Vijay Kumar Chaudhary: बिहार की सियासत में जब भी धैर्य, सौम्यता और सधे हुए राजनीतिक अनुभव की बात होती है, तो विजय कुमार चौधरी का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। समस्तीपुर की धरती से आने वाले विजय चौधरी आज उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर अपने राजनीतिक जीवन के सबसे महत्वपूर्ण अध्याय की शुरुआत कर रहे हैं। पिछले 21 वर्षों से जदयू में नीतीश कुमार के भरोसेमंद सहयोगी के रूप में काम करते हुए उन्होंने बैंक की नौकरी से लेकर डिप्टी सीएम तक का लंबा सफर तय किया है।
विजय कुमार चौधरी का जन्म 8 जनवरी 1957 को एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार में हुआ था। उनके पिता जगदीश प्रसाद चौधरी दलसिंहसराय से कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक रहे। राजनीति में आने से पहले वे एक मेधावी छात्र थे और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में प्रोबेशनरी ऑफिसर के रूप में दो साल तक कार्यरत रहे। लेकिन 1982 में पिता के अचानक निधन के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और राजनीति में कदम रखा। उसी वर्ष दलसिंहसराय उपचुनाव जीतकर उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की।
उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की और 1985 व 1990 में विधायक बने। उस दौर में वे तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र के करीबी माने जाते थे और विधानसभा में कांग्रेस के उपसचेतक भी रहे। हालांकि, 1995 और 2000 के चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2005 में उन्होंने जदयू का दामन थामा और नीतीश कुमार के साथ जुड़ गए। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे पार्टी के महासचिव और प्रदेश अध्यक्ष जैसे अहम पदों पर रहे और सरायरंजन से 2010 से लगातार चार बार विधायक चुने गए हैं।
नीतीश कुमार ने हमेशा विजय चौधरी के शांत स्वभाव और प्रशासनिक क्षमता पर भरोसा जताया है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष के साथ-साथ जल संसाधन, वित्त, शिक्षा, कृषि, परिवहन और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली है। वर्तमान में वे जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री के रूप में कार्यरत हैं।
अपने निर्वाचन क्षेत्र सरायरंजन में विजय चौधरी ‘विकास पुरुष’ और मिलनसार नेता के रूप में जाने जाते हैं। 2010 से लेकर 2025 तक वे लगातार चुनाव जीतते आए हैं। 2025 के चुनाव में उन्होंने 20,798 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज कर यह साबित किया कि जनता और नेतृत्व दोनों का भरोसा आज भी उन पर कायम है।
