। ऐसा माना जाता है कि इस दिन नया सामान खरीदने से धन में 13 गुना वृद्धि होती है।


धनतेरस का महत्व और तिथियां

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 18 अक्टूबर 2025, दोपहर 12:18 बजे

त्रयोदशी तिथि समाप्त: 19 अक्टूबर 2025, दोपहर 1:51 बजे


धनतेरस की शाम को यमदीप जलाने की परंपरा है। ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा के अनुसार, यमदीप जलाने से घर-परिवार में रोग, शोक, भय, दुर्घटना और अकाल मृत्यु से रक्षा होती है। यमदीप घर के मुख्य द्वार के बाहर जलाया जाता है और इसे 'दीपज्योति नमोस्तुते' मंत्र का जाप करते हुए प्रज्वलित किया जाता है।


धनतेरस पर मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर को सजाया जाता है। मुख्य द्वार पर रंगोली बनाई जाती है और महालक्ष्मी के दो छोटे पद चिन्ह लगाए जाते हैं। पूजा सामग्री में विशेष रूप से पान, सुपारी, साबुत धनिया, बताशा, खील, दीपक और कपूर शामिल होते हैं।

पान: पूजा में पान का इस्तेमाल शुभ माना जाता है, क्योंकि इसे देवी-देवताओं का निवास माना जाता है।

सुपारी: ब्रह्मदेव, यमदेव, वरुण देव और इंद्रदेव का प्रतीक मानी जाती है।

साबुत धनिया: इसे पूजा में अर्पित करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं।

बताशा और खील: माता लक्ष्मी का प्रिय भोग; इनके प्रयोग से धन-समृद्धि बनी रहती है।

दीया और कपूर: दीपक प्रज्वलित करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और यमदेव प्रसन्न होते हैं।


धनतेरस पर विशेष रूप से सोना, चांदी, तांबा, कुबेर यंत्र, झाड़ू, शंख, रूद्राक्ष और भगवान गणेश व लक्ष्मी की मूर्ति खरीदना शुभ माना जाता है।

सोना और चांदी: भाग्य और धन वृद्धि के लिए।

कुबेर यंत्र: घर या दुकान में स्थापित कर 108 बार मंत्र जप करना चाहिए।

तांबा और कांसा के बर्तन: स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा के लिए।

झाड़ू: गरीबी दूर करने और नकारात्मक ऊर्जा हटाने के लिए।

शंख और रूद्राक्ष: घर में सुख-समृद्धि बनाए रखते हैं।

भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की मूर्ति: घर में धन और बुद्धि बढ़ाती है।

नमक और धनिया: घर में धन वृद्धि और दरिद्रता नष्ट करने के लिए।


धनतेरस पर करने योग्य अन्य कार्य

घर, दुकान और सार्वजनिक स्थानों जैसे मंदिर, गौशाला, कुओं और तालाबों में दीपक जलाएं।

नवीन झाड़ू और सूपड़ा खरीदकर पूजा में शामिल करें।

हल मिट्टी को दूध में भिगोकर सेमर की शाखा डालकर शरीर पर फेरें।

कार्तिक स्नान करके प्रदोष काल में तीन दिन तक दीपक जलाएं।


धनतेरस की पूजा के पीछे कई पौराणिक कथाएँ जुड़ी हुई हैं। एक कथा के अनुसार, लक्ष्मी जी एक गरीब किसान के घर 12 वर्ष रहने के बाद धनतेरस के दिन अपने घर लौटने से पहले उसे निर्देश देती हैं कि दीपक जलाकर, कलश में रुपये रखकर पूजा करें। इसी परंपरा से धनतेरस पर दीपावली पूजा शुरू हुई। एक अन्य कथा के अनुसार, राजा हेम के पुत्र की अकाल मृत्यु को रोकने के लिए यमराज की पूजा और यमदीप जलाने की परंपरा शुरू हुई। इस दिन दीपक जलाने से जीवन से अकाल मृत्यु का योग टल जाता है।


धनतेरस न केवल धन और ऐश्वर्य का प्रतीक है बल्कि यह सकारात्मक ऊर्जा, स्वास्थ्य और परिवारिक सुरक्षा का भी पर्व है। इस दिन पूजा और खरीदारी की परंपरा निभाकर व्यक्ति अपने जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और आयुर्वृद्धि सुनिश्चित कर सकता है।