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RJD के साथ आना कांग्रेस की मजबूरी, लेकिन भक्त चरण दास अभी भी तेजस्वी से कन्नी काट रहे

PATNA : 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस और आरजेडी के रिश्तो में दरार आ गई थी. तेजस्वी यादव जब मुख्यमंत्री बनते बनते रह गए तो RJD ने ठीकरा कांग्रेस के ऊपर फोड़ दिया. आरजेडी के

RJD के साथ आना कांग्रेस की मजबूरी, लेकिन भक्त चरण दास अभी भी तेजस्वी से कन्नी काट रहे
First Bihar
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PATNA : 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस और आरजेडी के रिश्तो में दरार आ गई थी. तेजस्वी यादव जब मुख्यमंत्री बनते बनते रह गए तो RJD ने ठीकरा कांग्रेस के ऊपर फोड़ दिया. आरजेडी के कई नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की गलतियों की वजह से महागठबंधन को कम सीटों पर जीत हासिल हुई और इसीलिए सरकार नहीं बन पाई. बाद में कांग्रेस भी आक्रामक हो गई और नतीजा यह हुआ कि विधानसभा उपचुनाव में महागठबंधन बिखर गया. कांग्रेस ने उपचुनाव में अकेले उतरने का ऐलान कर दिया और ना तो आरजेडी को जीत हासिल हुई और ना ही कांग्रेस को. कुछ ऐसा ही हाल विधान परिषद के स्थानीय निकाय वाले चुनाव में भी हुआ. इस चुनाव में आरजेडी का प्रदर्शन ठीक-ठाक रहा लेकिन कांग्रेस कोई ज्यादा कमाल नहीं दिखा पाई. इसके बाद कांग्रेस को यह लगने लगा कि महागठबंधन में वापसी करना ही उसके लिए बेहतर होगा. नतीजा यह हुआ कि अब तेजस्वी यादव के नेतृत्व में 7 अगस्त को जो प्रतिरोध मार्च निकाला जाना है. कांग्रेस भी इसमें शामिल हो गई. आरजेडी और वाम दलों के साथ-साथ कांग्रेस के नेता भी इस प्रतिरोध मार्च में शामिल होंगे.


बिहार में आरजेडी और कांग्रेस का रिश्ता बेहद पुराना रहा है. कांग्रेस हमेशा से आरजेडी के कंधे पर सवार होकर राजनीति करती रही, लेकिन मौजूदा प्रभारी भक्त चरण दास ने अकेले अपने दम पर मैदान में उतरने का फैसला किया. इसके लिए भक्त चरण दास को लालू यादव का कोप भाजन भी बनना पड़ा. लालू यादव ने जिस तरह की टिप्पणी भक्तचरण के ऊपर की इसके बाद बिहार कांग्रेस प्रभारी भी आरजेडी के ऊपर हमलावर हुए थे. इस वजह से RJD और कांग्रेस के रिश्तो में ज्यादा दरार आई, लेकिन अब जबकि पार्टी ने एक बार फिर से आरजेडी और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में चलने का फैसला किया है तो भक्त चरण दास लालू परिवार से कन्नी काटते नजर आ रहे हैं.



7 अगस्त को प्रतिरोध मार्च का आयोजन है. इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस के नेता तेजस्वी के साथ मौजूद रहेंगे, लेकिन भक्त चरण दास इसमें शामिल नहीं होंगे. बिहार कांग्रेस प्रभारी भक्त चरण दास 8 अगस्त को पटना पहुंचेंगे. इसके बाद लगातार 15 अगस्त तक बिहार में रहेंगे. भक्त चरण दास प्रतिरोध मार्च से भले ही दूर हो लेकिन वह कई जिलों में पदयात्रा कार्यक्रम में शामिल होंगे. भक्त चरण दास बेगूसराय में आयोजित पर यात्रा कार्यक्रम में 9 अगस्त को शामिल होंगे. इसके बाद 10 अगस्त को वह भागलपुर में विधायक दल के नेता अजीत शर्मा के यहां श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होंगे और पदयात्रा में भी मौजूद रहेंगे.



बिहार कांग्रेस प्रभारी एक 11 अगस्त को गया में पदयात्रा कार्यक्रम में शामिल होंगे. 12 अगस्त को जहानाबाद में और 13 अगस्त को दरभंगा में आयोजित पर यात्रा कार्यक्रम में शामिल होंगे. 14 अगस्त को उन्हें मुजफ्फरपुर की पदयात्रा में शामिल होना है. 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भक्त चरणदास पटना में तिरंगा यात्रा में शामिल होंगे. 1 हफ्ते तक पटना में रहने के बावजूद बिहार कांग्रेस प्रभारी न तो तेजस्वी यादव से मुलाकात करेंगे और न ही आरजेडी के किसी दूसरे नेता से. इसका मतलब यह है कि भले ही कांग्रेस ने तेजस्वी के पीछे पीछे चलने का फैसला कर लिया हो, लेकिन उसके प्रभारी अभी भी लालू परिवार से दूरी बनाए हुए हैं.