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पश्चिम बंगाल में CBI को मिली जांच की छूट, शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला

पश्चिम बंगाल सरकार ने CBI को केंद्र सरकार के कर्मचारियों और केंद्रीय उपक्रमों से जुड़े मामलों की जांच की सीमित अनुमति दे दी है। हालांकि राज्य सरकार के कर्मचारियों से जुड़े मामलों में CBI को अब भी जांच से पहले राज्य सरकार की मंजूरी लेनी होगी।

West Bengal CBI Consent
प्रतिकात्मक तस्वीर
© Google
Mukesh Srivastava
3 मिनट

West Bengal CBI Consent: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को जांच संबंधी सीमित सामान्य सहमति देने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है। गृह एवं पर्वतीय मामले विभाग की ओर से 8 जून 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (DSPE) अधिनियम, 1946 के तहत CBI को कुछ विशेष मामलों की जांच की अनुमति प्रदान की गई है।


अधिसूचना के मुताबिक, CBI अब पश्चिम बंगाल में केंद्र सरकार के कर्मचारियों से जुड़े मामले, केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के अधिकारियों और कर्मचारियों से जुड़े मामले, ऐसे व्यक्ति या संस्थाएं, जिन पर केंद्रीय कर्मचारियों या केंद्रीय उपक्रमों के कर्मियों के साथ मिलकर अपराध करने का आरोप हो ऐसे मामलों की जांच कर सकेगी। यह अनुमति 8 जून 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।


हालांकि, इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि CBI को पश्चिम बंगाल में सभी मामलों की जांच की खुली छूट मिल गई है। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि पश्चिम बंगाल सरकार के नियंत्रण वाले राज्य सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों से जुड़े मामलों में CBI सीधे जांच शुरू नहीं कर सकेगी। ऐसे मामलों में एजेंसी को पहले राज्य सरकार से अलग से लिखित अनुमति प्राप्त करनी होगी।


CBI को यह अधिकार दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (DSPE) अधिनियम, 1946 की धारा 6 के तहत दिया गया है। इस प्रावधान के अनुसार किसी राज्य में जांच के लिए सामान्य सहमति या विशेष अनुमति आवश्यक होती है।


राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा थी कि पश्चिम बंगाल सरकार ने CBI को राज्य में जांच की पूरी छूट दे दी है। हालांकि अधिसूचना का अध्ययन करने पर स्पष्ट होता है कि यह सहमति केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों, केंद्रीय उपक्रमों और उनसे जुड़े मामलों तक सीमित है।


राज्य सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों के मामलों में CBI को अब भी राज्य सरकार की पूर्व अनुमति लेनी होगी। ऐसे में इसे CBI को दी गई पूर्ण सामान्य सहमति के बजाय सीमित दायरे वाली जांच अनुमति माना जा रहा है। 

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता