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‘सरकार ने हड़बड़ी में जारी किया रिपोर्ट.. इसमें कई खामियां’ जातीय गणना के आंकड़ों को कुशवाहा ने बताया फर्जी

PATNA: बिहार में जातीय गणना के आंकड़े सार्वजनिक होने के साथ ही इसको लेकर सियासत भी शुरू हो गई है। एक तरफ जहां सरकार आंकड़ों को जारी करने के बाद अपनी पीठ थपथपा रही है तो वहीं दूसरी

‘सरकार ने हड़बड़ी में जारी किया रिपोर्ट.. इसमें कई खामियां’ जातीय गणना के आंकड़ों को कुशवाहा ने बताया फर्जी
Mukesh Srivastava
4 मिनट

PATNA: बिहार में जातीय गणना के आंकड़े सार्वजनिक होने के साथ ही इसको लेकर सियासत भी शुरू हो गई है। एक तरफ जहां सरकार आंकड़ों को जारी करने के बाद अपनी पीठ थपथपा रही है तो वहीं दूसरी तरफ इसको लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। राष्ट्रीय लोक जनता दल के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने जातीय गणना के आंकड़ों को फर्जी बताया है और कहा है कि सरकार द्वारा जारी किए गए रिपोर्ट में कई खामियां है और ऐसा लगता है कि सरकार ने हड़बड़ी में जातीय गणना के आंकड़े जारी कर दिए हैं।


उपेंद्र कुशवाहा ने कहा है कि खुद उनसे जातीय गणना के दौरान किसी ने उनसे उनकी जाति के बारे में नहीं पूछा है। यह एक व्यक्तिगत मसला हो सकता है लेकिन बहुत से ऐसे लोग हैं जो इस तरह की बात कह रहे हैं। जातीय गणना को लेकर उठ रहे सवालों को दूर करना सरकार की जवाबदेही है। जातीय गणना का मामला कोर्ट में चल रहा था इस बीच सरकार ने कोर्ट में कह दिया कि जातीय गणना का काम पूरा हो चुका है। अचानक से कोर्ट में मामला चला तो उसपर सरकार ने जल्दीबाजी में आकर जैसे तैसे आंकड़ा जारी कर दिया, ऐसी आशंका जताई जा रही है।


हड़बड़ी में आंकड़े जारी किए गए हैं तो यह भी स्वभाविक है कि बहुत से लोगों का नाम छूट गया होगा और कुछ लोगों का नाम जान बूझकर भी छोड़ दिया गया होगा। उपेंद्र कुशवाहा ने सरकार से मांग की है कि मतदाता सूची बनाने में जिस प्रक्रिया को अपनाया जाता है उसी प्रक्रिया को जातीय गणमा में भी अपनाया जाए। पंचायत स्तर पर आंकड़ों की जांच की जाए, ताकि हर व्यक्ति यह देख सके की उसके आंकड़े जोड़े गए हैं या नहीं। जातीय गणना की रिपोर्ट में संशोधन कर उसे फिर से जारी किया जाए। अगर ऐसा नहीं होता है तो लोगों के मन में जो आशंका है वह हमेशा बनी रहेगी।


उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने कोर्ट में यह दलील दी थी कि उसे जातीय गणना के आंकड़ों की जरूरत इसलिए है कि विकास में जो लोग पीछे रह गए हैं उनके लिए योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी। अब जब आंकड़े सामने आ गए हैं तो सरकार अतिपिछड़ा समाज के लोगों के लिए ठोस योजना बनाए। सरकार गांधी जयंती के मौके पर जातीय गणना के आंकड़े प्रकाशित कर अपना पीठ थपथपा रही है लेकिन बिहार में जब जातीय गणना कराने का फैसला हुआ था उस वक्त सभी दलों के लोगों ने इसका समर्थन किया था।


कुशवाहा ने कहा कि यह केवल ख़ानापूर्ति जैसी बात है। इसका कोई चुनावी फ़ायदा नहीं होने वाला है। गांधी जयंती पर नीतीश कुमार उनको याद करते है लेकिन उन्हें बापू के बताये रास्ते पर चलने की ज़रूरत है। आज नीतीश कुमार जिस साधन के साथ हैं वह बेल पर है। वे जेल से आये लोग हैं, यह ठीक नहीं है। इनका साधन ठीक नहीं है तो साध्य ठीक नहीं होगा। वहीं उपेन्द्र कुशवाहा ने यह भी कहा कि आर्थिक रिपोर्ट नहीं जारी करने पर बी सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक लाभ के लिए सामाजिक आकड़ा जारी किया गया है लेकिन आर्थिक रिपोर्ट नहीं आना एक राजनीति है, इनकी नियत में खोट है।