Bihar Politics: बिहार में एक बार फिर से शराबबंदी कानून में ढील देने की मांग उठने लगी है। एनडीए में शामिल हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के संरक्षक और केंद्र में मंत्री जीतन राम मांझी अक्सर इस मांग को उठाते रहे हैं। उनकी सरकार से मांग है कि बिहार में शराबबंदी का गुजरात मॉडल लागू होना चाहिए और थोड़ा-थोड़ा पीने वाले लोगों को नहीं पकड़ना चाहिए।
दिल्ली रवाना होने से पहले पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में जीतन राम मांझी ने कहा है कि शराबबंदी पर जो उन्होंने बयान दिया है वह उनकी निजी राय है। मांझी ने कहा कि मैं हमेशा से कहता रहा हूं, जब नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री थे तब भी, मैं जानता हूं कि आज 11 लाख लोग किसी न किसी रूप में मुकदमे में फंसे हुए हैं। इसमें 5 से 6 लाख लोग सिर्फ एससी के लोग हैं। सिड्यूल कास्ट के लोग इसलिए फंसे हुए हैं कि शराबबंदी कानून को हमारे पदाधिकारी लोग नहीं मान रहे हैं।
मांझी ने कहा कि नीतीश कुमार को हम धन्यवाद देते हैं कि हमारे कहने पर उन्होंने शराबबंदी कानून की तीसरी समीक्षा की बात की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर एक लीटर शराब लेकर कोई जाते रहे तो उसको पकड़ने की जरूरत नहीं है या पी कर जाते रहे तो उसको पकड़ने की जरुरत नहीं है और अगर है भी तो उसको जमानत पर छोड़ देना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि पुलिस के लोग हजार लाख लीटर शराब ले जाने वाले लोगों को छोड़ दे रहे हैं लेकिन वहीं एक लीटर लेकर जाने वाले या पीने वाले लोगों को जेल भेज दिया जा रहा है। इसलिए कहता हूं कि शराबबंदी होना ही चाहिए लेकिन जो इस कानून का पालन कराने वाले लोग है, वह गड़बड़ कर रहे हैं। बड़े लोगों को छोड़ देते हैं और गरीबो को पकड़ लेते हैं।





