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पहली बार इन सीटों पर चुनाव लड़ेगी RJD, जानिए पिछले चुनाव में क्या था UPA और NDA में शामिल पार्टियों के वोट परसेंटेज

बिहार में लोकसभा चुनाव को लेकर तारीखों के ऐलान के बाद अब सीटों का बंटवारा भी हो गया है। एनडीए के बाद कल दोपहर महागठबंधन में भी सीटों का बंटवारा हो गया इस बार राजद कोटा में 26 सीट, कांग्रेस में 9 और

पहली बार इन सीटों पर चुनाव लड़ेगी RJD, जानिए पिछले चुनाव में क्या था UPA और NDA में शामिल पार्टियों के वोट परसेंटेज
Tejpratap
Tejpratap
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बिहार में लोकसभा चुनाव को लेकर तारीखों के ऐलान के बाद अब सीटों का बंटवारा भी हो गया है। एनडीए के बाद कल दोपहर महागठबंधन में भी सीटों का बंटवारा हो गया इस बार राजद कोटा में 26 सीट, कांग्रेस में 9 और वाम दल में 5 सीटों को तीन पार्टियों में बांटा गया है। इसके  अब जो बात निकल कर सामने आए हैं वह यह है कि सीट बंटवारे के इस फार्मूले के तहत लोकसभा चुनाव में राजद पहली बार औरंगाबाद, सुपौल और पूर्णिया से चुनावी मैदान में होगा।


दरअसल, राजद  पहली बार औरंगाबाद, सुपौल और पूर्णिया संसदीय क्षेत्र में लोकसभा चुनाव लड़ रहा है। जिसमें औरंगाबाद सीट पर महागठबंधन में अब तक कांग्रेस के ही कैंडिडेट मैदान में  उतारे जाते रहे है। वहीं, सुपौल लोकसभा सीट के गठन के बाद पहली बार राजद के सिंबल पर कोई कैंडिडेट मैदान में होगा और यही हाल पूर्णिया का भी है, यहां भी राजद पहली दफे लोकसभा के चुनावी मैदान में हैं। ऐसे में इन सीटों पर बहुमत हासिल करना तेजस्वी के लिए बड़ी चुनौती है।


मालूम हो कि, वर्ष 2019 में पिछले लोकसभा चुनाव में एनडीए बना महागठबंधन के बीच हुए मुकाबले में एनडीए गठबंधन 53.25% वोट पाकर 40 में से 39 सीट पर कब्जा जमाने में कामयाब हुआ था। जबकि यूपीए को 30.61% बहुत हासिल हुआ था और सिर्फ कांग्रेस नहीं एक सीट पर बहुमत हासिल की। इस चुनाव में भी कांग्रेस चुनाव सीटों पर चुनाव लड़ी थी और उसे कल 7.70% और हासिल हुआ था। वही राजद 19 सीटों पर चुनाव लड़ा था सभी सीटों पर हार मिला था। हालांकि, राजद को कुल 15.36% वोट हासिल हुआ था। जबकि यूपीए के घटक दलों में शामिल उपेंद्र कुशवाहा को 5 सीटों पर 3.35%, जीतन राम मांझी की पार्टी को 3 सीटों पर 2.35% और मुकेश सहनी की वीआईपी को 4 सीटों पर 1.62% वोट हासिल हुए थे।


आपको बताते चलें कि ,2019 के चुनाव में नवादा,जहानाबाद, बक्सर, जमुई, बांका, शिवहर,सीतामढ़ी वैशाली, सिवान, सारण, गोपालगंज, दरभंगा, मधुबनी, मधेपुरा और हाजीपुर में राजद को हार का सामना करना पड़ा था। 2004 में राजद को दो सीटों पर जीत हासिल हुई थी, 2014 में आलोक महेता की हार हुई थी, 2009 में अररिया में भी हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में इस बार की लड़ाई राजद के लिए काफी अहम है।