ब्रेकिंग
मुजफ्फरपुर में सेक्स रैकेट का बड़ा खुलासा, 7 आरोपी गिरफ्तार, 2 नाबालिग बच्चियां बरामदसहरसा में 35 वर्षीय ऑटो ड्राइवर ने की आत्महत्या, पारिवारिक कलह की आशंकादिल्ली में बैठकर अमेरिका के लोगों से 100 करोड़ की ठगी, 11 साइबर अपराधी गिरफ्तारसमस्तीपुर छेड़खानी कांड पर बोले जीतन राम मांझी, कहा- ‘सबका इलाज होगा’परिवहन विभाग में बड़े पैमाने पर तबादला, 334 चलन्त दस्ता सिपाहियों का ट्रांसफर लिस्ट देखें..मुजफ्फरपुर में सेक्स रैकेट का बड़ा खुलासा, 7 आरोपी गिरफ्तार, 2 नाबालिग बच्चियां बरामदसहरसा में 35 वर्षीय ऑटो ड्राइवर ने की आत्महत्या, पारिवारिक कलह की आशंकादिल्ली में बैठकर अमेरिका के लोगों से 100 करोड़ की ठगी, 11 साइबर अपराधी गिरफ्तारसमस्तीपुर छेड़खानी कांड पर बोले जीतन राम मांझी, कहा- ‘सबका इलाज होगा’परिवहन विभाग में बड़े पैमाने पर तबादला, 334 चलन्त दस्ता सिपाहियों का ट्रांसफर लिस्ट देखें..

Parliament Budget Session: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव, इतने सांसदों ने किया समर्थन

Parliament Budget Session: कांग्रेस ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा है। 118 सांसदों के हस्ताक्षर वाले इस प्रस्ताव में विपक्षी नेताओं को बोलने से रोके जाने का आरोप लगाया गया है।

Parliament Budget Session
© Google
Mukesh Srivastava
2 मिनट

Parliament Budget Session: कांग्रेस ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। पार्टी की ओर से यह नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंपा गया है, जिस पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। कांग्रेस ने नियम 94C के तहत यह प्रस्ताव पेश किया है।


यह प्रस्ताव लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दिए जाने और कांग्रेस की महिला सांसदों के खिलाफ सदन में कथित रूप से अनुचित स्थिति उत्पन्न होने के आरोपों के आधार पर लाया गया है। विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा में विपक्षी नेताओं को अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया जा रहा है, जबकि सत्तापक्ष के सदस्यों को खुलकर बोलने की छूट मिल रही है।


भारतीय संसदीय इतिहास में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के अब तक तीन उदाहरण रहे हैं। पहला मामला वर्ष 1954 का है, जब सोशलिस्ट सांसद विग्नेश्वर मिसिर ने स्पीकर जी.वी. मावलंकर पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए प्रस्ताव पेश किया था, जिसे बहस के बाद खारिज कर दिया गया।


दूसरा मामला 1966 में सामने आया, जब मधु लिमये ने स्पीकर हुकम सिंह के खिलाफ प्रस्ताव लाया, लेकिन पर्याप्त समर्थन न मिलने के कारण यह स्वीकार नहीं किया गया। तीसरा उदाहरण 1987 का है, जब सोमनाथ चटर्जी ने स्पीकर बलराम जाखड़ के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन ने खारिज कर दिया।


बता दें कि संविधान के अनुच्छेद 94 के अनुसार, लोकसभा स्पीकर को हटाने के लिए कम से कम 14 दिन का नोटिस और सदन में बहुमत से पारित होना आवश्यक है।

रिपोर्टिंग
F

रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता