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झारखंड के सबसे छोटे कद के व्यक्ति ने सरकार से मदद की लगाई गुहार, 43 साल की उम्र में भी खिरोधर महतो को मां की गोद है सहारा

HAZARIBAG: झारखंड के हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ में रहने वाले खिरोधर महतो झारखंड के सबसे छोटे कद के व्यक्ति हैं। खिरोधर महतो की लंबाई 28 इंच और उम्र 43 साल है। वे 12वीं तक की

झारखंड के सबसे छोटे कद के व्यक्ति ने सरकार से मदद की लगाई गुहार, 43 साल की उम्र में भी खिरोधर महतो को मां की गोद है सहारा
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

HAZARIBAG: झारखंड के हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ में रहने वाले खिरोधर महतो झारखंड के सबसे छोटे कद के व्यक्ति हैं। खिरोधर महतो की लंबाई 28 इंच और उम्र 43 साल है। वे 12वीं तक की पढ़ाई कर चुके हैं। खिरोधर चलने फिरने में असमर्थ हैं। 43 साल की उम्र में भी मां का गोद ही सहारा है। अब तक कई मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगा चुके हैं लेकिन आश्वासन के सिवाय कुछ भी हासिल नहीं हुआ। अब खिरोधर और उनकी मां हेमंत सरकार से मदद की मांग कर रहे हैं।   


खिरोधर ने बताया कि  उन्हें कही जाना होता है तो मां गोद में लेकर जाती है। कही आने जाने के लिए उनके पास कोई साधन तक नहीं है। खिरोधर महतो इस बात को लेकर ज्यादा चिंतित रहते हैं कि यदि उनकी मां नहीं रही तो उनका क्या होगा। कौन उसका ख्याल रखेगा। खिरोधर एक छोटा किराना का दुकान चलाते हैं जिससे उनका और मां का गुजारा होता है। 


खिरोधर को इस बात का मलाल है कि उन्होंने शिबू सोरेन, मधु कोड़ा, बाबू लाल मरांडी और वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मदद की गुहार लगायी थी। नौकरी और ट्राइसाइकिल की मांग की थी लेकिन आज तक उनकी मांगे पूरी नहीं हो सकी। खिरोधर काफी संघर्ष पूर्ण जिन्दगी गुजार रहे हैं। खिरोधर कहते हैं कि चल पाने में वे पूरी तरह से असमर्थ हैं जिसके कारण आज तक वे स्कूल नहीं जा सके। 


सिर्फ एग्जाम देने के लिए मां की गोद में चढ़कर वे परीक्षा केंद्र तक किसी तरह गये और दसवीं और 12वीं की परीक्षा पास की। उन्हें देखते ही लोग भीड़ लगा देते हैं और तरह-तरह की चर्चा करने लगते हैं। खिरोधर को अपने इस कद की वजह से काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। मां ही  उनकी सेवा करती है। वह ठीक से चल भी नहीं पाता। सिर्फ सोकर लिख पाते है।


 खिरोधर को इस बात की चिंता है कि मां के बाद कौन उसकी देखभाल कौन करेगा? यह बात सोचकर वे काफी परेशान रहते हैं। खिरोधर झारखंड सरकार से नौकरी की मांग कर रहे हैं। और आने जाने की सुविधा मांग रहे हैं। अभी एक हजार रुपया पेंशन के तौर पर मिलता है। राशन कार्ड के रूप में उन्हें ग्रीन कार्ड मिला हुआ है जिससे उन्हें कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है।


 खिरोधर कहता है कि वह अब तक कई मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगा चुका है लेकिन आश्वासन के सिवाय उसे आज तक कुछ भी हासिल नहीं हो पाया है। वही उनकी मां का कहना है कि उन्होंने बेटे को कई डॉक्टरों से दिखाया। दस साल तक दवा चला लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। खिरोधर की मदद के लिए उसका मां सरकार से गुहार लगा रही है।  

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