ब्रेकिंग
शोभा ओहटकर बनीं बिहार कर्मचारी चयन आयोग की नई अध्यक्ष, सरकार ने जारी की अधिसूचनाअब हेलीकॉप्टर से कर सकेंगे बाबा बैद्यनाथ धाम और बासुकीनाथ धाम के हवाई दर्शन, जानिए किराया और पूरी जानकारीपति ने पत्नी की बेवफाई के 97 वीडियो और 237 तस्वीर कोर्ट में पेश किया: सुप्रीम कोर्ट ने सुना दिया बड़ा फैसलावैशाली डबल मर्डर केस में बड़ा एक्शन, फरार आरोपियों के घर कुर्की-जब्ती, बुलडोजर लेकर पहुंची पुलिसअजब-गजब खेल : अंचल अधिकारी ने 5 के खिलाफ केस दर्ज कराया...24 घंटे में ही आईओ ने छठे का नाम घुसाकर केस डायरी कोर्ट में भेज दिया...पर खुल गई पोल शोभा ओहटकर बनीं बिहार कर्मचारी चयन आयोग की नई अध्यक्ष, सरकार ने जारी की अधिसूचनाअब हेलीकॉप्टर से कर सकेंगे बाबा बैद्यनाथ धाम और बासुकीनाथ धाम के हवाई दर्शन, जानिए किराया और पूरी जानकारीपति ने पत्नी की बेवफाई के 97 वीडियो और 237 तस्वीर कोर्ट में पेश किया: सुप्रीम कोर्ट ने सुना दिया बड़ा फैसलावैशाली डबल मर्डर केस में बड़ा एक्शन, फरार आरोपियों के घर कुर्की-जब्ती, बुलडोजर लेकर पहुंची पुलिसअजब-गजब खेल : अंचल अधिकारी ने 5 के खिलाफ केस दर्ज कराया...24 घंटे में ही आईओ ने छठे का नाम घुसाकर केस डायरी कोर्ट में भेज दिया...पर खुल गई पोल

पति ने पत्नी की बेवफाई के 97 वीडियो और 237 तस्वीर कोर्ट में पेश किया: सुप्रीम कोर्ट ने सुना दिया बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने गुजारा भत्ता से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में कहा है कि यदि पति प्रथम दृष्टया ठोस सबूतों से यह स्थापित कर दे कि पत्नी विवाहेतर संबंध में रह रही है, तो अंतरिम गुजारा भत्ता भी रोका जा सकता है।

बिहार न्यूज
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
9 मिनट

DELHI: सुप्रीम कोर्ट ने पति-पत्नी के बीच गुजारा भत्ता से जुड़े मामले में एक बेहद अहम फैसला सुनाया है. पति-पत्नी के बीच विवाद का ये मामला सुप्रीम कोर्ट में आया था. पति ने 97 वीडियो और 237 तस्वीरें पेश की थी, जिससे ये साबित हो सके कि शादी के बाद भी पत्नी दूसरे व्यक्ति के साथ संबंध बनाकर रह रही थी.


अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर पत्नी बेवफा है और उसका किसी दूसरे व्यक्ति से शारीरिक संबंध है तो उसका खामियाजा पति को नहीं भुगतना पड़ेगा. अगर पति स्पष्ट सबूतों के जरिए यह साबित कर देता है कि उसकी पत्नी किसी दूसरे व्यक्ति के साथ विवाहेतर संबंध (adultery) में रह रही है, तो पत्नी को गुजारा भत्ता लेने का अधिकार नहीं है.


ठोस सबूत हो तो लिया जा सकता है फैसला 

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि सिर्फ पति द्वारा आरोप लगा देना पर्याप्त नहीं होगा. विवाहेतर संबंध का आरोप प्रथम दृष्टया स्पष्ट और सबूतों से साबित होना चाहिये. इसके बाद ही अंतरिम गुजारा भत्ता रोकने का प्रावधान लागू हो सकता है. यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने हिमांशु चोरडिया बनाम राजस्थान सरकार और अन्य के मामले में दिया है.


क्या कहता है कानून?

यह मामला दंड प्रक्रिया संहिता यानी CrPC की धारा 125 से जुड़ा है. इस धारा के तहत पत्नी तलाक या अलगाव की स्थिति में अपने पति से गुजारा भत्ता मांग सकती है. लेकिन CrPC की धारा 125(4) में इसका एक अपवाद भी दिया गया है. इसके मुताबिक अगर पत्नी शादी के बाद किसी दूसरे व्यक्ति के साथ संबंध बना कर रह रही है, तो वह पति से गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट के सामने सवाल यह था कि इस आधार पर पत्नी का अंतरिम गुजारा भत्ता भी रोका जा सकता है या पति को मुख्य मामले का अंतिम फैसला आने तक इंतजार करना होगा।


सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि पति धारा 125(4) के तहत आवेदन देता है और शुरुआती स्तर पर ही ऐसे सबूत पेश करता है जिनसे प्रथम दृष्टया पत्नी के किसी दूसरे व्यक्ति के साथ  संबंध में रहने की बात साबित होती है तो अंतरिम गुजारा भत्ता देने पर भी रोक लग सकती है.  यानी अब यह जरूरी नहीं कि इस मुद्दे पर फैसला मुख्य गुजारा भत्ता मामले के अंतिम निपटारे के समय ही हो.


लेकिन कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण शर्त भी लगाई है. कोर्ट ने कहा है कि पत्नी पर किसी दूसरे व्यक्ति के साथ संबंध का आरोप स्पष्ट रूप से साबित होता दिखाई देना चाहिए। केवल संदेह या आरोप के आधार पर पत्नी का अंतरिम गुजारा भत्ता नहीं रोका जा सकता.


