Lalu RJD wins in Kerala Assembly Election: बिहार की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान रखने वाली राष्ट्रीय जनता दल ने एक बार फिर दक्षिण भारत में अपनी मौजूदगी का दम दिखाया है। केरल विधानसभा चुनाव में पार्टी ने कुथुपरम्बा सीट पर जीत दर्ज कर यह साबित कर दिया कि उसकी पकड़ सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के दूसरे हिस्सों में भी उसका आधार मौजूद है।
इस सीट पर आरजेडी के उम्मीदवार पीके प्रवीण ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 70,448 वोट हासिल किए। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जयंती राजन को 1,286 मतों के अंतर से हराया। जयंती राजन इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की उम्मीदवार थीं और मुकाबला काफी कांटे का माना जा रहा था।
यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि इससे पहले 2021 के विधानसभा चुनाव में भी इसी सीट पर आरजेडी ने जीत दर्ज की थी। उस समय पार्टी के उम्मीदवार केपी मोहन ने जीत हासिल की थी। लगातार दूसरी बार इस सीट पर जीत से यह साफ हो गया है कि कुथुपरम्बा क्षेत्र में आरजेडी ने मजबूत जनाधार बना लिया है।
अगर व्यापक राजनीति की बात करें, तो यह जीत लालू प्रसाद यादव और उनके राजनीतिक वारिस तेजस्वी यादव के लिए भी अहम मानी जा रही है। बिहार में जहां पार्टी लगातार चुनौतियों का सामना कर रही है, वहीं केरल में यह जीत पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए नई ऊर्जा लेकर आई है।
कौन हैं पीके प्रवीण?
पीके प्रवीण केरल में आरजेडी का एक जाना-पहचाना चेहरा हैं। वे लंबे समय से स्थानीय राजनीति में सक्रिय हैं और जमीनी स्तर पर काम करने के लिए पहचाने जाते हैं। उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में है, जो आम लोगों के मुद्दों को मजबूती से उठाते हैं। यही वजह रही कि उन्हें इस चुनाव में जनता का भरोसा मिला।
प्रवीण ने अपने चुनाव प्रचार में स्थानीय समस्याओं, विकास और जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उनका सीधा संपर्क और सरल छवि मतदाताओं को काफी प्रभावित करने में सफल रही।
दक्षिण में आरजेडी की बढ़ती मौजूदगी
केरल में यह जीत केवल एक सीट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आरजेडी के लिए एक रणनीतिक सफलता भी है। दक्षिण भारत में अपनी पकड़ मजबूत करना किसी भी उत्तर भारतीय पार्टी के लिए आसान नहीं होता, लेकिन आरजेडी ने यहां लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर एक नया संकेत दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर पार्टी इसी तरह स्थानीय मुद्दों पर फोकस करती रही, तो आने वाले समय में केरल जैसे राज्यों में उसका दायरा और बढ़ सकता है।
पार्टी में जश्न का माहौल
इस जीत के बाद आरजेडी खेमे में खुशी की लहर है। कार्यकर्ता इसे बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। भले ही बिहार की राजनीति में पार्टी को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा हो, लेकिन केरल से आई यह जीत उसके लिए मनोबल बढ़ाने वाली साबित हुई है।




