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भरत तिवारी एनकाउंटर के आरोपी को पुरस्कृत कर दिया?, रोहिणी आचार्य ने सरकार से पूछे तीखे सवाल

Bihar Politics: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में रोहिणी आचार्या ने नामजद पुलिस अधिकारी को डीएसपी बनाए जाने पर सम्राट चौधरी और बिहार सरकार पर सवाल उठाए। जांच, गिरफ्तारी और मोबाइल फोन को लेकर भी कई सवाल किए।

Bihar Politics
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar Politics: भोजपुर के आरा में भरत भूषण तिवारी के कथित फर्जी एनकाउंटर को लेकर बिहार की राजनीति लगातार गर्माई हुई है। इस मामले में अब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने भरत तिवारी एनकाउंटर मामले के नामजद आरोपी पुलिस अधिकारी राजेश शर्मा को मद्य निषेध विभाग में डीएसपी बनाए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने आरोपी अधिकारी को "पुरस्कृत" कर दिया है।


रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा “हत्या के नामजद आरोपी पुलिस अधिकारी को पुरस्कृत कर दिया सम्राट सरकार ने? जवईनिया गाँव के गरीब विस्थापितों की लड़ाई लड़ने वाले, भोजपुर प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करने की बात करने वाले युवक भरत तिवारी की फर्जी पुलिसिया मुठभेड़ में की गयी हत्या के मामले में नामजद आरोपी पुलिस अधिकारी को नयी जिम्मेदारी सौंपा जाना, पुरस्कृत किए जाने के समान  .. सम्राट सरकार के इस हैरान कर देने वाले फैसले से ही भरत तिवारी के परिजनों व् ग्रामीणों के द्वारा लगाया गया ये आरोप साबित होता दिखता है कि फर्जी मुठभेड़ को सत्ता शीर्ष, पुलिस उच्चाधिकारियों व् स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की सहमति प्राप्त थी..  


बिहार के मुख्यमंत्री, बिहार सरकार व् बिहार के डीजीपी से बिहार की जनता के साथ-साथ मेरा ये सीधा सवाल है कि: 

मृतक के परिजनों के द्वारा दर्ज करायी गयी एफआईआर ( प्राथमिकी) में लगभग आधा दर्जन पुकिसकर्मियों को नामजद आरोपी बनाए जाने के बावजूद उनमें से अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई है ?

नामजद आरोपियों से अब तक कोई पूछताछ क्यों नहीं की गयी है ?

मामले की जाँच की गति इतनी धीमी क्यों है और जाँच की प्रक्रिया में पारदर्शिता क्यों नहीं बरती जा रही है ?

क्या आरोपी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार नहीं किए जाने , धीमी व् ढुलमुल जाँच का मकसद फर्जी मुठभेड़ का आदेश देने वाले 'किसी बड़े नाम' को बचाना है?

और 

पूर्व में भी मेरे और मृतक के परिजनों के द्वारा उठाया गया अहम सवाल यथावत है कि " मृतक का मोबाइल फोन कहाँ है ..लगभग एक पखवारा बीत जाने के बाद भी पुलिस के द्वारा मोबाइल फोन अब तक परिजनों को क्यों नहीं सौंपा गया है?"

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता