Bihar NH 333A News: बिहार और झारखंड को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-333ए (NH-333A) के चौड़ीकरण का रास्ता अब साफ हो गया है. मुंगेर प्रमंडल के आयुक्त ने जमीन अधिग्रहण के बदले व्यावसायिक दर पर मुआवजा देने की किसानों की मांग खारिज कर दी है. अब प्रभावित किसानों को सरकार की ओर से तय सिंचित कृषि भूमि की दर के अनुसार ही मुआवजा दिया जाएगा. इस फैसले के बाद लंबे समय से अटकी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है.
यह राष्ट्रीय राजमार्ग लखीसराय जिले के हलसी प्रखंड से होकर गुजरता है. यह सड़क बरबीघा, शेखपुरा, सिकंदरा, जमुई और चकाई होते हुए झारखंड के देवघर तक जाती है. करीब पांच साल पहले इस सड़क को राष्ट्रीय राजमार्ग-333ए का दर्जा मिला था. इसके बाद सड़क को चौड़ा करने की योजना बनाई गई. परियोजना के तहत सड़क के दोनों तरफ करीब 50-50 फीट जमीन का अधिग्रहण किया जाना है.
जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद कई किसानों ने मुआवजे की दर को लेकर आपत्ति जताई थी. किसानों का कहना था कि वर्ष 2022 में सड़क किनारे की कुछ जमीन का रजिस्ट्रेशन व्यावसायिक दर पर हुआ था. इसलिए अधिग्रहण के दौरान भी उसी आधार पर मुआवजा दिया जाना चाहिए. इस मांग को लेकर किसानों ने मुंगेर प्रमंडल के आयुक्त के पास आवेदन भी दिया था.
मामले की सुनवाई के बाद प्रमंडलीय आयुक्त ने किसानों की मांग को अस्वीकार कर दिया. आदेश में साफ कहा गया कि जमीन का मुआवजा सरकार के तय नियमों के अनुसार सिंचित कृषि भूमि की निर्धारित दर पर ही दिया जाएगा. इसके बाद अब किसानों के पास सरकारी दर पर मुआवजा स्वीकार करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है.
इस परियोजना के तहत अकेले हलसी प्रखंड में 205 किसानों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी. इनमें लालपुर के 20, तरहारी के 54, पिपरा के 24, मतासी के 72 और महरथ गांव के 35 किसान शामिल हैं. प्रशासन का मानना है कि जमीन अधिग्रहण पूरा होने के बाद चौड़ीकरण का काम तेजी से शुरू किया जा सकेगा.
राष्ट्रीय राजमार्ग-333ए के चौड़ीकरण से लखीसराय, शेखपुरा, जमुई और झारखंड के देवघर के बीच सफर पहले से आसान और सुरक्षित होने की उम्मीद है.





