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बड़ी खबर: अब बिहार सरकार खुद करेगी कुलपतियों की नियुक्ति, इतिहास में पहली दफे सरकार का फैसला, राज्यपाल से आर-पार की तैयारी

PATNA: केंद्र सरकार से सियासी लड़ाई लड़ रहे नीतीश कुमार ने क्या अब राजभवन से आर-पार करने की तैयारी कर ली है. संकेत तो ऐसे ही मिल रहे हैं. बिहार के इतिहास में पहली दफे बिहार सर

बड़ी खबर: अब बिहार सरकार खुद करेगी कुलपतियों की नियुक्ति, इतिहास में पहली दफे सरकार का फैसला, राज्यपाल से आर-पार की तैयारी
Jitendra Vidyarthi
5 मिनट

PATNA: केंद्र सरकार से सियासी लड़ाई लड़ रहे नीतीश कुमार ने क्या अब राजभवन से आर-पार करने की तैयारी कर ली है. संकेत तो ऐसे ही मिल रहे हैं. बिहार के इतिहास में पहली दफे बिहार सरकार ने विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति के लिए खुद आवेदन मांग लिया है. बड़ी बात ये है कि राजभवन ने पहले ही कुलपतियों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाल रखा है. लेकिन बिहार सरकार ने राज्यपाल को किनारे लगा कर खुद नियुक्ति का विज्ञापन निकाल दिया है. बता दें कि राज्यपाल ही बिहार के विश्वविद्यालयों के चांसलर यानि कुलाधिपति होते हैं. कुलपतियों की नियुक्ति राज्यपाल ही करते हैं. 


बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने सूबे के सात विश्वविद्यालयों पटना यूनिवर्सिटी, जयप्रकाश यूनिवर्सिटी छपरा, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर, एलएन मिथिला यूनिवर्सिटी, दरभंगा, संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा, बीएनमंडल यूनिवर्सिटी, मधेपुरा और आर्यभट्ट यूनिवर्सिटी पटना के कुलपति पद पर नियुक्ति लिए आवेदन मांगे हैं. शिक्षा विभाग ने कुलपति पद के लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख 13 सितंबर तय की है. आवेदकों से ऑफ लाइन और ऑन लाइन दोनों तरह से आवेदन मांगे गये हैं.


इतिहास में पहला वाकया

बिहार के इतिहास में ये पहला वाकया है जब राजभवन को नकार कर बिहार सरकार ने कुलपतियों की नियुक्ति के लिए खुद आवेदन मांगा है. शिक्षा विभाग ने इन विश्वविद्यालयों के कुलपति पद के लिए विज्ञापन जारी कर कर कहा है कि आवेदक शिक्षा विभाग के वेबसाइट पर ऑन लाइन या सचिवालय के विकास भवन स्थित शिक्षा सचिव के कार्यालय में ऑफ लाइन आवेदन कर सकते हैं. शिक्षा विभाग ने कहा है कि कुलपतियों की नियक्ति सर्च कमेटी के जरिये की जायेगी. आवेदकों के लिए जरूरी अहर्ता भी तय की गयी है. उनकी नियुक्ति तीन साल के लिए की जायेगी. आवेदक की उम्र  67 साल से ज्यादा नहीं होना चाहिए. आवेदक को कम से कम दस साल प्रोफेसर पद पर अध्यापन का अनुभव जरूरी होना चाहिए. इसके अलावा रिसर्च के क्षेत्र में योगदान सहित अन्य अहर्ताएं मांगी गयी हैं.


राजभवन ने पहले ही निकाला है विज्ञापन 

सबसे बड़ी बात ये है कि राजभवन ने कुलपतियों की नियुक्ति के लिए पहले ही विज्ञापन जारी रखा है. राजभवन ने दो से चार अगस्त तक अखबारों में पटना विवि, केएसडी संस्कृत विवि दरभंगा, जय प्रकाश विवि छपरा, बीआरए बिहार विवि मुजफ्फरपुर, एलएन मिथिला विवि दरभंगा, बीएनमंडल विवि मधेपुरा और आर्यभट्ट विवि के कुलपति पद के लिए विज्ञापन जारी किया था. इन पदों के लिए आवेदन भरे जाने की अंतिम तिथि 24 से 27 अगस्त तक निर्धारित की गयी है.



राज्यपाल को सबक सिखाना चाहते हैं नीतीश! 

बता दें कि विश्वविद्यालयों को लेकर राजभवन औऱ बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के बीच पहले ही टकराव चल रहा है. बिहार के शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव केके पाठक ने यूनिवर्सिटी के कुलपति और प्रति कुलपति का वेतन रोकने का आदेश दिया था. इसके बाद राजभवन ने सरकार को कड़ा पत्र लिखा था. राजभवन ने साफ कहा था कि यूनिवर्सिटी के संबंध में कोई भी फैसला लेने का अधिकार सिर्फ कुलाधिपति यानि राज्यपाल को है. लिहाजा शिक्षा विभाग कोई हस्तक्षेप नहीं करे. लेकिन शिक्षा विभाग ने राजभवन को जवाबी पत्र लिख कर राज्यपाल का आदेश मानने से इंकार कर दिया है. 


राजभवन से टकराव के बीच अब बिहार सरकार ने ऐसा कदम उठाया है जैसा पहले कभी नहीं हुआ था. हालांकि बिहार में कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही फैसला सुना चुका है. उस फैसले के मुताबिक कुलपतियों की नियुक्ति राज्यपाल ही करेंगे. लेकिन उन्हें उससे पहले कुलपतियों की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी का गठन करना होगा. सर्च कमेटी की सिफारिश के बाद सरकार के साथ विचार विमर्श कर राज्यपाल को कुलपति की नियुक्ति करनी है. लेकिन अब शिक्षा विभाग ने खुद ही कुलपति की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाल दिया है. 


रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR EXCLUSIVE

FirstBihar संवाददाता

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