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बिहार में मिले 6253 नए कोरोना मरीज, राज्य में एक्टिव मरीजों की संख्या 33 हजार के पार, 20 लोगों की मौत

1st Bihar Published by: Updated Apr 16, 2021, 9:52:49 PM

बिहार में मिले 6253 नए कोरोना मरीज, राज्य में एक्टिव मरीजों की संख्या 33 हजार के पार, 20 लोगों की मौत

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PATNA : बिहार में कोरोना के बढ़ते संक्रमण का मामला कम नहीं हो रहा है. राज्य में कोरोना मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती ही जा रही है. बिहार में शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 6253 नए संक्रमित मिले हैं. इसके साथ ही बिहार में  कोरोना के एक्टिव मामले 33465 हो गए हैं.


शुक्रवार को बिहार सरकार की ओर से जारी ताजा आंकड़े के मुताबिक राज्य में 6253 नए संक्रमित मिले हैं. राजधानी पटना में एक दिन में 1364 नए संक्रमित मिले हैं. सरकार ने बताया कि विगत 24 घंटे में कुल एक लाख 404 लोगों की जांच हुई है. अबतक कुल 2 लाख 72 हजार 403 मरीज ठीक हुए हैं, जिसके कारण बिहार में कोरोना मरीजों का रिकवरी प्रतिशत 88.57 है. फिलहाल सूबे में कोरोना के एक्टिव मरीजों की संख्या 33 हजार 465 है.



उधर दूसरी और बिहार में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए लॉकडाउन की आहट तेज हो गई है. इनडोर और आउटडोर स्टेडियम, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, स्विमिंग पूल, जिम सेंटर आदि को 16 मई तक के लिए बंद कर दिया है. इस दौरान मैदान या किसी भी जगह खेल व अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन की मनाही होगी.कोरोना की दूसरे लहर के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है. 



शुक्रवार को पटना के पीएमसीएच में 11 मरीजों की मौत हुई है. जबकि एनएमसीएच में में 9 लोगों ने दम तोड़ा है. आपको बता दें कि बिहार विधानसभा में आज 20 और अधिकारी-कर्मी पॉजिटिव पाए गए हैं. जिसके कारण बिहार विधानसभा को 25 अप्रैल तक पूरी तरह से बंद कर दिया गया है. बिहार विधानसभा के अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने शुक्रवार को 17 से 25 अप्रैल तक विधानसभा सचिवालय पूर्णरूपेण बंद करने का आदेश दिया है. इस दौरान पूर्व से निर्धारित अति महत्वपूर्ण कार्यों का निष्पादन ही हो सकेगा. कार्यालय बंदी की इस अवधि में सभी पदाधिकारियों और कर्मचारियों को मुख्यालय में रहने और अपना मोबाइल ऑन रखने का आदेश दिया गया है.


कार्यालय बंद रहने के दौरान सभा सचिवालय की सभी शाखाओं को सैनिटाइज किये जाने का भी आदेश उन्होंने दिया है. विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि कोई भी सरकार चिकित्सक के माध्यम से मात्र बीमारी का इलाज करा सकती है. महामारी का इलाज सावधानी, सतर्कता और समाज की जागरूकता पर निर्भर करता है.