Mukesh Sahani: विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक और पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने ररिवार को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद में आयोजित निषाद आरक्षण संकल्प यात्रा को संबोधित करते हुए केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर निषाद, कश्यप, मल्लाह और केवट समाज के साथ भेदभाव का आरोप लगाया।
कार्यक्रम में पहुंचने पर पार्टी नेताओं, समाजसेवियों, माताओं-बहनों, युवाओं और बुजुर्गों ने उनका जोरदार स्वागत किया। सहनी ने महर्षि कश्यप की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर नमन किया और आशीर्वाद लिया। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने उनके समर्थन में जमकर नारे लगाए।
मुकेश सहनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निषाद आरक्षण लागू कर दें, अन्यथा निषाद समाज उन्हें बदल देगा। उन्होंने कहा कि अगर पश्चिम बंगाल में निषाद, कश्यप और बिंद समाज को आरक्षण मिल सकता है और दिल्ली में निषाद, कश्यप, केवट तथा मल्लाह समाज को आरक्षण मिल सकता है, तो उत्तर प्रदेश में यह अधिकार क्यों नहीं मिल सकता। देश एक है, संविधान एक है, प्रधानमंत्री एक हैं और कानून एक है, फिर निषाद समाज के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह काम प्रधानमंत्री मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को करना चाहिए, लेकिन वे ऐसा नहीं कर रहे हैं। आरक्षण मिलने से समाज के गरीब परिवारों के बच्चे पढ़-लिखकर कलेक्टर, एसपी, डॉक्टर, इंजीनियर और बड़े अधिकारी बन सकते हैं। समाज को यह तय करना होगा कि जो उसके अधिकारों की लड़ाई नहीं लड़ता, वह उसका दोस्त है या दुश्मन।
सहनी ने कहा कि वे निषाद आरक्षण संकल्प यात्रा में लोगों से चंदा या वोट मांगने नहीं आए हैं। वोट देना हर नागरिक का अधिकार है। वे समाज को अपने पैरों पर खड़ा करने और दोस्त-दुश्मन की पहचान कराने आए हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी समाज के अनेक परिवारों को घर, सड़क, बिजली, साफ पानी और बेहतर शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
अपने संघर्ष का जिक्र करते हुए सहनी ने कहा कि उनका जन्म बेहद गरीब मछुआरा परिवार में हुआ। उनके पिता और दादा मछली मारते थे। 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने परिवार छोड़कर मुंबई का रुख किया और महज 900 रुपये मासिक वेतन तथा 30 रुपये प्रतिदिन मजदूरी से अपने जीवन की शुरुआत की। संघर्ष और मेहनत से उन्होंने सफलता हासिल की, लेकिन बिहार लौटने पर उन्होंने देखा कि उनका समाज आज भी पीछे है। इसके बाद उन्होंने पिछले 12-13 वर्षों से बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश और कर्नाटक सहित कई राज्यों में समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष शुरू किया।
उन्होंने कहा कि गरीब घर में जन्म लेना किसी की नियति नहीं है और संकल्प व आत्मविश्वास के साथ समाज का हर युवा आगे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान के माध्यम से गरीब, मजदूर, किसान और वंचित समाज को वोट की ताकत दी। आज जरूरत उस ताकत को समझने और अपने बच्चों के भविष्य के लिए इस्तेमाल करने की है।
मुकेश सहनी ने कहा कि चुनाव के समय जाति, धर्म और भावनाओं के नाम पर वोट मांगने वालों से समाज को सवाल करना चाहिए कि उन्होंने उसके अधिकारों के लिए क्या किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी को सत्ता में आए 12 साल हो चुके हैं और 13वां वर्ष चल रहा है, इसके बावजूद निषाद आरक्षण का सवाल लंबित है। उन्होंने प्रधानमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि 2027 से पहले निषाद आरक्षण लागू कर दें, वरना निषाद समाज उन्हें बदल देगा।
कार्यक्रम में वीआईपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष छात्र प्रकोष्ठ चंदन सहनी, कार्यक्रम प्रभारी प्रेमचंद कश्यप, प्रदेश अध्यक्ष (पश्चिम) इंजीनियर हरिओम निषाद, युवा प्रदेश अध्यक्ष राम भारत निषाद के अलावा आरडी कश्यप, कृपाल कश्यप, विजय निषाद, डॉ. देवेंद्र कश्यप, राजेंद्र बाबू कश्यप, डॉ. रविराम कश्यप, अजय कुमार कश्यप, गंगादीन कश्यप, रामप्रकाश कश्यप, सूरज कुमार कश्यप, प्रेम शंकर कश्यप, नितेश कुमार, रविंद्र पाल कश्यप, प्रदीप कश्यप, सुखवीर कश्यप, कुंवर पाल कश्यप, प्रवेश यादव और जनार्दन कश्यप सहित बड़ी संख्या में पार्टी नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।





