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बिहार में शराब माफिया का तांडव ! एक साल में दो दर्जन से अधिक दफे पुलिस पर हमला, 4 की हुई मौत; यहां देखें इस साल का पूरा रिकॉर्ड

PATNA : बिहार में शराबबंदी कानून के लागू हुए अबतक 8 साल हो गए हैं। इन 8 सालों के अंदर कानून में संसोधन भी हुआ है। इसके बाबजूद इस कानून की सच क्या है वह किसी से छुपा हुआ नहीं है। आ

बिहार में शराब माफिया का तांडव ! एक साल में दो दर्जन से अधिक दफे पुलिस पर हमला, 4 की हुई मौत; यहां देखें इस साल का पूरा रिकॉर्ड
Tejpratap
Tejpratap
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PATNA : बिहार में शराबबंदी कानून के लागू हुए अबतक 8 साल हो गए हैं। इन 8 सालों के अंदर कानून में संसोधन भी हुआ है। इसके बाबजूद इस कानून की सच क्या है वह किसी से छुपा हुआ नहीं है। आज आलम यह है कि इस कानून के बाद इसके माफियाओं की संख्या में काफी तेजी से इजाफा हुआ है और ये माफिया इस कदर बेख़ौफ़ है कि पिछले एक साल में लगभग दर्जनों दफे पुलिस पर हमला किया गया और इसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं और दारोगा की जान भी चल गई। 


एक रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के पिछले एक साल में लगभग दो दर्जन से अधिक बार पुलिस पर हमला किया गया है। जिसकी शिकायत दर्ज है। इसके आलावा कई ऐसे भी मामले हैं जिसकी शिकायत दर्ज नहीं करवाई गयी है। इसलिए वो इस रिपोर्ट में शामिल नहीं है। वहीं इस रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक साल में पुलिसकर्मी के माफिया के हमले में मौत का आकड़ा देखें तो यह संख्या लगभग 4 के पास है। इसके आलावा घायलों की संख्या करीब से करीब 50 के आकड़ों को आसानी से पार का शतक के करीब पहुंच सकती है। 


यदि हम बारी - बारी से इस हमलों पर नजर डालें तो सबसे पहले हमें जनवरी के महीनों में हुए हमला पर नजर डालनी होगी। इस महीने में सबसे पहली घटना 17 जनवरी को मुजफ्फरपुर में हुई। जहां एक उत्पाद सिपाही को धंधेबाजों ने नदी में डुबाकर मार डाला। क्योंकि, इस सिपाही ने दो शराब कारोबारियों को पकड़ लिया था। यह घटना मुजफ्फरपुर के सकरा और मुशहरी थाना के दरधा और आथर गांव के सीमा पर बूढ़ी गंडक नदी के पास का था। 


इसके बाद इस महीने की दूसरी घटना 22 जनवरी को सामने आया। जहां शराब माफिया ने पुलिस पर अचानक से हमला बोल दिया। जिसमें कुछ पुलिसकर्मी को हल्की चोट आई। गनीमत रहा कि इस घटना में कोई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल नहीं हुए और जान बचाकर निकल गए। यह घटना ताड़ी दुकानों में शराब बेचने की सूचना से जुड़ा हुआ था। यह घटना मुजफ्फरपुर के कांटी स्थित रामनाथ धमौली पंचायत के सरमस्तपुर गांव का बताया गया था। जहाँ ताड़ी बेचने वाले और उनके समर्थकों ने उत्पाद पुलिस पर हमला कर दिया।


इसके बाद फरवरी महीने में रिकॉर्ड में कोई घटना नहीं आयी। लेकिन इसके अगले महीने यानि मार्च में 10 मार्च को नालंदा में शराब माफिया ने पुलिस पर बांस- बल्ले और डंडे से हमला  किय। यहां सिलाव थाना इलाके में  में शराब बेचने की सूचना मिलने के बाद जब पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तो शराब माफिया ने पुलिस पर क्रिकेट के बल्ले और डंडे से हमला कर दिया। जिसमें दो पुलिस कर्मी जख्मी हो गये। इसके बाद इसी महीने के 27 मार्च को आरा में  शराब माफिया के तरफ से पुलिस टीम पर हमला किया गया। 


यहां लाल बाजार में छापेमारी करने गई पुलिस टीम पर जमकर रोड़ेबाजी की गई। इतना ही नहीं  शराब माफिया ने पुलिस पर हमला कर उसके कब्जे से पकड़े गए अपराधियों को छुड़ा लिया था। इस  हमले में 6 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इसके बाद इस महीने के अंत में यानि 30 नवम्बर को मुंगेर में  पुलिस टीम पर हमला कर शराब माफिया को छुड़ा ले गए। यहाँ शराब माफियाओं को पकड़ने गई पुलिस पर  ग्रामीणों ने हमला कर दिया था। इसके  साथ ही शराब तस्करी के मामले में पकड़ाए मुख्य आरोपी को पुलिस से छुड़ाकर अपने साथ ले गई।  इस दौरान एक एसआई और सिपाही हमले में घायल हो गए। 


इसके अगले महीने के 24 अप्रैल को पटना के बिहटा में शराब माफियाओं ने पुलिस पर जोरदार हमला किया। यहां शराब तस्करी की सूचना पर मद्य निषेध विभाग की टीम बिहटा मूसेपुर गांव पहुंची थी। जहां शराब तस्करी के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार कर पुलिस जब अपने साथ ले जाने लगी तभी शराब माफिया के गुंडों ने छापेमार टीम की गाड़ी को चारों तरफ से घेर कर हमला बोल दिया और देखते-देखते रोड़े बाजी और पत्थरबाजी करना शुरू कर दिया। 


