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लालू चाहेंगे तभी जिंदा रहेगी शरद और शत्रु की सियासत, राज्यसभा जाने के लिए दरबार में लगा चुके हैं हाजिरी

PATNA : जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव और बीजेपी के पूर्व सांसद शत्रुघ्न सिन्हा की राजनीति जिंदा रहेगी या फिर दम तोड़ देगी इसका फैसला केवल आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव ही कर सक

FirstBihar
Anurag Goel
4 मिनट

PATNA : जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव और बीजेपी के पूर्व सांसद शत्रुघ्न सिन्हा की राजनीति जिंदा रहेगी या फिर दम तोड़ देगी इसका फैसला केवल आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव ही कर सकते हैं। लोकसभा चुनाव में हार का मुंह देखने के बाद शरद यादव और शत्रुघ्न सिन्हा संसद नहीं पहुंच सके थे और अब इन दोनों नेताओं की नजर राज्यसभा पर है। शरद और शत्रुघ्न लालू दरबार में बारी-बारी से हाजिरी लगाकर अपने दिल की बात कह भी चुके हैं।


बिहार में राज्यसभा की जिन सीटों पर चुनाव हो रहे हैं उनमें से दो पर आरजेडी के ही उम्मीदवारों को संसद जाना है। कांग्रेस ने एक राज्यसभा सीट पर अपना दावा ठोका है। कांग्रेस के बिहार प्रभारी की शक्ति सिंह गोहिल आरजेडी को गठबंधन धर्म की याद दिलाते हुए एक सीट पर कांग्रेस के किसी उम्मीदवार को राज्यसभा भेजे जाने की मांग कर चुके हैं। हालांकि आरजेडी ने अब तक इस मामले पर अपना पत्ता नहीं खोला है। 13 मार्च तक नामांकन की तारीख है और उससे पहले आरजेडी के उम्मीदवारों पर अंतिम फैसला रिम्स में इलाज करा रहे हैं लालू यादव ही लेंगे। सियासी जानकार मानते हैं कि अगर लालू ने कांग्रेस पर रहमदिली दिखाई तो शत्रुघ्न सिन्हा की किस्मत खुल सकती है। लालू अगर कांग्रेस के एक उम्मीदवार को राज्यसभा भेजे जाने पर अपनी सहमति देते हैं तो शत्रुघ्न सिन्हा इस दावेदारी में सबसे आगे होंगे। खुद लालू भी शॉटगन के लिए कांग्रेस नेतृत्व को अपनी सहमति दे सकते हैं।


लोकसभा चुनाव हारने के बाद शरद यादव की सियासत भी दम तोड़ रही है हालांकि पिछले महीने बिहार की राजनीति में शरद थोड़ा सक्रिय जरूर हुए थे लेकिन उस वक्त भी जमाना गया था किस तरह राज्यसभा चुनाव को लेकर अपनी दावेदारी सुनिश्चित करने के लिए सक्रियता बढ़ा रहे हैं। शरद यादव ने उपेंद्र कुशवाहा, जीतन राम मांझी और मुकेश सैनी ने पटना में बैठक की थी। इसके बाद शरद रांची पहुंचे थे जहां उन्होंने लालू यादव से मुलाकात की थी। बिहार के सियासी गलियारे में यह चर्चा हुई कि शरद यादव को बिहार में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जा सकता है तो इसे जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष ने खुद खारिज किया था। शरद यादव ने कहा था कि वह दिल्ली की राजनीति करते आए हैं और आगे भी वही करेंगे। ऐसे में क्या शरद यादव दिल्ली की राजनीति में बनाए रखने का फैसला लालू यादव लेंगे यह बड़ा सवाल है। शरद यादव भले ही आरजेडी में शामिल नहीं हुए हो लेकिन उन्होंने लोकसभा का चुनाव आरजेडी के सिंबल पर लड़ा था। शरद यादव की पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल का विलय आरजेडी में किए जाने की बात सामने आई थी। दावा किया गया था कि लोकसभा चुनाव के बाद एलजेडी का आरजेडी में विलय हो जाएगा लेकिन शरद की पार्टी का विलय भी खटाई में पड़ गया। अब शरद यादव की पूरी सियासत लालू के रहमों करम पर है

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