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कल निकलेगा बाबा बागेश्वर के दरबार में पर्ची, जानें कैसे लगेगी आपकी अर्जी

1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 14, 2023, 9:53:44 AM

कल निकलेगा बाबा बागेश्वर के दरबार में पर्ची, जानें कैसे लगेगी आपकी अर्जी

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PATNA : बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री बिहार में बागेश्वर धाम के पंडित धर्मेंद्र शास्त्री राजनीतिक विरोध के बीच बिहार पहुंच चुके हैं। इनके आगमन के बाद पर पूरा बिहार भक्तिमय माहौल में डूबा नजर आ रहा है। बाबा का बिहार में पहली बार दरबार लग रहा है। ऐसे में पड़ोसी राज्यों के साथ नेपाल तक से भक्त दरबार में हाजरी लगाने के लिए आ सकते हैं। ऐसे में हर कोई जानना चाहता है कि बाबा के दरबार में उनकी पर्ची कैसे निकलेगी। 


दरअसल, बाबा बागेश्वर सरकार के दरबार में बड़ी संख्या में लोग हैं जो अपनी पर्ची निकलवाना चाहते हैं। इसके लिए वो लगातार बिहार बागेश्वर फाउंडेशन में संपर्क कर रहे हैं। ऐसे श्रद्धालुओं को कुछ करने की जरूरत नहीं है। उन्हें केवल दरबार में जाकर बैठना है। बाबा लोगों को खुद बुलाकर पर्ची निकालेंगे। साथ ही, आम लोगों को कहीं कोई रजिस्ट्रेशन भी करवाने की कोई जरूरत नहीं है। आयोजन में रोज शाम चार से सात बजे तक हनुमंत कथा और भजन के बाद प्रसाद वितरण भी किया जाएगा। 


वहीं, इससे पहले कल बाबा ने अपने हनुमत कथा के दौरान गीत के माध्यम से कहा कि जीवन तो भैया एक रेल है , कभी पैसेंजर कभी मेल है। सुख-दुख की पटरी दौड़ लगाती है, मंजिल तक यह हमको पहुंचा आती है। उन्होंने कहा कि मंजिल क्या है. परमात्मा के द्वार तक पहुंचना मंजिल है.। जीवन तो भैया एक रेल है कभी पैसेंजर कभी मेल है। श्रद्धालुओं ने इस पर जमकर तालियां बजायीं। 


बाबा धीरेंद्र शास्त्री ने भागवत शब्द का अर्थ बताते हुए कहा कि भागवत में चार अक्षर हैं. भ, ग, व और त. यहां भ का अर्थ है भक्ति .ग का अर्थ ज्ञान, व का वैराग्य और त का त्याग।  उन्होंने भक्ति-ज्ञान, वैराग्य और त्याग का गहन अर्थ बताते हुए कहा कि चारों शब्द के जो अर्थ उजागर हैं, वास्तव में उनका अर्थ उतना ही नहीं है. चारों का अर्थ बड़ा गहरा है। 


आपको बताते चलें कि,बागेश्वर धाम के बाबा आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री शनिवार को पटना पहुंचे। पटना पहुंचते ही अपने स्वागत में बिहारवासियों का प्यार देख उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि हमारी आत्मा है बिहार। बिहार में बहार है। वहीं हिंदू-मुस्लिम की बातों पर बाबा बागेश्वर ने कहा कि मैं तो हिंदू-मुस्लिम नहीं बल्कि हिंदू-हिंदू करता हूं।  कार पर बैठे बागेश्वर बाबा ने हाथ हिलाकर सभी का अभिनंदन किया।