क्या है पूरा मामला?

यह मामला राजस्थान के एक दंपती से जुड़ा है. दोनों की शादी जुलाई 2014 में हुई थी. शादी के कुछ साल बाद पति-पत्नी के रिश्ते खराब होने लगे. मई 2020 में पत्नी अपने बच्चे को लेकर ससुराल छोड़कर चली गई. इसके बाद नवंबर 2020 में पत्नी ने उदयपुर की अदालत में CrPC की धारा 125 के तहत पति से गुजारा भत्ता मांगा. इसके साथ ही उसने मामला लंबित रहने के दौरान अंतरिम गुजारा भत्ता देने की भी मांग की.


पति ने लगाया अवैध संबंध का आरोप

पत्नी की मांग के जवाब में पति ने CrPC की धारा 125(4) के तहत आवेदन दिया. पति का आरोप था कि उसकी पत्नी किसी दूसरे व्यक्ति के साथ संबंध में रह रही है. इसलिए कानून के मुताबिक उसे गुजारा भत्ता पाने का अधिकार नहीं है. अपने आरोप के समर्थन में पति ने अदालत के सामने तस्वीरें और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी पेश किए.


निचली अदालत ने पति को राहत देने से किया था इनकार

ट्रायल कोर्ट ने पति के आवेदन पर उसी समय फैसला करने से इनकार कर दिया. अदालत का कहना था कि पति द्वारा पेश तस्वीरों और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री की सत्यता और मौलिकता की जांच विधिवत सबूत पेश होने के बाद ही की जा सकती है. इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने पत्नी और बेटे को 25-25 हजार रुपये अंतरिम गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया.


हाई कोर्ट से भी पति को राहत नहीं मिली

पति इसके खिलाफ राजस्थान हाई कोर्ट पहुंचा। लेकिन हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इसके बाद पति ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.


सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों के नजरिए को गलत माना

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निचली अदालतों के रुख से अपनी असहमति जताई. शीर्ष अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने पति द्वारा CrPC की धारा 125(4) के तहत दिए गए आवेदन पर मुख्य गुजारा भत्ता मामले का अंतिम फैसला होने से पहले विचार न करके गलती की है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले को वापस ट्रायल कोर्ट भेज दिया है और निर्देश दिया है कि पति के आवेदन पर उसके गुण-दोष के आधार पर फैसला किया जाए।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पत्नी के विवाहेतर संबंध को साबित मान लिया है. अब निचली अदालत उपलब्ध सबूतों के आधार पर इस आरोप पर फैसला करेगी.



पति ने 92 वीडियो और 237 तस्वीरें पेश किया

इस केस का एक और पहलू पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है. पति ने पत्नी के कथित अवैध संबंध को साबित करने के लिए करीब 92 वीडियो और 237 तस्वीरें पेश की थीं. इतनी बड़ी संख्या में निजी तस्वीरें और वीडियो कैसे जुटाए गए, इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल खड़े किए. कोर्ट को आशंका हुई कि इन सबूतों को इकट्ठा करने के लिए किसी प्राइवेट इन्वेस्टिगेटर या निजी जासूस की मदद ली गई हो सकती है।


निजी जासूसों पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि ये तस्वीरें किसने खींचीं? क्या तस्वीरें लेने वाले व्यक्ति को ऐसा करने का अधिकार था? इतनी बड़ी मात्रा में वीडियो और तस्वीरों को किस तरह सुरक्षित रखा गया? कोर्ट ने आधुनिक तकनीक के दौर में तस्वीरों और वीडियो को एडिट, मॉर्फ या छेड़छाड़ किए जाने की संभावना पर भी चिंता जताई.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में व्यक्ति की निजता के अधिकार और निजी डेटा की सुरक्षा का सवाल भी पैदा होता है.


प्राइवेट डिटेक्टिव के लिए नियम बनाने की जरूरत

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत में निजी जांचकर्ताओं और डिटेक्टिव एजेंसियों के कामकाज को नियंत्रित करने के लिए उचित व्यवस्था की जरूरत है. यह तय होना चाहिए कि निजी जांचकर्ता किसी व्यक्ति की निगरानी करते समय कहां तक जा सकते हैं. अगर वे अपनी पेशेवर सीमा पार कर किसी व्यक्ति की निजता या अधिकारों का उल्लंघन करते हैं तो शिकायत और कार्रवाई की व्यवस्था भी होनी चाहिए.  कोर्ट ने कहा कि बदलती तकनीक के साथ सबूत जुटाने के नए तरीकों से निपटने के लिए भी एक प्रभावी व्यवस्था जरूरी है.


केंद्र और लॉ कमीशन को भेजा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि निजी जासूसी एजेंसियों को नियंत्रित करने के लिए साल 2007 में संसद में एक विधेयक पेश किया गया था.  अब कोर्ट ने अपने फैसले की एक प्रति केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय के सचिव और भारत के विधि आयोग के अध्यक्ष को भेजने का निर्देश दिया है, ताकि निजी जांचकर्ताओं और डिटेक्टिव एजेंसियों को लेकर नियम के मुद्दे पर विचार किया जा सके.


फैसले का सीधा मतलब

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अर्थ यह नहीं है कि पति केवल पत्नी पर गलत संबंध का आरोप लगाकर उसका गुजारा भत्ता बंद करा सकता है. पति को शुरुआती स्तर पर ही ऐसे स्पष्ट सबूत दिखाने होंगे जिनसे आरोप प्रथम दृष्टया स्थापित हो.  तभी अदालत CrPC की धारा 125(4) के आधार पर अंतरिम गुजारा भत्ता रोकने पर विचार कर सकती है.

टैग्स