इसके उपरांत 5 जुलाई को सासाराम में शराब मफिया ने पुलिस पर हमला कर दिया था। इस घटना में इंस्पेक्टर समेत 7 जवान जख्मी हो गए थे। यह घटना  रोहतास से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। इस  हमले में इंपेक्टर समेत 7 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। यह घटना मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बड़हियाबाग के पास दयाल विगहा की है। यहां अवैध शराब की सूचना पर छापेमारी करने गई आबकारी विभाग की टीम पर शराब कारोबारियों ने  लाठी-डंडे और ईट-पत्थर से जमकर हमला किया था। इसके बाद इसी महीने 13 जुलाई हाजीपुर में शराब माफिया को पकड़ने गई पुलिस को ही बंधक बना लिया गया था। इतना ही माफिया गैंग पुलिस टीम का हथियार छीन कर फरार हो गई। 


वहीं, 24 जुलाई मोतिहारी में शराब तस्कर न  पुलिस टीम पर जानलेवा हमला किया था। यहां छापेमारी कर पुलिस टीम ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। इसके बाद लिस की इस कार्रवाई से स्थानीय लोग गोलबंद होकर पुलिस पर पथराव कर दिया। इस पथराव में 24  पुलिसकर्मी बुरी तरह जख्मी हो गए। इसके अगले ही दिन यानी  25 जुलाई मोतिहारी में थाने से 500 मीटर की दूरी एक पुलिस जवान का मर्डर कर दिया गया।


इसके अगले महीने 27 अगस्त के दिन दो अलग -अलग जगह पर पुलिस पर हमला किया गया। पहली घटना पटना के पालीगंज का था। जहां उत्पाद टीम पर शराब माफिया ने जोरदार हमला किया है। इसके अलावा औरंगाबाद में अवैध शराब के ठिकाने पर रेड डालने गई पुलिस पर माफिया ने हमला किया। जिसमें  एक दारोगा का सीर फट गया और तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए। इसके बाद 17 सितम्बर को समस्तीपुर में पुलिस पर हमला किया गया। यहां  शराब कांड के आरोपी को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस टीम पर आरोपी के परिजनों ने हमला कर दिया था। यह घटना समस्तीपुर जिले के शिवाजीनगर ओपी क्षेत्र अंतर्गत घिबाई गांव का था। जहां शराब माफिया के परिजनों ने थाने के एएसआई विनोद कुमार के साथ जमकर मारपीट की थी। 


वहीं, अक्टूबर महीने की बात करें तो  2 तारीख को वैशाली पुलिस पर शराब माफिया का हमला किया था। ये वारदात डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के इलाके राघोपुर में हुई है। इस इलाके में बड़े पैमाने पर शराब की भट्टियों के होने की खबर मिली थी। एक्साइज विभाग की टीम जब कार्रवाई करने पहुंची तो मौके पर मौजूद लोगों ने हमला कर दिया। इसके बाद 6 अक्टूबर को बेतिया में छापेमारी करने गई पुलिस टीम पर हमला किया गया। जहां भोपतपुर ओपी क्षेत्र में गुप्त सूचना के आधार पर शराब माफियाओं पर कार्रवाई करने गई पुलिस टीम पर हमला कर दिया गया। इस दौरान कुछ पुलिसकर्मी मामूली रूप से घायल हो गए। हालांकि बाद में जब दो थानों की पुलिस गांव में पहुंची तो मौके से शराब माफिया मौके से फरार हो गए। इसके बाद 28 अक्टूबर छपरा में शराब माफियाओं को पकड़ने गई पुलिस टीम पर हमला किया गया। 


इसके बाद छपरा जिले के तरैया थाना क्षेत्र के खराटी गांव का है। जहां यहां शराब के खिलाफ छापेमारी करने गई पुलिस पर शराब माफियाओं ने हमला कर पथराव करते हुए सरकारी वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया था। इसके बाद इसी महीने में  31 अक्टूबर को बांका में शराब तस्करों को पकड़ने गई पुलिस टीम पर हमला किया गया। जहां बांका जिला के धनकुंड थानाक्षेत्र में शराब तस्करों को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम पर शराब माफियाओं ने हमला कर दिया और पुलिस वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया था। इस  घटना में पुलिस के 2 जवान गंभीर रूप से जख्मी हुए हो गए। घायल जवानों के नाम रमेश प्रसाद राय और धनंजय कुमार क नाम शामिल था। 


इसके बाद पिछले महीने यानी 14 नवंबर को जमुई में माफिया ने दारोगा की कुचल कर जान ले ली। यहां जमुई में चेकिंग कर रहे पुलिस दस्ते को माफिया के ट्रैक्टर ने कुचल दिया। जिसमें दरोगा की मौत हो गई और कई सिपाही गंभीर रूप से जख्मी हो गए। जिसमे दारोगा प्रभात रंजन की मौत हो गई। इसके बाद इस बीते कल बेगूसराय जिले में शराब माफिया का आतंक देखने को मिला है। अवैध शराब लेकर जा रहे तस्करों ने बिहार पुलिस के एक दारोगा को कार से कुचलकर मार डाला। इस हमले में होमगार्ड का एक जवान भी घायल हुआ है, जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। यह घटना मंगलवार रात नावकोठी थाना इलाके में हुई। नावकोठी में एसआई पद पर तैनात खमास चौधरी की मौत हो गई। पुलिस ने कार चालक को हिरासत में ले लिया है, उससे पूछताछ की जा रही है।