ब्रेकिंग
मुआवजे को लेकर बरौनी रिफाइनरी में हिंसक आंदोलन, पुलिस की लाठीचार्ज के बाद जमकर तोड़फोड़, करोड़ों की संपत्ति का नुकसानबांकीपुर उपचुनाव: बीजेपी ने अभिषेक कुमार 'बंटी' पर खेला दांव, नितिन नबीन ने दी बधाई और शुभकामनाएं'16 साल बीजेपी को दिए, अब मेहनत का फल मिला', बांकीपुर से पति को उम्मीदवार बनाये जाने पर अमृता कृष्णा ने जताई खुशीबांकीपुर उपचुनाव: टिकट मिलने की खबर सुन खुशी से झूम उठे अभिषेक 'बंटी', समर्थकों ने किया जोरदार स्वागतबदतमीज, खच्चर, बुड़बक कहीं का, किस पर इतना भड़कीं BJP विधायक मैथिली ठाकुर, सोशल मीडिया पर ऑडियो वायरलमुआवजे को लेकर बरौनी रिफाइनरी में हिंसक आंदोलन, पुलिस की लाठीचार्ज के बाद जमकर तोड़फोड़, करोड़ों की संपत्ति का नुकसानबांकीपुर उपचुनाव: बीजेपी ने अभिषेक कुमार 'बंटी' पर खेला दांव, नितिन नबीन ने दी बधाई और शुभकामनाएं'16 साल बीजेपी को दिए, अब मेहनत का फल मिला', बांकीपुर से पति को उम्मीदवार बनाये जाने पर अमृता कृष्णा ने जताई खुशीबांकीपुर उपचुनाव: टिकट मिलने की खबर सुन खुशी से झूम उठे अभिषेक 'बंटी', समर्थकों ने किया जोरदार स्वागतबदतमीज, खच्चर, बुड़बक कहीं का, किस पर इतना भड़कीं BJP विधायक मैथिली ठाकुर, सोशल मीडिया पर ऑडियो वायरल

धनबाद सिंह मेंशन में दो फाड़, दो गुटों में बंटा मजदूर यूनियन

DHANBAD: धनबाद का सिंह मेंशन मजदूर संगठनों के पेच में फंसकर रह गया है। पूर्व विधायक संजीव सिंह के जेल जाने के बाद बाहर घर मे कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगा

धनबाद सिंह मेंशन में दो फाड़, दो गुटों में बंटा मजदूर यूनियन
Jitendra Vidyarthi
2 मिनट

DHANBAD: धनबाद का सिंह मेंशन मजदूर संगठनों के पेच में फंसकर रह गया है। पूर्व विधायक संजीव सिंह के जेल जाने के बाद बाहर घर मे कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब सिंह मेंशन से दो मजदूर संगठनों का संचालन होगा। 


एक ओर जहां जनता मजदूर संघ की बागडोर सिद्धार्थ गौतम उर्फ मनीष सिंह संभाल रहे हैं तो दूसरी ओर संजीव सिंह पत्नी रागनी सिंह जनता श्रमिक संघ की बागडोर संभाल रही हैं। रविवार को संजीव सिंह समर्थकों ने औपचारिक घोषणाएं कर दी। साथ उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि सिर्फ कोयला खनन में ही नहीं बल्कि सभी सेक्टर में जनता श्रमिक संघ मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ेगी।


वही इस घोषणा से सिंह मेंशन परिवार खुद को अलग रखे हुए था। हालांकि रागनी सिंह इस कार्यक्रम में नज़र नहीं आई। भले उनके समर्थकों ने इस कार्यक्रम की पूरी बागडोर संभाली। वही सूत्रों की माने तो कही न कही इस संगठन के गठन से परिवार में दूरियां काफी बढ़ सकती है। 


जिसका खामियाजा कही न कही आने वाले चुनाव में देखने को मिल सकता है। बहरहाल अब यह देखना दिलचस्प होगा कि एक ही घर में दो मजदूरों संगठनों के संचालन से मजदूरों को कितना लाभ मिलता है और इसका राजनीतिक फायदा इस घराने को कितना मिल पाता है।