Bihar News: भारतीय जनता पार्टी ने दिसंबर 2025 में बिहार में संगठनात्मक स्तर पर बड़ा बदलाव करते हुए विधायक संजय सरावगी को बिहार बीजेपी का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया. नियुक्ति के पांच महीने बाद 29 मई 2026 को संजय सरावगी ने अपनी नई कमेटी बनाई.जिसमें उपाध्यक्ष, महामंत्री,मंत्री, मुख्यालय प्रभारी व अन्य पदों पर 38 नेताओं को नियुक्त किया. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने लगे हाथ सात मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष को भी नियुक्त कर दिया. सबसे खास बात यह कि, मीडिया प्रभाग का पुनर्गठन नहीं किया जा सका. 10 महीने बाद भी संजय सरावगी मीडिया प्रभाग में नई नियुक्ति करने में विफल साबित हुए हैं. नतीजा यह हुआ कि अधिकांश प्रवक्ता-पैनलिस्ट निष्क्रिय हो गए . ऐसे सवाल यह है कि प्रदेश अध्यक्ष के लिए मीडिया प्रभाग की जरूरत नहीं या नए सिरे से गठन में समस्या आ रही ?
दस महीने बाद भी मीडिया प्रभाग का नहीं हुआ गठन
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर संजय सरावगी को जिम्मेदारी संभाले करीब दस महीने हो चुके हैं। बावजूद इसके मीडिया प्रभाग को लेकर वैसी सक्रियता नजर नहीं आ रही, जैसी एक प्रमुख सत्ताधारी पार्टी से अपेक्षित होती है। बीजेपी जैसी बड़ी राजनीतिक पार्टी के लिए मीडिया प्रभाग सिर्फ प्रेस रिलीज जारी करने या प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने तक सीमित नहीं होता। सरकार और संगठन की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाना, विपक्ष के आरोपों का मजबूती और तर्कपूर्ण तरीके से जवाब देना, पार्टी का पक्ष मजबूती से रखना और राजनीतिक मुद्दों पर तत्काल प्रतिक्रिया देना भी मीडिया प्रभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। बिहार बीजेपी के मीडिया प्रभाग की मौजूदा स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है। पार्टी के कई प्रवक्ता और पैनलिस्ट, जो पहले राजनीतिक मुद्दों पर लगातार सक्रिय दिखाई देते थे, अब अपेक्षाकृत कम सक्रिय नजर आते हैं।
कागज पर है प्रवक्ता-पैनलिस्टों की पूरी फौज
बता दें, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने मीडिया में बड़ी संख्या में नेताओं को एडजस्ट कर दिया था. प्रवक्ता और पैनलिस्टों की लंबी-चौड़ी फौज थी. चूंकि मीडिया प्रभाग का पुनर्गठन नहीं हुआ है, लिहाजा पुरानी टीम कागजों पर अभी भी है. जानकारी के अनुसार, मीडिया प्रकोष्ठ में संयोजक-सह संयोजक से लेकर प्रवक्ता और पैनलिस्टों की संख्या 40 से अधिक है. वर्तमान स्थिति यह है कि 2-4 को छोड़ दें तो बाकी पूरी तरह से निष्क्रिय हो गए हैं.
जवाब देने में हांफ रही बिहार बीजेपी
चूंकि बिहार में भाजपा नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी पर हैं. लिहाजा विपक्ष सबसे अधिक हमलावर बीजेपी पर ही है. सम्राट सरकार के खिलाफ रोज-रोज प्रदर्शन हो रहे, आने वाले समय में यह आंदोलन और बढ़ने की ही उम्मीद है. ऐसे में यहां तेज तर्रार प्रवक्ताओं की जरूरत है. मीडिया प्रभारी से लेकर मुख्य प्रवक्ता होने चाहिए. ऐसा नहीं कि, भाजपा में तेजतर्रार नेताओं की कमी है, बल्कि पूरी फौज है. ऐसे-ऐसे नेता हैं जो विपक्ष के हमलों का मुंहतोड़ जवाब दे सकते हैं. रेस में भी हैं, लेकिन प्रदेश नेतृत्व की सुस्ती या मीडिया प्रभाग को लेकर दिलचस्पी नहीं लेने की वजह से आज तक इसे पुर्नगठन नहीं किया जा सका है.
बीजेपी अध्यक्ष की प्राथमिकता सूची से गायब हुआ मीडिया प्रभाग
भाजपा के भीतर ही यह सवाल उठ रहे हैं कि,प्रदेश अध्यक्ष ने संगठन के इतने बड़े हिस्से का पुनर्गठन कर दिया तो मीडिया प्रभाग के मामले में निर्णय लेने में इतनी देरी क्यों ? क्या प्रवक्ताओं और पैनलिस्टों के चयन को लेकर दल के अंदर सहमति नहीं बन पा रही, या फिर पुराने चेहरों को बनाए रखने या हटाने को लेकर असमंजस है ? क्या मीडिया बीजेपी की प्राथमिकता सूची से गायब हो गया ?
भाजपा अध्यक्ष ने भले ही मीडिया विंग का गठन नहीं किया हो पर अन्य प्रकोष्ठों के प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति 29 मई 2026 को ही कर दिया था. जितेंद्र सिंह को युवा मोर्चा का अध्यक्ष, विधायक निशा सिंह को महिला मोर्चा अध्यक्ष, प्रमोद चंद्रवंशी को ओबीसी मोर्चा और विधायक सुजीत पासवान को अनुसूचित जाति मोर्चा का जिम्मा दिया गया है. निरंजन पंजियार थारू को अनुसूचित जनजाति मोर्चा और मो. महबुल हक को अल्पसंख्यक मोर्चा का अध्यक्ष, वहीं राम सुमिरन सिंह को किसान मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है.





