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कांग्रेस के नेताओं को कुशवाहा की राह पसंद, सम्मानजनक सीटें नहीं मिले तो अकेले चलना ठीक

PATNA : बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा के बावजूद अब तक के महागठबंधन और एनडीए में सीट बंटवारे पर मुहर नहीं लग पाई है. महागठबंधन में जारी कलह के बीच कुशवाहा ने अलग राह तय करने का

कांग्रेस के नेताओं को कुशवाहा की राह पसंद, सम्मानजनक सीटें नहीं मिले तो अकेले चलना ठीक
Manish Kumar
3 मिनट

PATNA : बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा के बावजूद अब तक के महागठबंधन और एनडीए में सीट बंटवारे पर मुहर नहीं लग पाई है. महागठबंधन में जारी कलह के बीच कुशवाहा ने अलग राह तय करने का ऐलान कर दिया है और कुशवाहा का यह कदम बिहार कांग्रेस के नेताओं को भी रास आ रहा है. दरअसल बिहार कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक के पटना में चल रही है शनिवार को शुरू हुई यह बैठक आज भी जारी रहेगी.

 बैठक में कई जिला अध्यक्षों और विधायकों ने जो राय जाहिर की है उसे देखकर यह लगता है कि कुशवाहा का कदम इन नेताओं को रास आ रहा है. पार्टी के कई जिला अध्यक्षों और विधायकों ने बैठक के दौरान अपनी राय जताते हुए कहा है कि अगर महागठबंधन में सीट बंटवारा सम्मानजनक तरीके से नहीं होता है तो कांग्रेस को विधानसभा चुनाव अकेले लड़ना चाहिए. कांग्रेस के छपरा, मोतिहारी, सीतामढ़ी के जिला अध्यक्षों ने अकेले चुनाव लड़ने की मांग का समर्थन किया है.

 इन जिला अध्यक्षों का कहना है कि अगर सम्मानजनक सीटें नहीं मिलती है तो पार्टी आलाकमान को यह फैसला करना चाहिए कि कांग्रेस बिहार में अकेले चुनाव लड़े. विधायकों का कहना है कि अगर कांग्रेस अकेले भी चुनाव लड़ती है तो हम बेहतर परिणाम दे सकते हैं. उधर पार्टी के कई विधायकों ने भी आरजेडी से बराबर की हिस्सेदारी मांगी है. कांग्रेस के विधायक अजीत शर्मा ने कहा है कि आरजेडी के लिए 100 और कांग्रेस के लिए 42 सीटें पहले से तय है और बाकी बची सीटों पर अगर कोई बड़ा दल नहीं है तो बराबर की हिस्सेदारी होनी चाहिए. वहीं कांग्रेस विधायक पूनम पासवान ने भी कहा है कि हमें लोकसभा चुनाव जैसा समझौता नहीं करना चाहिए. विधानसभा चुनाव में बराबर की हिस्सेदारी जरूरी है. कांग्रेस नेताओं का यह मिजाज बता रहा है कि कुशवाहा की राह उन्हें पसंद है और आरजेडी ने जिस तरह सहयोगी दलों को कमतर आंकने का प्रयास किया है तो कांग्रेस उसका दबाव झेलने को बिल्कुल तैयार नहीं है. 

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