Bihar Politics: बिहार में विधानसभा चुनाव की वोटिंग से पहले आरजेडी नेता अरेस्ट, जानिए.. पुलिस ने क्यों किया गिरफ्तार?

Bihar Politics: मधुबनी के झंझारपुर राजद जिलाध्यक्ष वीर बहादुर राय को एक पुराने मामले में फुलपरास थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी ने स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है और विधानसभा चुनाव के माहौल को भी प्रभावित किया है।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Nov 03, 2025, 1:34:55 PM

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Bihar Politics: बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हैं। आगामी 6 नवंबर को बिहार की 121 सीटों पर वोटिंग कराई जाएगी। वोटिंग से ठीक पहले आरजेडी को बड़ा झटका लगा है। मधुबनी में पुलिस ने वोटिंग से पहले आरजेडी के जिलाध्यक्ष को गिरफ्तार कर लिया है। 10 साल पुराने मामले में पुलिस ने यह कार्रवाई की है।


जिले के झंझारपुर संगठन के राजद जिलाध्यक्ष वीर बहादुर राय को फुलपरास थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, उनके खिलाफ न्यायालय से गैर-जमानती वारंट जारी था। यह कार्रवाई पुराने दुराचार मामले में हुई है।


दरअसल, मधुबनी जिले में राजद ने झंझारपुर और मधुबनी दो अलग-अलग संगठन बनाए हैं। झंझारपुर संगठन की कमान वीर बहादुर राय के हाथों में थी। वे फुलपरास थाना क्षेत्र के जगतपुर गांव के निवासी हैं। पार्टी के इस विभाजन के पीछे स्थानीय स्तर पर बेहतर संगठनात्मक कार्य करने की रणनीति बताई जा रही है।


करीब दस साल पहले, जगतपुर गांव की एक महिला ने वीर बहादुर राय सहित अन्य लोगों पर कथित दुराचार का आरोप लगाते हुए न्यायालय में मामला दर्ज कराया था। यह मामला गंभीर धाराओं के तहत लंबित था। इसी के आधार पर न्यायालय ने वारंट जारी किया, जिसके तहत पुलिस ने गिरफ्तारी की।


गिरफ्तारी की खबर फैलते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोग इस कार्रवाई को विभिन्न नजरिए से देख रहे हैं। कुछ ने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाए और इसे राजनीति से प्रेरित भी बताया। विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण इस घटना ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है।


पुलिस का कहना है कि जिले में विशेष छापेमारी अभियान पुराने मामलों के निपटारे और वारंटी गिरफ्तारी के लिए चलाया जा रहा है। पुलिस का दावा है कि यह अभियान निष्पक्ष और कानूनी प्रक्रिया के तहत हो रहा है।


फुलपरास डीएसपी अमित कुमार ने बताया कि यह पुराना मामला गंभीर धाराओं में लंबित था। न्यायालय के गैर-जमानती वारंट के आलोक में कार्रवाई की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरोपी किसी राजनीतिक दल से जुड़े हैं या नहीं, इसकी जानकारी पुलिस के पास नहीं है। गिरफ्तारी पूरी तरह न्यायिक आदेश पर आधारित है। बहरहाल, चुनाव के बीच इस गिरफ्तारी ने स्थानीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।