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आरक्षण के भीतर आरक्षण पर NDA में दो फाड़: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाने पर भड़के मांझी, चिराग पासवान को बता दिया स्वार्थी

PATNA: एससी/एसटी में आरक्षण के भीतर आरक्षण के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर एनडीए के भीतर दो फाड़ होता दिख रहा है। लोजपा (रामविलास) के चीफ और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सुप्र

आरक्षण के भीतर आरक्षण पर NDA में दो फाड़: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाने पर भड़के मांझी, चिराग पासवान को बता दिया स्वार्थी
Mukesh Srivastava
3 मिनट

PATNA: एससी/एसटी में आरक्षण के भीतर आरक्षण के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर एनडीए के भीतर दो फाड़ होता दिख रहा है। लोजपा (रामविलास) के चीफ और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाया था और सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की बात कही थी हालांकि एनडीए में शामिल हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने चिराग पासवान को स्वार्थी बता दिय है।


एससी/ एसटी में आरक्षण के भीतर आरक्षण पर चिराग पासवान की अपत्ति पर जीतन राम मांझी ने कहा है कि जो आदमी बढ़ गया है वह आगे बढ़ते रहे और जो लोग पिछड़ गए हैं उनके बारे में सोंचा जाए इसलिए हम हर हालत में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हैं। सुप्रीम कोर्ट का जो जजमेंट आया है वह 10 साल पहले आना चाहिए था। बाबा साहेब के अनुसार साक्षरता एक मानदंड है सबसे नीचे होने का। 


उन्होंने कहा कि एससी की साक्षरता दर महज 30 फीसद है। इस तीस प्रतिशत के भीतर कई जातियां हैं। तीस प्रतिशत से ऊपर वाली जातियों को आरक्षण का लाभ मिलता रहे मैं इसका विरोध नहीं करता हूं लेकिन जिन लोगों की साक्षरता दर 7-8 प्रतिशत है उसको तो आगे बढ़ाना ही चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि जो समाज में नीचे गिरा हुआ है, उसको आगे बढ़ाने के लिए प्रयास होना चाहिए।


आरक्षण के भीतर आरक्षण के फैसले पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के यह कहने पर कि इस देश में दलितों के साथ होता है भेदभाव, दलितों को मंदिर में पूजा नहीं करने दिया जाता है और ना ही घोड़ी चढ़ने दिया जाता है, इसपर मांझी ने कहा कि ऐसी बात स्वार्थी लोग कह रहे हैं। भुइयां, मुसहर, डोम, मेहतर जाति के जो लोग हैं उनमें से कितने आईएएस, आईपीएस, इंजीनियर और चीफ इंजीनियर हैं? जो लोग आज क्षोभ व्यक्त कर रहे हैं चार जातियां उनका सब है तो इसका मतलब है कि सिड्यूल कास्ट का हक वही लोग लेते रहें? 76 वर्ष से तो वह लोग लेते ही रहे हैं।