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चुनाव में हार पर RJD का मंथन : जिसे टिकट देने लायक नहीं समझा उसे हार का कारण पता लगाने का जिम्मा सौंपा

PATNA : बिहार विधानसभा चुनाव में मामूली अंतर से हारी आरजेडी ने अब उन कारणों का पता लगाने का फैसला लिया है जिसके कारण सत्ता हासिल नहीं हो सकी. पार्टी ने इसके लिए कमेटी बनायी है

चुनाव में हार पर RJD का मंथन : जिसे टिकट देने लायक नहीं समझा उसे हार का कारण पता लगाने का जिम्मा सौंपा
First Bihar
3 मिनट

PATNA : बिहार विधानसभा चुनाव में मामूली अंतर से हारी आरजेडी ने अब उन कारणों का पता लगाने का फैसला लिया है जिसके कारण सत्ता हासिल नहीं हो सकी. पार्टी ने इसके लिए कमेटी बनायी है. लेकिन दिलचस्प बात ये है कि विधानसभा चुनाव में जिसे पार्टी का टिकट देने लायक ही नहीं समझा गया उसे हार का कारण पता लगाने का जिम्मा सौंपा गया है.


हार पर आरजेडी की समीक्षा
आरजेडी सूत्रों के मुताबिक पार्टी ये पता लगायेगी कि बिहार के कुछ खास इलाकों में उसे सफलता हासिल क्यों नहीं हो पायी. आखिरकार क्यों सत्ता इतना पास आकर खिसक गयी. हार की कारणों का पता लगाने के लिए आरजेडी ने कमेटी बनायी है. इसका प्रमुख पूर्व मंत्री श्याम रजक को बनाया गया है. श्याम रजक और उनके साथ आरजेडी के दूसरे नेता ये पता लगायेंगे कि पार्टी किन कारणों से हारी.


जिसे टिकट नहीं दिया उसे जिम्मा दिया
दिलचस्प बात ये है कि आरजेडी ने हार का कारण ढूढने का जिम्मा श्याम रजक को सौंपा है. श्याम रजक जेडीयू के नेता हुआ करते थे. चुनाव से पहले उन्होंने मंत्री पद और विधायिकी छोड़ कर पाला बदल लिया था. लेकिन आरजेडी ने उन्हें विधानसभा चुनाव में टिकट ही नहीं दिया. जिस फुलवारीशरीफ सीट से श्याम रजक पिछले 25 सालों से विधायक चुने जा रहे थे, राजद ने उस सीट को माले को दे दिया. वहां माले के विधायक चुनाव जीत भी गये. टिकट तो नहीं मिला लेकिन  श्याम रजक को हार का कारण पता लगाने का जिम्मा दिया गया है.


राजद सूत्रों ने बताया कि बिहार विधानसभा चुनाव में शहरी क्षेत्रों में मिली हार की खास तौर पर समीक्षा की जायेगी. उधर आरजेडी दलित सीटों पर मिली पराजय की भी समीक्षा करेगा.  हार की समीक्षा के लिए उन दलित उम्मीदवारों को बुलाया जाएगा जो इस बार चुनाव हार चुके हैं. उनसे पूछा जायेगा कि आखिरकार वे चुनाव क्यों हारे. उम्मीदवार के साथ साथ संबंधित जिलों के जिलाध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों को भी इस समीक्षा में शामिल किया जायेगा.


वैसे पार्टी के सामने तीन मुख्य सवाल हैं. पहला सवाल ये है कि हार का मुख्य कारण क्या रहा. वहीं दूसरा सवाल ये कि राजद का परंपरागत वोटर छिटका या अब भी जुड़ा हुआ है और तीसरा सवाल ये होगा कि गैर परंपरागत वोटर राजद के प्रति आकर्षित क्यों नहीं हुए.


आरजेडी के एक नेता ने बताया कि पार्टी नेतृत्व मान कर चल रहा है कि नीतीश कुमार की सरकार बहुत ज्यादा दिन चलने वाली नहीं है. ऐसे में पार्टी को हर समय चुनाव के लिए तैयार रहना होगा. हार के कारणों की समीक्षा इसलिए ही की जा रही है कि अगली बार कोई चूक नहीं हो.

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