Bihar Politics: ‘दो गुजरातियों को बिहार, संविधान और लोकतंत्र से सख़्त नफ़रत’ लालू का तीखा तंज, तेजस्वी ने वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन को बताया ‘वोटबंदी’

Bihar Politics: बिहार में वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। लालू प्रसाद ने दो गुजरातियों पर तीखा तंज कसते हुए लोकतंत्र पर हमले का आरोप लगाया, जबकि तेजस्वी यादव ने इस प्रक्रिया को ‘वोटबंदी’ करार दिया।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Mon, 07 Jul 2025 12:13:39 PM IST

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Bihar Politics: बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले कराए जा रहे वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है। इसको लेकर विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा है और शीर्ष अदालत ने सुनवाई की तिथि भी तय कर दी है। इस बीच लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव ने एक बार फिर से सरकार पर तीखा हमला बोला है।


दरअसल, बिहार में चुनाव से पहले मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्ष का कहना है कि केंद्र और बिहार सरकार के साथ साथ चुनाव आयोग की मिलीभगत से करोड़ों लोगों का नाम वोटर लिस्ट से काटने की साजिश रची गई है और उसी सोची समझी साजिश के तहत चुनाव से पहले वोटर लिस्ट पुनरीक्षण का काम शुरू किया गया है। आरजेडी चीफ लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव ने एक बार फिर से इसको लेकर सरकार पर हमला बोला है।


लालू प्रसाद ने एक्स पर लिखा, “दो गुजराती मिलकर 8 करोड़ बिहारियों के वोट का अधिकार छिनने का प्रयास कर रहे है। इन दो गुजरातियों को बिहार, संविधान और लोकतंत्र से सख़्त नफ़रत है। जागो और आवाज़ उठाओ! लोकतंत्र और संविधान बचाओ!!”


उधर तेजस्वी यादव ने भी एक्स पर लिखा कि, “बिहार में वोटबंदी की गहरी साजिश। दलित-पिछड़ा-अतिपिछड़ा और अल्पसंख्यक के वोट काटने और फर्जी वोट जोड़ने का खेल शुरू। मोदी-नीतीश संविधान और लोकतंत्र को कुचलने तथा आपके मत का अधिकार छिनने के लिए संकल्पित होकर चुनाव आयोग के माध्यम से कार्य कर रहे है। ये लोग प्रत्यक्ष हार देखकर अब बौखला गए हैं। जब मतदाता का मत ही समाप्त कर देंगे तो काहे का लोकतंत्र और संविधान”।


बता दें कि बिहार का यह विवाद सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा है। बिहार में मतदाता सूची से लाखों नाम हटाने की आशंका को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं। याचिकाकर्ताओं ने इसे असंवैधानिक और जनविरोधी बताते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की है। सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार 10 जुलाई को सुनवाई के लिए सहमति दे दी है।