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RJD एमएलसी सुनील सिंह के खिलाफ पटना में विवादित पोस्टर, किसने बताया 'बिहार का नटवरलाल'?

Bihar Politics: राजद नेता सुनील सिंह के बिहार विधान परिषद सदस्य बनने के बाद पटना में उनके खिलाफ विवादित पोस्टर लगाए गए हैं। पोस्टरों में उन पर और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिससे बिहार की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।

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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar Politics: बिहार विधान परिषद पहुंचने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता सुनील सिंह एक बार फिर राजनीतिक विवादों के केंद्र में आ गए हैं। पटना के कई इलाकों में उनके खिलाफ विवादित पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें उन्हें 'बिहार का नटवरलाल' बताया गया है और उनके एमएलसी बनने पर तंज कसा गया है।


इन पोस्टरों में केवल सुनील सिंह ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के अन्य सदस्यों का भी उल्लेख किया गया है। पोस्टरों के जरिए उन पर और उनके परिजनों पर कथित तौर पर धोखाधड़ी और गबन जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पोस्टर लगाने वालों की पहचान भी अब तक सामने नहीं आई है।


बिहार की राजनीति में पोस्टर वार कोई नई बात नहीं है, लेकिन सुनील सिंह के विधान परिषद सदस्य बनने के तुरंत बाद ऐसे पोस्टरों का सामने आना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। इसे हालिया विधान परिषद चुनाव के बाद शुरू हुई नई सियासी जंग के रूप में देखा जा रहा है।


बता दें कि सुनील सिंह को राजद का उम्मीदवार बनाए जाने के फैसले पर पहले भी पार्टी के भीतर असहजता के संकेत मिले थे। आरजेडी चीफ लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर अप्रत्यक्ष रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की थी। इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा कायम रखा और वे लगातार तीसरी बार विधान परिषद पहुंचने में सफल रहे।


विधान परिषद की नौ सीटों पर हुए चुनाव में मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी और सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। इनमें राजद के खाते में केवल एक सीट आई, जिस पर सुनील सिंह निर्वाचित हुए। हालांकि, जीत के कुछ ही दिनों बाद उनके खिलाफ लगे पोस्टरों ने नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है।


सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ये पोस्टर किसने लगाए। पोस्टरों पर किसी संगठन या व्यक्ति का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है, जिससे राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। फिलहाल यह मामला आरोप-प्रत्यारोप की नई सियासी लड़ाई के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में चुनावी माहौल बनने से पहले पोस्टर वार की राजनीति और तेज हो सकती है। वहीं, सुनील सिंह के समर्थक इसे उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे राजनीतिक जवाबदेही से जोड़कर देख रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बिहार की सियासत और गरमाने के संकेत मिल रहे हैं।

रिपोर्ट- रजनीश रमण, पटना

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