1st Bihar Published by: Updated Jun 07, 2020, 5:53:08 AM
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PATNA : कोरोना संकट के बीच बिहार वापस लौटने वाले मजदूरों को काम देने के नीतीश कुमार के वादे पर लोगों को भरोसा नहीं हो रहा है. लिहाजा बहुत जद्दोजहद के बाद बिहार लौटे मजदूर अब फिर से रोजी-रोटी की तलाश में परदेश जाने लगे हैं. पूर्णिया में मजदूरों से भरी लक्जरी बस बिहार से हरियाणा के लिए रवाना हो गयी है.
दरअसल बिहार के पूर्णिया जिले में कुछ दिन पहले ही प्रवासी मजदूर स्पेशल ट्रेन से अपने गृह नगर लौटे थे. सरकार के फरमान के मुताबिक वे 14 दिनों तक क्वारंटीन में रहे. लेकिन वापस घऱ गये तो रोजी-रोटी की समस्या सामने आ ग.. लिहाजा वे फिर से काम के लिए दूसरे राज्यों का रूख करने लगे हैं.
लक्जरी बस में सवार होकर हरियाणा रवाना हुए मजदूर
पूर्णिया के मजदूरों का एक जत्था लग्जरी बस में सवार होकर हरियाणा के लिए रवाना हो गया है. बस से हरियाणा लौटने वाले सयीद और साजिद ने बताया कि यहां रोजी रोटी की समस्या खड़ी हो गयी थी. लिहाजा हरियाणा से रोजगार का ऑफर आया तो उन्हें वापस लौटना ही उचित लगा. दोनों हरियाणा के एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करते थे. एक महीना पहले ही वे स्पेशल ट्रेन से बिहार लौटे थे. लेकिन आज फिर से वापस हरियाणा लौट गये.
सरकार के वादे पर भरोसा नहीं
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार ये दावा करते रहे हैं कि वापस लौटने वाले मजदूरों को बिहार में ही काम उपलब्ध कराया जायेगा. लेकिन लोगों को इस वादे पर यकीन नहीं है. पूर्णिया के अमौर ब्लॉक के रहने वाले मोहम्मद इजहरुल चंडीगढ़ से श्रमिक स्पेशल ट्रेन से लौटे थे. उन्होंने बताया कि मैंने अपना क्वारंटाइन पीरियड पूरा कर लिया है अब मुझे नहीं लगता कि यहां की सरकार हमारे लिए रोजगार मुहैया करा पाएगी. लिहाजा रोजगार के लिए फिर से परदेश जा रहे हैं. पूर्णिया से अभी तक 100 से ज्यादा श्रमिक हरियाणा लौट चुके हैं. उनके लिए हरियाणा के बड़े किसानों और व्यापारियों ने लग्जरी बसों को यहां भेजा था.
मजदूरों को एडवांस में दिया गया पैसा
पूर्णिया से वापस हरियाणा लौटे मजदूरों मुजफ्फर और दिलशाद ने बताया कि हरियाणा के व्यापारी ने उनके लिए एडवांस पैसा भेज दिया था. बस पर चढ़ने के पहले ही हमारे मालिक ने 20 से 30 हजार रुपए एडवांस में दे दिए. उनका कहना था कि कंपनी वालों ने भरोसा दिया है कि वे पहले के मुकाबले उसी काम के लिए एक से डेढ़ गुना ज्यादा पैसा देंगे. कोरोना संकट से पहले उन्हें रोजाना 500 से 700 रुपए मजदूरी मिलती थी. अब कम से कम 1000 रूपया मिलने की उम्मीद है.
डीएम बोले- जाने वाले को रोक नहीं सकते
उधर सरकार कह रही है कि हम वापस जाना चाह रहे लोगों को कैसे रोक सकते हैं. पूर्णिया के DM राहुल कुमार ने कहा कि सरकार की ओर से मजदूरों को काम देने की हर पहल की जा रही है. प्रशासन मजदूरों से यहीं रूकने का आग्रह कर रहा है. लेकिन अगर वे जाना चाहते हैं तो उन्हें कौन रोक सकता है.