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सीएम नीतीश कुमार और नितिन नबीन को टाइम बॉन्ड के भीतर करना होगा यह काम, नहीं तो राज्यसभा सीट पर खतरा

Bihar Politics: नीतीश कुमार और नितिन नवीन की राज्यसभा सदस्यता दोहरी सदस्यता नियम में फंसी है. 30 मार्च तक दोनों के लिए विधानसभा और परिषद की सीट छोड़ना अनिवार्य है. नहीं तो राज्यसभा की सीट खतरे में पड़ सकती है.

Bihar Politics
दोहरी सदस्यता पर सवाल
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar Politics: बिहार की राजनीति में एक बार फिर संवैधानिक प्रावधानों को लेकर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा नेता नितिन नबीन की राज्यसभा सदस्यता ‘दोहरी सदस्यता’ नियम के कारण सवालों में आ गई है। दोनों नेता 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं, जिसके बाद अब उन्हें तय समयसीमा के भीतर बड़ा निर्णय लेना होगा।


संविधान के प्रावधानों के अनुसार, किसी भी निर्वाचित प्रतिनिधि को 14 दिनों के भीतर यह फैसला करना अनिवार्य होता है कि वह संसद या राज्य विधानमंडल में से किस सदन की सदस्यता रखेगा। इस हिसाब से 30 मार्च तक दोनों नेताओं को विधानसभा या विधान परिषद की सदस्यता छोड़नी होगी, अन्यथा उनकी राज्यसभा सदस्यता स्वतः समाप्त मानी जा सकती है।


भारतीय संविधान के Article 101(2) के तहत कोई भी व्यक्ति एक साथ संसद और राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं रह सकता। इसे ‘समानांतर सदस्यता निषेध’ का प्रावधान कहा जाता है, जिसका उद्देश्य सत्ता के टकराव को रोकना और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को स्पष्ट बनाए रखना है।


यदि तय समय के भीतर त्यागपत्र नहीं दिया गया, तो राज्यसभा सीट स्वतः रिक्त घोषित हो सकती है। यह एक तकनीकी लेकिन महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया है, जो बिना किसी अतिरिक्त आदेश के लागू हो जाती है। इसलिए समय पर निर्णय लेना बेहद जरूरी माना जा रहा है।


हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया का मुख्यमंत्री पद पर कोई असर नहीं पड़ेगा। नीतीश कुमार छह महीने तक बिना किसी बाधा के मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं, क्योंकि यह नियम केवल सदस्यता से जुड़ा है, कार्यपालिका पद इससे प्रभावित नहीं होता।


वहीं, Article 99 के तहत शपथ लेना अनिवार्य होता है। बिना शपथ लिए कोई सदस्य सदन में न बैठ सकता है और न ही मतदान कर सकता है। हालांकि शपथ के लिए कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं है, लेकिन अनुच्छेद 101 के अनुसार 60 दिनों तक अनुपस्थित रहने पर सीट खाली हो सकती है। ऐसे में सभी संवैधानिक प्रक्रियाओं का समय पर पालन करना आवश्यक हो जाता है।

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FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता