1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Nov 15, 2025, 3:00:09 PM
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Bihar Politics: बिहार की सियासत से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी की करारी शिकस्त के बाद लालू यादव के परिवार में बड़ा बवाल हो गया है। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने राजनीति छोड़ने के साथ साथ लालू परिवार से नाता तोड़ने का एलान कर दिया है।
दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी के बेहद खराब प्रदर्शन के बाद उसका साइड इफेक्ट सामने आने लगा है। लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने पार्टी की दुर्गति के लिए तेजस्वी यादव के करीबियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए एलान कर दिया है कि वह लालू फैमिली से न सिर्फ नाता तोड़ लेंगी बल्कि राजनीति करना भी छोड़ देंगी।
रोहिणी ने एक्स पर लिखा, “मैं राजनीति छोड़ रही हूं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूं... संजय यादव और रमीज़ ने मुझसे यही करने को कहा था... और मैं सारा दोष अपने ऊपर ले रहा हूँ”। रोहिणी के इस ट्विट के बाद आरजेडी में हड़कंप मच गया है और चर्चाओं का बाजार एक बार फिर से गर्म हो गया है।
लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य के इस ट्वीट के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि परिवार में तेजस्वी के करीबी संजय यादव के खिलाफ काफी आक्रोश है। रोहिणी ने कुछ स्पष्ट तो नहीं कहा है लेकिन उनके बयान से साफ हो गया है कि आरजेडी की दुर्गति के लिए वह तेजस्वी यादव के सलाहकार संजय यादव एंड कंपनी को जिम्मेवार माना जा रहा है।
बता दें कि यह पहला मौका नहीं है जब रोहिणी आचार्य ने तेजस्वी यादव के सलाहकार सांसद संजय यादव को कठघरे में खड़ा किया है। इससे पहले उन्होंने संजय यादव पर तीखा हमला बोला था और अपने भाई तेज प्रताप यादव के परिवार और पार्टी से निकाले जाने के लिए उन्हें जिम्मेवार बताया था हालांकि बाद में बिहार चुनाव को देखते हुए किसी तरह से मामले को रफादफा किया गया था।
इससे पहले रोहिणी ने एक्स पर लिखा था कि “जो जान हथेली पर रखते हुए बड़ी से बड़ी कुर्बानी देने का जज्बा रखते हैं , बेखौफी - बेबाकी - खुद्दारी तो उनके लहू में बहती है”.
अपने एक पोस्ट में रोहिणी आचार्य लिखीं थीं, "मैंने एक बेटी व बहन के तौर पर अपना कर्तव्य एवं धर्म निभाया है और आगे भी निभाती रहूंगी. मुझे किसी पद की लालसा नहीं है, न मेरी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा है. मेरे लिए मेरा आत्मसम्मान सर्वोपरि है."
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था, "फ़्रंट सीट सदैव शीर्ष नेता के लिए होती है और उनकी अनुपस्थिति में किसी को भी उस सीट पर नहीं बैठना चाहिए. वैसे अगर कोई अपने आप को शीर्ष नेतृत्व से भी ऊपर समझ रहा है, तो अलग बात है."