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जेल में बंद निलंबित IPS आदित्य कुमार को बड़ी राहत: शराब कांड के FIR को HC ने किया रद्द, CJ के नाम पर DGP को फोन कराने का भी लगा था आरोप

PATNA: फतेहपुर शराब कांड में जेल में बंद निलंबित आईपीएस अधिकारी आदित्य कुमार को पटना हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। आईपीएस अधिकारी आदित्य कुमार की तरफ से दायर अपील पर सुनवाई करते

जेल में बंद निलंबित IPS आदित्य कुमार को बड़ी राहत: शराब कांड के FIR को HC ने किया रद्द, CJ के नाम पर DGP को फोन कराने का भी लगा था आरोप
Mukesh Srivastava
3 मिनट

PATNA: फतेहपुर शराब कांड में जेल में बंद निलंबित आईपीएस अधिकारी आदित्य कुमार को पटना हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। आईपीएस अधिकारी आदित्य कुमार की तरफ से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सत्यव्रत वर्मा की कोर्ट ने उनके खिलाफ फतेहपुर शराब कांड में दायर केस को रद्द कर दिया है। आईपीएस अधिकारी की अपील पर बुधवार को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था जिसे आज सुनाया गया।


दरअसल, साल 2021 के मार्च महीने में गया की फतेहपुर पुलिस ने शराब का कारोबार करने वाले गिरोह के कुछ अपराधियों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार बदमाशों की निशानदेही पर पुलिस ने शराब की बड़ी खेप को भी जब्त किया था। इसके कुछ दिनों बाद पुलिस ने कार से शराब की दूसरी खेप को पकड़ा था। इन दोनों ही मामलों में न तो जब्ती की सूची बनाई गई और ना ही कोई केस दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने दो भाइयों को कई एटीएम कार्ड के सा गिरफ्तार किया था लेकिन थानेदार ने जब्ती की सूची नहीं बनाई थी।


इस दौरान निलंबित आईपीएस अधिकारी आदित्य कुमार गया के एसएसपी थे जबकि अमित लोढ़ा वहां के आईजी हुआ करते थे। इस मामले को लेकर दोनों अधिकारियों के बीच ठन गई थी। तब आईजी अमित लोढ़ा ने पुलिस मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी थी। पुलिस मुख्यालय ने मामले की जांच के आदेश दिए और फतेहपुर थाने में शराब कांड को लेकर तत्कालीन एसएसपी आदित्य कुमार और थानेदार संजय कुमार के खिलाफ केस दर्ज हुआ था।


इसके बाद मामले में निलंबित आईपीएस अधिकारी आदित्य कुमार ने पांच दिसंबर को पटना की कोर्ट में सरेंडर कर दिया था, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें बेऊर जेल भेज दिया था। इस बीच आईपीएस अधिकारी आदित्य कुमार पर यह भी आरोप लगा कि उन्होंने शराब कांड मामले को खत्म कराने के लिए पटना हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस के नाम पर राज्य के पूर्व डीजीपी एसके सिंघल को व्हाट्सएप कॉल किया था। इस मामले में पूर्व डीजीपी के बयान पर आर्थिक अपराध इकाई ने आदित्य कुमार के खिलाफ केस दर्ज किया था।


इसी बीच केस की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पुलिस मुख्यालय के मद्य निषेध से रिपोर्ट मांगी थी। मद्य निषेध विभाग की तरफ से जो रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश की गई उसमें मिस्टेक ऑफ लॉ का हवाला देते हुए कहा गया कि आदित्य कुमार के खिलाफ कोई केस नहीं बनता है। मद्य निषेध विभाग की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए केस को खत्म करने के लिए कोर्ट में अपील दायर की गई। केस की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने माना कि आदित्य कुमार के ऊपर कोई केस नहीं बनता है। इसके बाद कोर्ट ने फतेहपुर थाने में आईपीएस अधिकारी के खिलाफ दर्ज केस को रद्द करने का आदेश दे दिया।