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सिनेमा से राजनीति तक: क्यों उभर रहे हैं थलपति विजय, और क्यों पिछड़ गए रजनीकांत–कमल हासन?

तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता थलपति विजय का नाम तेजी से उभर रहा है। फिल्मों से लेकर राजनीति तक उनका सफर अब चर्चा का केंद्र बन गया है और 2026 चुनाव को लेकर उनकी भूमिका अहम मानी जा रही...

सिनेमा से राजनीति तक: क्यों उभर रहे हैं थलपति विजय, और क्यों पिछड़ गए रजनीकांत–कमल हासन?
Ramakant kumar
5 मिनट

तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों एक नया नाम तेजी से उभर रहा है, थलपति विजय। फिल्मी दुनिया में सुपरस्टार का दर्जा हासिल करने के बाद अब विजय राजनीति के मैदान में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। खास बात यह है कि उनकी राजनीतिक एंट्री को सिर्फ एक प्रयोग नहीं, बल्कि एक गंभीर और मजबूत प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विजय लगातार जीत की ओर बढ़ रहे हैं और 2026 तक उनकी स्थिति काफी हद तक साफ हो सकती है।


बदलती राजनीति में नया विकल्प

तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से DMK और AIADMK के बीच सिमटी रही है। इन दोनों दलों ने दशकों तक राज्य की सत्ता पर कब्जा बनाए रखा है। पहले एमजी रामचंद्रन और जे जयललिता जैसे फिल्मी सितारे राजनीति में सफल रहे, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जनता के सामने कोई नया और मजबूत विकल्प नहीं था।


यही वजह है कि अब राज्य के युवा और मध्यम वर्ग के लोग एक नए नेतृत्व की तलाश में हैं। विजय इस खाली जगह को भरते नजर आ रहे हैं।


विजय की रणनीति: सिर्फ स्टार नहीं, मजबूत नेता

थलपति विजय ने राजनीति में कदम रखते ही साफ कर दिया कि उनका फोकस सिर्फ लोकप्रियता नहीं, बल्कि मुद्दों पर आधारित राजनीति है। उन्होंने जाति और धर्म से हटकर विकास, रोजगार और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी है।


उनकी यही रणनीति उन्हें बाकी फिल्मी सितारों से अलग बनाती है। विजय लगातार लोगों के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं और जमीनी स्तर पर संगठन खड़ा करने में जुटे हैं। यही कारण है कि राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि वह धीरे-धीरे जीत की ओर बढ़ रहे हैं।


फिल्मों से बनी ‘जन नेता’ की छवि

विजय की फिल्मों ने भी उनकी राजनीतिक छवि को मजबूत किया है। थुपक्की, कत्थी और मर्सल जैसी फिल्मों में उन्होंने आम जनता के मुद्दों को उठाया और सिस्टम के खिलाफ आवाज बुलंद की। इन फिल्मों के जरिए उन्होंने खुद को एक ऐसे चेहरे के रूप में स्थापित किया, जो अन्याय के खिलाफ खड़ा होता है।


अब उनकी आखिरी फिल्म जन नायगन को भी उनके राजनीतिक अभियान का अहम हिस्सा माना जा रहा है। यह फिल्म चुनाव से पहले उनके विचारों को जनता तक पहुंचाने का एक बड़ा माध्यम बन सकती है।


क्यों पीछे रह गए रजनीकांत और कमल हासन

तमिल सिनेमा के दो बड़े नाम रजनीकांत और कमल हासन भी राजनीति में उतरे, लेकिन उन्हें वह सफलता नहीं मिल सकी जिसकी उम्मीद थी। रजनीकांत की राजनीति आम जनता से पूरी तरह जुड़ नहीं पाई, जबकि कमल हासन के पास विचार तो थे, लेकिन जमीनी संगठन की कमी साफ नजर आई। दोनों ही नेताओं का फोकस लंबे समय तक स्थिर नहीं रह सका, जिसका असर उनके राजनीतिक करियर पर पड़ा।


इसके उलट विजय ने पहले से ही अपनी राजनीतिक जमीन तैयार की और धीरे-धीरे मजबूत होते गए।


2026 चुनाव: जीत की ओर बढ़ते कदम

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर माहौल धीरे-धीरे बन रहा है और इस बार थलपति विजय एक बड़े दावेदार के रूप में उभरते दिख रहे हैं। जानकारों का मानना है कि वह लगातार जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं और अगर यही रफ्तार बनी रही, तो चुनाव तक उनकी स्थिति काफी मजबूत हो सकती है।


कई विश्लेषकों का यह भी मानना है कि विजय इस बार भले ही पूरी तरह सत्ता तक न पहुंचें, लेकिन उनकी बढ़त साफ संकेत दे रही है कि वह आने वाले समय में तमिलनाडु की राजनीति का बड़ा चेहरा बन सकते हैं। अगर उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक रहा, तो यह उनकी जीत की दिशा में निर्णायक कदम साबित होगा और आगे चलकर उनका राजनीतिक भविष्य लगभग तय हो जाएगा।


एक नई राजनीति की शुरुआत

तमिलनाडु में थलपति विजय का उभार सिर्फ एक अभिनेता के राजनीति में आने की कहानी नहीं है, बल्कि यह बदलाव की उस लहर का संकेत है, जिसे राज्य की जनता महसूस कर रही है। विजय ने यह साबित कर दिया है कि राजनीति में सिर्फ नाम और शोहरत नहीं, बल्कि स्पष्ट सोच, जमीनी जुड़ाव और जनता के मुद्दों की समझ जरूरी होती है।

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