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71की उम्र में मटुकनाथ को 'सुंदर सुशील बुढिया' की तलाश, FACEBOOK पर लिखा 'आवश्यकता'

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Dec 29, 2024, 5:02:18 PM

71की उम्र में मटुकनाथ को 'सुंदर सुशील बुढिया' की तलाश, FACEBOOK पर लिखा 'आवश्यकता'

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DESK: एक समय था जब हर वेलेंन्टाईन डे पर मटूकनाथ और जूली की चर्चा मीडिया में खूब होती थी। दोनों के इस रिश्तों को लेकर मटूकनाथ की पत्नी अक्सर नाराज रहती थी। वो इसका विरोध भी किया करती थी लेकिन लव-गुरु जुली का साथ नहीं छोड़ना चाहते थे। दोनों के रिश्ते की चर्चा देश और विदेशों में हुआ करती थी। समय बीतने के साथ दोनों के रिश्तों में अचानक दरार आ गई और मटुकनाथ का साथ छोड़कर जूली चली गयी। 


वेस्टइंडीज में कोरोना के वक्त  जूली की तबीयत ज्यादा खराब हो गयी थी तब मटुकनाथ ने मदद के लिए सामने आए थे। उसके बाद जूली गोवा चली गयी जहां आध्यात्मिक जीवन व्यतीत कर रही है अब वो इस्कॉन मंदिर की साधना कर रही है वही मटुकनाथ अपने गांव नवगछिया में अकेले रह रहे हैं। स्कूल चलाकर बच्चों को पढ़ा रहे है। जूली के छोड़कर जाने के बाद मटुकनाथ अकेलापन की जिन्दगी जी रही हैं। दोनों की प्रेम कहानी ने शुरु-शिष्य की परम्परा के साथ उम्र का बंधन भी तोड़ दिया। मटुकनाथ ने कहा था कि प्यार जाति धर्म और उम्र के बंधन में नहीं बंधता है। उनकी और जूली की लव स्टोरी भी 2006 में ऐसे ही परवान चढ़ी थी, लेकिन 2014 में प्यार ने दम तोड़ दिया।


रिश्तों में दरार के बाद जूली ने मटुकनाथ का साथ छोड़ दिया। जिसके बाद अब उन्हें अकेलेपन का सामना करना पड़ रहा है। इस कठिन वक्त में साथ देने के लिए प्रोफेसर मटुकनाथ को साथी की तलाश है। फेसबुक पर उन्होंने एक पोस्ट शेयर कर खुद के लिए प्रेमिका की तलाश शुरू कर दी है। जूली से अलग होने के बाद अब 71 वर्षीय लव गुरु मटुकनाथ को बूढ़ी प्रेमिका की तलाश है। उन्होंने प्रेमिका के लिए वैकेंसी निकाली है कहा है कि उन्हें सुंदर सुशील बुढिया का इंतजार है। मटुकनाथ को बुढापे में जीवन साथी की तलाश है। सोशल मीडिया पर लिखकर उन्होंने अपनी दिल की बातें रखी है। 


FACEBOOK पर उन्होंने लिखा कि आवश्यकता...एक पढ़े-लिखे, समझदार इकहत्तर वर्षीय बूढ़े किसान को पढ़ी-लिखी, समझदार 50-60 के बीच की बुढ़िया चाहिए। बहुत पसंद आ जाने पर उमर में ढील दी जायेगी। शर्त एक ही है कि वासना रहित प्यार की लेन-देन में सक्षम हो। प्यार, पुस्तक और यात्रा में दिलचस्पी हो। पर निंदा से दूर रहे। जब भी किसी की चर्चा करे तो उसके गुणों की है। सादा और स्वादिष्ट भोजन बनाने में निपुण हो। पुरुषों से सहयोग लेने की कला में पटु हो। ध्यान में दिलचस्पी हो तो कहना ही क्या ! हंसमुख हो। निरर्थक बातें न करती हो। धन -लोभी न हो। सज्जनों के प्रति प्रेम और दुर्जनों के प्रति क्रोध से भरी हो। बूढ़े ने बुढ़िया से इतने गुणों की अपेक्षा इसलिए की है, क्योंकि ये गुण उसमें भी विद्यमान हैं।