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PFI बैन पर JDU ने उठाए सवाल, बोले ललन सिंह..केंद्र सरकार बताएं कि बैन लगाने का आधार क्या है?

PATNA: पीएफआई पर 5 सालों के लिए प्रतिबंध भारत में लगाया गया है। पीएफआई पर रोक लगने के बाद बिहार में सियासत तेज हो गयी है। केंद्र सरकार के इस फैसले का जहां बीजेपी स्वागत कर रही

PFI बैन पर JDU ने उठाए सवाल, बोले ललन सिंह..केंद्र सरकार बताएं कि बैन लगाने का आधार क्या है?
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

PATNA: पीएफआई पर 5 सालों के लिए प्रतिबंध भारत में लगाया गया है। पीएफआई पर रोक लगने के बाद बिहार में सियासत तेज हो गयी है। केंद्र सरकार के इस फैसले का जहां बीजेपी स्वागत कर रही है वहीं सत्ताधारी दल इस पर सवाल उठा रहा है। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने इसे लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाया। 


जेडीयू नेता ललन सिंह ने पूछा कि पहले भारत सरकार यह बताए कि पीएफआई पर बैन लगाने का आधार क्या है। कौन सा ऐसा सबूत मिल गया है जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गयी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के जवाब के बाद ही वे किसी तरह की प्रतिक्रिया देंगे।


बता दें कि कई राज्यों ने पहले ही ये मांग की थी कि PFI को बैन कर दिया जाए। पिछले दिनों पीएफआई के ठिकानों पर दो बार जांच एजेंसियों की रेड चली थी। गृह मंत्रालय ने PFI को 5 साल के लिए बैन कर दिया है। इसके अलावा 8 और ऐसे सहयोगी संगठन हैं, जिस पर कार्रवाई हुई है। 


केंद्र सरकार ने रिहैब इंडिया फाउंडेशन (RIF), कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI), ऑल इंडिया इमाम काउंसिल (AIIC), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (NCHRO), नेशनल वीमेन फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन, केरल जैसे सहयोगी संगठनों पर भी बैन लगा दिया है। आपको बता दें,  पुलिस ने PFI पर 22 सितंबर और 27 सितंबर को भी छापा मारा था। 


छापेमारी के दौरान पहली बार 106 PFI से जुड़े लोग जबकि दूसरे राउंड में लोगों की गिरफ्तारी की गई थी। जांच एजेंसियों ने PFI के खिलाफ पर्याप्त सबूत इकठ्ठा कर लिए थे, जिसके बाद जांच एजेंसियों ने गृह मंत्रालय से कार्रवाई की मांग की थी। अब केंद्र सरकार ने इस पर बड़ा एक्शन लिया है और PFI को बैन कर दिया है। 


राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने भी इसे लेकर बीजेपी पर हमला बोला है। लालू ने ट्वीट करते हुए लिखा कि "PFI की तरह जितने भी नफ़रत और द्वेष फैलाने वाले संगठन हैं सभी पर प्रतिबंध लगाना चाहिए जिसमें RSS भी शामिल है। सबसे पहले RSS को बैन करिए, ये उससे भी बदतर संगठन है। आरएसएस पर दो बार पहले भी बैन लग चुका है। सनद रहे, सबसे पहले RSS पर प्रतिबंध लौह पुरुष सरदार पटेल ने लगाया था।"